चुनाव से पहले सरकार का खजाना खाली, राजस्व बढ़ाने कलेक्टर्स को फरमान

- रतलाम सहित मंदसौर और नीमच में राजस्व वसूली के ११ माह नहीं रहे खास

By: harinath dwivedi

Published: 13 Mar 2018, 12:53 PM IST

रतलाम। वित्त वर्ष की समाप्ति पर लेखा-जोखा तैयार करने में जुटी सरकार को बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष कम मिले राजस्व ने चिंता में डाल दिया है। प्रमुख सचिव ने प्रदेशभर के जिलों को वसूली में पिछडऩे पर कड़ा पत्र जारी किया है। ११ माह के दौरान उज्जैन सहित अन्य संभागों में तय लक्ष्य से कम वसूली हुई है, इनमें रतलाम भी शामिल है।

प्रदेश के प्रमुख सचिव अरूण पांडेय ने सभी संभागीय मुख्यालयों को अपने अपने जिलों में राजस्व वसूली तेज करने के लिए पत्र जारी किया है। पांडेय ने बताया कि जिलेवार राजस्व वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन ११ माह बीत जाने के बाद भी तय लक्ष्य तक नहीं पहुंचा जा सका है। इस वर्ष वसूली ११४४.०० करोड़ की अपेक्षा ३९७.३५ करोड़ ही दर्ज हो पाई है। फरवरी माह तक कम वसूली के कारण प्रदेश में राजस्व विभाग का लक्ष्य ११ के दौरान औसत ३४.७३ फीसदी तक ही पहुंच पाया है।

मार्च वसूली लक्ष्य का आखिरी माह
प्रमुख सचिव पांडेय ने पत्र में बताया कि मार्च माह वसूली का आखिरी माह है और इस अवधि में हर जिलों को लक्ष्य के अनुसार राशि एकत्रित करना है। कई जिलों में तो वसूली फरवरी माह की समाप्ति तक २५ फीसदी के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाई है। हालांकि इनमें उज्जैन संभाग का कोई जिला शामिल नहीं है, लेकिन वसूली यहां भी कम हुई है।

संभागीय मुख्यालय सहित जिले पिछड़े
राजस्व के प्रमुख सचिव ने जारी पत्र में उज्जैन संभागीय मुख्यालय पर फरवरी माह तक राजस्व वसूली ३१.२५, रतलाम में ३३.८५, मंदसौर में ४८.३६ और नीमच में ४०.९१ प्रतिशत पाई है। हालांकि इसमें मार्च के शुरूआती पखवाड़े के आंकड़े शामिल नहीं है।

सभी जिलों में विशेष वसूली अभियान
मार्च माह की समाप्ति और नए वित्तिय वर्ष की शुरूआत को देखते हुए प्रमुख सचिव ने सभी जिलों को माह के दौरान विशेष अभियान चलाने के भी निर्देश दिए है। इसके तहत हर राजस्व अनुविभाग में एसडीएम को अपने अपने स्तर पर लक्ष्य को पूर्ण कराना है।

चल रहा कार्य
जिले में राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य अनुसार कार्य जारी है, सभी अनुविभागीय अधिकारियों को इस संबंध में पहले ही निर्देशित किया गया है।
- सोमेश मिश्रा, प्रभारी कलेक्टर रतलाम

harinath dwivedi Editorial Incharge
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