scriptBig decision: These societies imposed restrictions in Madhya Pradesh | बड़ा फैसला: मध्यप्रदेश में इन समाजों ने लगाया प्रतिबंध | Patrika News

बड़ा फैसला: मध्यप्रदेश में इन समाजों ने लगाया प्रतिबंध

- उज्जैन संभाग के कई समाजों ने एकजुटता से लिया बड़ा निर्णय

रतलाम

Published: March 27, 2022 06:32:08 pm

सचिन त्रिवेदी, रतलाम.
पग-पग रोटी, डग-डग नीर की कहावत वाले मध्यप्रदेश के मालवांचल में कई समाजों ने नशे के साथ ही सामाजिक बुराईयों के खिलाफ कड़े व बड़ा संदेश देते कदम उठाए हैं। शराब के खिलाफ एकजुटता दिखाई है तो मृत्युभोज और दहेज लेने व मांगने की कुप्रथा त्यागने भी आगे आ रहे हैं। अहम ये है कि ज्यादातर समाजों के इन फैसलों को युवाओं ने भी अपनी पूर्ण सहमति देकर नई राह बना दी है। कई जिलों में यूथ विंग खुद समाज के इन कदमों को सोशल मीडिया सहित आपसी संपर्क के माध्यम से प्रचारित करने में भी जुटी है।

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मृत्युभोज से लेकर दहेज पर समाजों का फैसला
मालवांचल के उज्जैन जिले में चिराड़ समाज ने मृत्युभोज को पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया है। समाज में उज्जैन पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां समाज ने खुद आगे आकर तेरहवीं के भोज को बंद कर दिया है। इसी तरह मालवांचल के अन्य अहम जिले भी समाज स्तर पर बुराईंयों व कुप्रथाओं को बंद करने आगे आए हैं। रतलाम में राठौर तेली समाज ने मृत्युभोज के साथ ही नशे को त्यागने का कदम बढ़ाया है। मौड़ ब्राह्मण समाज दहेज पर बात करना भी उचित नहीं समझता। इस समाज ने विवाह रिश्तों के दौरान भी शिक्षा के प्रति सकारात्मक पहल की है। मंदसौर जिले में चंद्रवंशी क्षत्रिय खाती समाज मोसर जैसी कुप्रथा को बंद कर जागरूकता के प्रयासों में जुटा है। नीमच जिले में भी कुछ समाज मामेरा और विवाह में फिजूलखर्ची के खिलाफ समाज को एकजुट कर रहे है। विशेष तौर पर ऐसे फैसलों में युवाओं की सहमति और भागीदारी को बढ़ाया जा रहा है।

युवाओं ने ही शुरू किया शराबंदी अभिया
राठौर तेली समाज रतलाम के अध्यक्ष बद्रीलाल देवड़ा बताते हैं कि हमारे समाज में मृत्युभोज एवं नशे पर रोक लगाने का कार्य हुआ है। दहेज के खिलाफ भी जागृति आई है। सबसे अच्छी बात ये है कि शराब के खिलाफ समाज के युवाओं ने बेहतर कार्य किया है, वे इस सामाजिक बुराई के खिलाफ लामबंद होकर समाज में जागरूकता ला रहे हैं।
80 प्रतिशत परिवार दहेज-मृत्युभोज से दूर
मोड़ चतुर्वेदी ब्राह्मण समाज रतलाम के अध्यक्ष विजय शर्मा ने बताया कि समाज में मृत्युभोज को बंद करने के साथ ही दहेज के खिलाफ भी सामाजिक चेतना बढ़ी है। समाज के करीब 80 प्रतिशत परिवारों में मृत्युभोज पूर्णत:बंद कर दिया गया है। समाज दहेज कुप्रथा पर बात करने के बजाय शिक्षित युवक-युवती के विवाह रिश्तों को बल दे रहा है।
महंगी कुप्रथाओं को खत्म करने आव्हान
मंदसौर के गरोठ क्षेत्र में चंद्रवंशी क्षत्रिय खाती समाज मोसर और मामेरा जैसी खर्च वाली कुप्रथाओं को बंद करने के प्रयासों में जुटा है। समाज के अध्यक्ष रामदयाल मालवीय ने बताया कि समाज में कई गरीब परिवार महंगी कुप्रथाओं के कारण कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं, हम ऐसी कुप्रथाओं को खत्म करने के लिए समाज से आव्हान कर रहे हैं।
समाज में उज्जैन पहला जिला है जहां मृत्युभोज बंद
श्री चिड़ार समाज पारमार्थिक ट्रस्ट अध्यक्ष नितीन गेहलोत ने बताया, समाज अध्यक्ष सुनील मगरिया के नेतृत्व में दो वर्ष पूर्व समस्त समाजजनों की सहमति से उज्जैन में मृत्यु भोज बंद किया था। समाज में किसी की मृत्यु के पश्चात शास्त्रोक्त पद्धति से पूजन पाठ, दान पुण्य एवं परिवारजनों, बहन-बेटियों के बीच ही क्रियाकर्म संपन्न कराए जा रहे हैं।

सकारात्मक माहौल से होंगे मजबूत
समाज सबसे महत्वपूर्ण है, अगर सामाजिक तौर पर कोई निर्णय होता है तो वह काफी बड़े क्षेत्र को अपने से जोड़ता है। इसका प्रभाव अन्य समाजों पर भी होता है। जिस तरह सामाजिक स्तर पर नशा सहित कुप्रथाओं को लेकर जागरूकता आ रही है, ये एक अच्छे समाज के निर्माण के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार कर रहे हैं। निश्चित ही इन निर्णयों का दूरगामी असर होगा। अपराध कम होंगे और समाज में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। आगे आने वाले सभी समाजों में यह निर्णय एकजुट होने का कार्य भी करेंगे।
- डॉ. वैभव मिश्रा, सेवानिवृत्त प्रोफेसर सामाजिक विज्ञान

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