१२५ करोड़ के कारोबार पर हड़ताल का असर

ग्राहकों के लिए कर्मचारियों ने किया बैंक के सामने प्रदर्शन, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले बैंकों के सारे कर्मचारी संगठन उतरे मैदान में

By: bhuvanesh pandya

Published: 22 Aug 2017, 09:48 PM IST

रतलाम। जिस बैंक में वे रोजाना कार्य करते हुए ग्राहकों को सेवाएं देते हैं उसी बैंक के सामने मंगलवार को बैंक कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर आक्रोश जताया। ठीक पौने ११ बजे सारे बैंक संगठनों से जुड़े कर्मचारी और कर्मचारी नेता बैंक ऑफ बड़ौदा की स्टेशन रोड शाखा के सामने एकत्रित हुए। शहर और जिले की १४० से ज्यादा बैंकों की हड़ताल होने से एक करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार प्रभावित। बैंकों में ताले लगे होने ग्राहकों को परेशानी झेलना पड़ी। जिलेभर की करीब डेढ़ सौ बैंकों के छह सौ से ज्यादा कर्मचारियों व अधिकारियों के हड़ताल पर रहने से १००-१२५ करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है।

यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंकर्स यूनियन के तत्वाधान में राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत जिले की भी सभी बैंकों के कर्मचारी एक दिन की हड़ताल पर उतर गए हैं। सभी ने जमकर नारेबाजी करते हुए सरकार की नीतियों को कोसा और नारे लगाते हुए कहा कि चाहे जो मजबूरी हो, मांग हमारी पूरी हो। फोरम के हरीश यादव व राजेश तिवारी ने बताया हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की दोहरी नीति को लेकर विरोध दर्ज कराया है। एक तरफ सरकार राष्ट्रीयकृत बैंकों को मर्ज कर रही है तो दूसरी तरफ निजी बैंकों को लाइसेंस जारी कर रही है। जब निजी बैंकों को लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं तो फिर राष्ट्रीयकृत बैंकों का विलय क्यों किया जा रहा है।

ये रहे मौजूद

बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने किए गए प्रदर्शन में कामरेड अश्विनी शर्मा सहित बैंक कर्मचारी यूनियनों के नेताओं ने संबोधित किया। इस अवसर पर राजेश तिवारी, हरीश यादव, नरेंद्रकुमार सोलंकी, पद्माकर पागे, आरएन विजयवर्गीय, विशाल शर्मा, नरेंद्र पुरोहित, प्रकाश अग्रवाल, इंदु लसोड़, चरणसिंह, संजय लोणकर, प्रदीप श्रीमाल, राजेश जोशी, शंकरलाल परमार, नरेंद्र यादव, योगेश कोकरा, श्याम जोशी, हरीश दरवानी, नितिन बैरागी, राजेश पटेल, रमेश शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।

ये हैं मुख्य मांगें

- खराब ऋणों की वसूली के लिए संसदीय समिति की अनुशंसाओं को लागू करने

- खराब ऋण वसूली के लिए कठोर कदम उठाने

- प्रस्तावित एफआरडीआई बिल वापसी

- बैंक्स बोर्ड ब्यूरो को समाप्त करना, सभी संवर्गों की समूचित भर्ती करना

- बैंक कर्मचारी-अधिकारी के मुद्दों का निराकरण किए जाने की मांग प्रमुख है।

फैक्ट फाइल

जिले में बैंकों की संख्या

१४०

बैंकों के अधिकारी कर्मचारी

६००

कारोबार प्रभावित हुआ

१००-१२५ करोड़ रुपए

चेक अटके

१ करोड़ से ज्यादा के

हर दिन ट्रांजेक्शन होता है बैंकों में

३.००-३.५० करोड़

मांगे नहीं मानी तो आंदोलन बढ़ेगा

यूनाइटेड बैंक फोरम ने सरकार के सामने जो मांगे रखी है वे जायज मांगे हैं। इसी के समर्थन में सारे बैंकों के अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल पर उतरे हंैं। यह एक दिन की हड़ताल थी लेकिन सरकार ने मांगों पर विचार नहीं किया और इन्हें नहीं माना तो आगे भी हड़ताल का दौर लगातार जारी रहेगा।


राजेश तिवारी, बैंक कर्मचारी नेता


डिजीटल युग में सब काम बैंकों से हो रहे हैं, तो बैंकों की हड़ताल से निश्चितरूप से आम आदमी और व्यापारियों को परेशानी झेलना पड़ी है। व्यापारी वर्ग को अपनी पार्टियों से लेन-देन करने में भी दिक्कत आई है।

- अशोक खाबिया, व्यापारी

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