न बेटा था न बेटी, पति भी नहीं रहा, हो गया लकवा, फिर सुनीता ने जो किया, आप भी देंगे शाबासी

न बेटा था न बेटी, पति भी नहीं रहा, हो गया लकवा, फिर सुनीता ने जो किया, आप भी देंगे शाबासी

By: Ashish Pathak

Updated: 10 Mar 2019, 12:56 PM IST

रतलाम (सुखेडा)। कलयुग के इस दौर में कई सगे रिश्ते तार-तार हो जाते है, पर कई रिश्ते ऐसे बन जाते जो समाज के लिए यादगार हो जाते। ऐसा ही एक नजारा मध्यप्रदेश के मालवा में देखने को मिला है। मालवा के रतलाम जिले में एक महिला के पति की मौत के बाद लकवा हो गया। लकवा के दौरान न बेटा था न बेटी। एेसे में पड़ोस की रहने वाली एक बेटी सुनीता ने जो किया, आप भी उस बेटी को शाबासी देने से खुद को नहीं रोक पाएंगे। मामला रतलाम जिले के सुखेड़ा का है।

किरपुरा आंगनवाड़ी केन्द्र क्रमांक 4 की कार्यकर्ता सुनीता प्रजापत का रिश्ता अपनी महिला अधिकारी चन्द्रप्रभा खेरात से ऐसा जुड़ा की खेरात की सेवा के साथ साथ अंतिम समय में मां का दर्जा देकर बेटे का फर्ज निभाया। सुनीता की इस सेवा को देखकर 8 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर संगीता नारी जाग्रति मंच व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सम्मान भी किया था, लेकिन क्या पता था कि इसके एक दिन बाद शनिवार को सुबह 4 बजे चन्द्रप्रभा खैरात का निधन हो जाएगा। शनिवार को सुबह 11 बजे उनकी शवयात्रा सुनीता प्रजापत के घर से निकाली गई। जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने कंधा दिया। खेरात की मुखाग्रि का कार्य भी सुनीता प्रजापत ने बेटा बनकर पूरा किया। खेरात का क्रियाक्रम भी सुनीत प्रजापत हिन्दू रिवाज से करेगी।

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मां की तरह किया पालन पोषण
ज्ञात रहे पिपलौदा विकास खण्ड के अन्तर्गत महिला बाल विकास विभाग की सुखेडा सेक्टर सुपरवाइजऱ चन्द्रप्रभा वर्ष 1997-98 में सुखेड़ा आंगनवाड़ी केन्द्र के सुपरविजन के लिए आया जाया करती थी। इसी दौरान खेरात के मार्गदर्शक में सुनीता आंगनवाड़ी केन्द्र क्रमांक ४ पर पदेन हुई थी। जब-जब सुपरवाइजर खेरात सुखेड़ा आती थी तब सुनीता प्रजापत से बगैर मिले नहीं जाती थी। ब्राह्मण समाज की अधिकारी चन्द्रप्रभा पिपलोदा में ही किराए का मकान लेकर पति गिरीश खेरात के साथ रहा करती थी, लेकिन इनके कोई संतान नहीं थी।

 

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बेटी ही बना लिया था
पति के निधन के बाद खेरात ने सुनीत को बेटी का दर्जा देते हुए बेटी बना लिया था। वर्ष 2009 में खेरात को अचानक लकवा हो जाने से सुनीता प्रजापत ने भादवामाता ले जाकर सेवा की। ठीक होने पर खेरात ने अपना विभागीय का काम संभालते हुए वर्ष 2011 में सेवानिवृत्ति हो गई। वृद्धावस्था के कारण मकान मालिक ने उन्हे मकान खाली करने को कह दिया, ऐसी स्थिति में सुनीता चन्द्रप्रभा खेरात को अपने गृह निवास किरपुरा सुखेड़ा ले आई और मां की तरह पालन पोषण कर रही थी।

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Ashish Pathak Reporting
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