एक मदद और इनका घर हो गया लाड़ली से रोशन

एक मदद और इनका घर हो गया लाड़ली से रोशन

harinath dwivedi | Publish: Dec, 07 2017 11:11:37 AM (IST) Ratlam, Madhya Pradesh, India

जिला अस्पताल में लगने वाले रोशनी क्लिनिक में प्रकरण तैयार करवाकर शासन की मदद से घर में आई खुशियां

रतलाम। शादी के बाद आमतौर पर दो या तीन साल में हर दंपति के यहां संतान हो जाती है, लेकिन कुछ परिवार ऐसे जिनके यहां कोई संतान नहीं होती है। ऐसे परिवारों के लिए शासन ने स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से रोशनी क्लिनिक की व्यवस्था शुरू की है। इससे नि:संतान दंपतियों को काफी फायदा पहुंचा है। पिछले एक साल के दौरान ऐसे कई दंपति हैं जिनके यहां इस योजना में इलाज के बाद घर आंगन में खुशियों की बहार आ गई है। हाल ही में एक ऐसे परिवार में खुशियां आई हैं जिनकी शादी को १७ साल हो चुके थे। इसके बाद भी उनके यहां कोई संतान नहीं थी। अब नन्ही परी उनके यहां आई है। सीएमएचओ कार्यालय के एमईआईओ आशीष चौरसिया के अनुसार अब तक ५६ महिलाओं को इस योजना के तहत इलाज का पैकेज स्वीकृत किया गया है।

१७ साल बाद गोद में गूंजी किलकारी

पल्दूना निवासी बाबूलाल का विवाह २००० में राधाबाई के साथ हुआ था। शादी की खुशियां तीन-चार साल तक छाई रही लेकिन जब कोई संतान नहीं हुई तो परिवारजनों के साथ खुद को भी अहसास होने लगा। बाबूलाल बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत में तो कोई चिंता नहीं की लेकिन बाद में लगा कि उनसे बाद में जिसकी शादी हुई उसके यहां बच्चे हैं। फिर पत्नी की सहमति से २०११ में उदयपुर का इलाज शुरू किया। लंबा इलाज चलने के बाद जिले में रोशनी क्लिनिक के बारे में जानकारी लगी। यहां डॉक्टरों को दिखाया तो प्रकरण तैयार किया गया। दूसरे पैकेज के लिए चयन हुआ और इलाज के दौरान पत्नी को गर्भधारण हुआ। अब ४ दिसंबर को पत्नी राधाबाई ने सीजर के जरिये घर की लक्ष्मी को जन्म दिया। उनके यहां कन्या का जन्म हुआ जो १७ साल से रुकी हुई खुशियां लेकर आई है। बाबूलाल बताते हैं कि पहले पैकेज के लिए भी यहां राशि स्वीकृत हो गई थी किंतु उसका इलाज वे स्वयं पहले ही करवा चुके थे इसलिए इस पैकेज की राशि वापस सरकारी खजाने में जमा करवा दी गई। दूसरे पैकेज के लिए मिली राशि से इलाज करवाया।

 

इनके यहां १२ साल बाद आई थी खुशियां

रोशनी क्लिनिक की योजना के अंतर्गत ही कई अन्य परिवार भी लाभान्वित हुए हैं। कई अन्य परिवारों में अभी महिलाएं योजना के तहत इलाज ले रही है तो कुछ महिलाएं गर्भवती हैं। ऐसा ही एक अन्य परिवार है पंचेड़ निवासी सोनूकुंवर पति चंदरसिंह के यहां भी शादी के १२ साल बाद खुुशियां झोली में आई। सोनूकुंवर को करीब चार माह पहले जिला अस्पताल में ही सामान्य प्रसव के जरिये कन्या का जन्म हुआ। आज मां और बेटी दोनों स्वस्थ हैं। उनका प्रकरण जिला अस्पताल के रोशनी क्लिनिक के माध्यम से बीपीएल होने की वजह से तैयार करके ग्रेटर कैलाश हास्पिटल इंदौर के लिए भेजा गया था। एक अन्य प्रकरण है आलोट निवासी किरण पति निर्मल का। इन्हें भी पिछले महीने ही सीजर के माध्यम से प्रसव हुआ है। रोशनी क्लिनिक में इनका इलाज हुआ और जांच के बाद इनका प्रकरण भी तैयार करके ग्रेटर कैलाश हास्पिटल के लिए भेजा गया था। यहां डॉ. हिना अग्रवाल ने इनका इलाज किया और पिछले महीने सीजर के माध्यम से लड़की को जन्म दिया।

यह है योजना

योजना के तहत दंपति की आयु २१ से ४५ वर्ष के बीच होना चाहिए। साथ ही विवाह के तीन साल बाद तक कोई संतान नहीं होना पात्रता की श्रेणी में आता है। ऐसे परिवारों का बीपीएल में होना अनिवार्य है। एमईआईओ चौरसिया के अनुसार अब तक ५६ महिलाओं के लिए योजना के तहत पैकेज स्वीकृत किया जा चुका है। इनमें से कई का इलाज चल रहा है।

दो पैकेज मिलते हैं दंपति को

बांझपन की शिकार दंपति को दो पैकेज इस योजना के तहत दिए जाते हैं। पहला पैकेज ५५ हजार का होता है। इसमें ५० हजार का इलाज और पांच हजार रुपए दंपति के आने-जाने और रहने खाने का खर्च होता है। दूसरा पैकेज ६० हजार का होता है जिसमेंसे ५६ हजार का इलाज और शेष राशि से दंपति को आने-जाने और रहने, खाने-पीने की राशि होती है।

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