कोर्ट का आदेश मिलते ही मशीने लेकर निकल पड़े प्रशासन के अफसर

harinath dwivedi

Publish: Mar, 14 2018 01:15:42 PM (IST)

Ratlam, Madhya Pradesh, India
कोर्ट का आदेश मिलते ही मशीने लेकर निकल पड़े प्रशासन के अफसर

- रतलाम के बाजना बस स्टैंड पर अतिक्रमण कार्रवाई शुरू, जिला कोर्ट ने रहवासियों के वाद पर स्टे देने से किया इनकार

रतलाम। शहर के बाजना बस स्टैंड सिटी फोरलेन पर बुधवार को प्रशासन के दल ने अवैध कब्जे हटाने की शुरूआत कर दी। कोर्ट के आदेश के बाद अमला मौके पर पहुंच गया है। जिला न्यायालय ने बाजना बस स्टैंड से वरोठ माता मंदिर तक 104 फीट के सिटी फोरलेन पर स्टे देने से इंकार कर दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मृत्युंजय सिंह ने 14 रहवासियों के तीन अलग-अलग वाद पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए स्टे का आवेदन खारिज कर दिया था। इनमें सिटी फोरलेन के लिए निजी भूमि पर निर्माण तोडऩे के प्रशासनिक नोटिस को चुनोती दी गई थी। कोर्ट के फैसले से राजनीतिक वर्चस्व का सवाल बने सिटी फोरलेन के एक पक्ष को भी झटका लगा है।

सहायक अभियोजन अधिकारी सुशील कुमार जैन ने बताया कि कलीमी कॉलोनी निवासी फेहमिदा पति निसार खामोशी, मूर्तजा, भरतकुमार चौहान, देवेंद्र चौहान, विजय सुराना, सज्जनलाल सुराना, शांता बाई, हातिम अली, केजार हुसैन, जाहिद हुसैन, हातिम अली, अखा पति हातिम, हाजी फकरूद्दीन ने बाजना बस स्टैंड पर फोरलेन निर्माण के दौरान सड़क १०४ फीट की बनाने के विरोध में स्टे के लिए डीजे कोर्ट में आवेदन १० मार्च को पेश किया था। इस पर मंगलवार को डीजे मृत्युजंय सिंह ने सुनवाई की। इस दौरान आवेदन के दौरान वादी ने पक्ष रखा कि उनके भवन का निर्माण विधिवत, उनके स्वत्व अधिपत्य की भूमि पर किया गया है। नगर सुधार न्यास द्वारा विकसित द्वारकापुरी कॉलोनी बिबड़ौद रोड पर मकान बना है। रतलाम सिटी फोरलेन की तर्ज पर बाजना बस स्टैंड से बिबड़ौद की और सिटी फोरलेन १०४ फीट चौड़ा बनाना तय किया है, लेकिन मौके पर उतनी शासकीय भूमि उपलब्ध नहीं है। प्रतिवादी कर्मचारियों ने मौखिक रूप से ही सूचित किया है कि वे अपने भवन के आगे बने निर्माण को हटा दे। उक्त निर्देशों के अनुसार उन्होंने भवन के आगे का निर्माण हटा लिया है। वादी का मकान उनके स्वत्व की भूमि के अंदर है। उनके भवन की लंबाई की भूमि में प्रतिवादी को निर्माण करने सड़क, नाली बनाने, विद्युत पोल गाडऩे का अधिकार बिना भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। जिसकी लिखित में कोई सूचना नहीं दी गई। उन्हें ६-७ फीट भवन तोडऩे के लिए मौखिक रूप से कहा गया है। मकान तोडऩे से उनके स्वत्व का अधिकार प्रभावित होगा और मकान भी क्षतिग्रस्त हो जाएगा। शासकीय अधिवक्ता केपी सक्सेना ने पक्ष रखते हुए आवेदन का विराध करते हुए तर्क दिया कि वादी ने इस संबंध में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं। जिस लीज डीड से संपत्ति प्राप्त हुई है, उसे भी प्रस्तुत नहीं किया है। वादी ने जान-बूझकर नगर निगम द्वारा भवन निर्माण की जो अनुमति दी थी, उसे प्रस्तुत नहीं किया है। उसी कॉलोनी में निवासी हातिम अली को नगर निगम द्वारा १९ नवंबर २०१३ को जो निर्माण अनुमति दी गई थी, उसमे दर्शाया गया है कि रतलाम विकास योजना अनुसार बाजना बस स्टैंड से रेलवे ब्रिज तक सड़क चौड़ाई ३० मीटर होने से सड़क के मध्य १५ मीटर चौड़ाई होना आवश्यक है और सड़क की चौड़ाई के लिएभूमि छोडऩे के पश्चात उत्तर दिशा में तीन मीटर दक्षिण में और डेढ़ मीटर पूर्व में २.४० मीटर एक एक एमओएस निर्माण कार्य के दौरान रखना आवश्यक है। सड़क को ५२ फीट भूमि की आवश्यकता होती है। जबकि मौके पर १५ मीटर अर्थात ४९.२१ भूमि है और उत्तर में तीन मीटर अर्थात ९.८४ फीट, इस प्रकार ५९ मीट भूमि रखना आवश्यक है। रो निर्माण के लिए मात्र ५२ फीट भूमि की आवश्यकता है। शेष भूमि खुली रखना आवश्यक है, लेकिन वादी ने कोई भूमि खुली नहीं रखी है। संपूर्ण भाग पर निर्माण कर लिया है और उसके वाहन खड़े होते है। पूरी ६० फीट लंबाई पर निर्माण नहीं किया जा सकता है। यदि निर्माण के समय निर्धारित एमओ एस का वादी ध्यान रखते तो इस प्रकार का विवाद उत्पन्न नहीं होता।

सरकार की मंजूरी के बाद बन रहा सिटी फोरलेन
कोर्ट के समक्ष शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि सिटी फोरलेन निर्माण राज्य शासन की स्वीकृती के बाद किया जा रहा है और सड़क की चौड़ाई १०४ फीट प्रस्तावित है। यातायात सुगमता के लिए जनहित में किया जा रहा है। इस क्षेत्र के नागरिको ने स्वेच्छा से सड़क निर्माण के लिए जिन भवनों पर निशान लगाए थे। उन्होंने अपना अतिक्रमण हटा लिया है। सड़क निर्माण शासकीय नजूल भूमि पर किया जा रहा है। रजिस्ट्री हो जाने से नगर निगम की अनुज्ञा के विपरीत निर्माण का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता है। इस प्रकार वादी द्वारा अवैध निर्माण करने के कारण उनके पक्ष में प्रथम दृष्टया प्रकण सुवधिा का संतुल तथा अपूर्तनीय क्षति नहीं है। जिससे आवेदन को निरस्त किया जाए। शासन की और से विभिन्न दस्तावेज प्रस्तुत कर भविष्य को देखते हुए 104 फीट का फोरलेन बनाना आवश्यक बताया गया। इसके साथ क्षेत्र में लोगो द्वारा एमओएस का पालन नही कर नगर निगम की अनुमति के विपरीत निर्माण करने की बात कही गई। न्यायालय ने दोनों पक्षो को सुनने के बाद वादियों का आवेदन खारिज कर दिया। इससे शहर के विकास से जुड़ी योजना को गति मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

डीजे ने माना, सड़क की चौड़ाई यातायात सुगमता के लिए सही
डीजे मृत्युजंय सिंह ने सुनवाई के दौरान बताया कि शहर में इन दिनों सिटी फोरलेन के चलते सड़क चौड़ीकरण का कार्य हो रहा है। सड़क को १०४ फीट चौड़ा किया जा रहा है, जिससे सुगमता से वाहन निकल सके। प्रतिवादी शासन वहां पर अवैध रूप से किसी मकान में तोडफ़ोड़ नहीं कर रहें हैं। नगर निगम निर्माण अनुज्ञा के प्रति किए गए निर्माण को स्वत: हटाने के लिए कहा गया है। अत: सुविधा का संतुलन तथा क्षति भी वादी के पक्ष में नहीं है। कार्य लोकहित में किया जा रहा है। आवेदन का निरस्त किया जाता है।

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