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Acharya Kulbodi Surishwar Maharaj- प्रभु से मांगना हो तो गति से पहले दिशा मांगों

locationरतलामPublished: Nov 24, 2023 10:43:57 pm

Submitted by:

Gourishankar Jodha

रतलाम। विज्ञान ने हमें गति तो दे दी, लेकिन दिशा नहीं दी, यदि हम गलत जाएंगे तो मंजिल नहीं मिलेगी। जीवन में पहले दिशा होना चाहिए और फिर गति। इसलिए यदि प्रभु से कुछ मांगना हो, तो दिशा को मांगों, क्योकि यदि सही दिशा मिल गई तो गति भी मिल जाएगी।

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यह विचार 'यात्रा गति से दिशा की ओरÓ विषय पर हुए प्रवचन में आचार्यश्री विजय कुलबोधि सूरीश्वर महाराज ने व्यक्त किए। शुक्रवार सुबह तेजा नगर में आयोजित विशेष प्रवचन में आचार्यश्री ने चार गति और चार दिशा की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पैसा, प्रशंसा, प्रसिद्धि और पुरस्कार को गति तो प्रेम, प्रसन्नता, परमार्थ और पवित्रता को दिशा बताया।
सत्कार्य करते रहना चाहिए


आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में पैसे के साथ प्रेम भी होना चाहिए, लेकिन वर्तमान दौर में पैसा बढ़ने के साथ जीवन में प्रेम घट रहा है, जो सोचने की बात है। पैसा गति है तो प्रेम दिशा है। सत्कार्य करते रहना चाहिए और यह करने के बाद जब किसी को बोलने का मन हो, तब समझ लेना कि आपको सत्कार्य में नहीं प्रशंसा में रस है। हमारे जीवन में सदैव पवित्रता होना चाहिए, पुरस्कार की चाह नहीं। प्रभु ने जो जीवन दिया है, उसमें परमार्थ करना चाहिए। इससे जीवन सार्थक हो जाएगा।
आज भी होंगे विशेष प्रवचन


25 नवंबर को आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वर महाराज के तेजा नगर में 'यात्रा शुद्धि से सिद्धि की ओरÓ विषय पर प्रवचन होंगे। प्रवचन का समय सुबह 9 से 10.15 बजे तक रहेगा ।

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