अटल अनंत में विलीन, यादें आज भी ताजी

अटल अनंत में विलीन, यादें आज भी ताजी

Sachin Trivedi | Publish: Aug, 17 2018 01:13:01 PM (IST) Ratlam, Madhya Pradesh, India

अटल अनंत में विलीन, यादें आज भी ताजी

रतलाम: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुरुवार की शाम को दिल्ली के एम्स अस्पताल में आखिरी सांस ली। दिनभर उनकी सेहत मेें सुधार के लिए प्रार्थनाओं से लेकर अनुष्ठानों का दौर चला। शाम को जैसे ही उनके निधन की खबर फैली, मालवा सहित पूरा देश शोक में डूब गया। सरकार ने सात दिन का शोक घोषित कर दिया है। अटलजी, का मालवा के रतलाम, मंदसौर और नीमच जिले से गहरा लगाव रहा है। ठेठ खांटी कार्यकर्ता पूर्व सांसद स्व. लक्ष्मीनारायण पांडेय हों या पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी या फिर नीमच के खुमानसिंह हों, ये सभी अटल जी के नजदीक रहे हैं। मंदसौर के कई नेताओं से भी अटल जी का गहरा लगाव रहा है। उनके क्षेत्र से जुड़े कुछ चुनिंदा किस्से जो आज भी लोगों की जेहने में ताजा हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जनसंघ के समय से पूर्व सांसद स्व. डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय अटलजी के निकट रहे थे उन्हीं से जुड़ाव के कारण वाजपेयी मंदसौर आते रहे। 60 के दशक से उनका मंदसौर में आने का सिलसिला शुरू हुआ।
वर्ष 1964 के उपचुनाव के समय सीतामऊ विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार ठा. किशोरसिंह सिसौदिया के लिए ट्रैक्टर पर बैठकर प्रचार किया था। इसमें सिसौदिया चुनाव भी जीत गए थे। पूर्व विधायक राजेंद्रसिंह सिसौदिया भी वाजपेयी के करीबी रहे और मंदसौर के साथ प्रदेश में अनेक जगह सभा में वह वाजपेयी के साथ रहे है। यहां उन्होंने भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन भी किए थे। गरोठ में दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में भाग लेने जब वाजपेयी पहुंचे थे तब उस कार्यक्रम का संचालन कांतिचंद मिंडा कर रहे थे। उन्होंने वाजपेयी को संबोधन देते हुए कहा कि अब दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण कर-कमलों से करें तब वाजपेयी ने हथेलिया दिखाते हुए कहा था कि यहां कहां कर-कमल है। यहां तो खुरदरे हाथ है। ये शब्द आप संबोधन करते तो अच्छा होता।

 

वाजपेयी के मंदसौर दौरे से जुड़े यादें
-वर्ष 1970-71 में जनसंघ के समय जब ठा. किशोरसिंह सिसौदिया इसके अध्यक्ष थे तब वाजपेयी मंदसौर आए थे और जिला अस्पताल के सामने स्थित दशपूर कुंज उद्यान में दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण किया था। वर्ष 90 के दौर भाजपा के डॉ. एलएन पांडेय के लिए सभा की थी। 13 वीं लोकसभा चुनाव के दौर में एनडीए की और से वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद के लिए नाम तय कर दिया था। उस दौर में भी वाजपेयी मंदसौर आए थे और पूर्व विधायक ओमप्रकाश पूरोहित के घर पर उनकी प्रेसवार्ता हुई थी।

वर्ष 69 के दौर में जब धनसंग्रह का अभियान चलाया था।उस समय भी मंदसौर आए वाजपेयी को एकत्रित की गई राशि की थैली भेट की गई थी। उस समय 1 लाख से अधिक राशि एकत्रित की गई थी। धनसंग्रह समिति में किशोरसिंह सिसौदिया प्रमुख थे। उनके नेतृत्व में ही उन्हें यह थैली दी गई थी।

वर्ष 64 में जिले की सीतामऊ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में उम्मीदवार किशोरसिंह सिसौदिया के लिए प्रचार करने वाजपेयीजी आए थे। तब उन्हें नाहरगढ़ से टैक्टर पर बैठकर पूरे क्षेत्र में भ्रमण करते हुए सीतामऊ, नाटाराम, कयामपूर सहित अन्य जगह पहुंचकर प्रचार किया था। इस चुनाव में सिसौदिया 435 वोटों से जीते थे और कांग्रेस के भंवरलाल नाहटा हारे थे।

आपातकाल के बाद मंदसौर बस स्टैंड पर जब वाजपेयी सभा कर रहे थे। उस समय युवा संघ के जिले का काम वर्तमान जिलाध्यक्ष देवीलाल धाकड़ के हाथ में था। उस समय उन्होंने वाजपेयी की मौजूदगी में एक पेन नीलाम किया गया। जो 314 रुपए में नीलाम हुआ था।

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