Election 2018 : आलोट में चेंजमेकर के साथ ताल ठोक रहे हैं भाजपा और कांग्रेस के दावेदार

Election 2018 : आलोट में चेंजमेकर के साथ ताल ठोक रहे हैं भाजपा और कांग्रेस के दावेदार

By: harinath dwivedi

Updated: 12 Oct 2018, 09:10 PM IST

रतलाम। पत्रिका के चेंजमेकर अभियान के अंतर्गत आलोट विधानसभा मेें चेंजमेकर मुर्तुजा इज्जी और कालूराम परमार काफी सक्रिय है तो दावेदार के रूप में ताल ठोंक रहे कांग्रेस नेता मनोज चावला भी पत्रिका के चेंजमेकर की भूमिका में आलोट के विकास को लेकर अपनी बात रख रहे हैं। भाजपा से जहां दो बड़े नेताओं के पुत्र दावेदारी कर रहे हैं वहीं कांग्रेस से पूर्व सांसद व पूर्व विधायक प्रेमचंद गुड्डू के साथ ही उनके पुत्र अजीत बौरासी भी मैदान में उतने को तैयार है।

ये हैं पत्रिका के चेंजमेकर

मुर्तुजा इज्जी

पत्रिका चेंजमेकर मुर्तुजा इज्जी के अनुसार आलोट के सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा चुकी है। यहां न डॉक्टर समय पर मिलते हैं और न ही मरीजों को इलाज मिल पा रहा है। छोटी-छोटी बीमारी के लिए भी उज्जैन या रतलाम जाना पड़ रहा है। यह हर मरीज और परिजन के लिए बहुत विकट स्थिति है कि उन्हें यहां इलाज नहीं मिल रहा है। इतनी बड़ी तहसील और विधानसभा क्षेत्र मुख्यालय होने के बाद भी यहां बदतर हालत में स्वास्थ्य व्यवस्था है। आलोट विधानसभा की ९० पंचायतों की आबादी के हिसाब से जितने डॉक्टर यहां के अस्पताल में होना चाहिेए उसका १० फीसदी भी नहीं है। दूसरा क्षेत्र में बेरोजगारी और पानी की सबसे बड़ी समस्या है। अब तक बेरोजगारी और पानी की समस्या के निदान के लिए कुछ नहीं किया जा सका है।

 

ये हैं भाजपा की तरफ से दावेदार
जितेंद्र गेहलोत

वर्तमान विधायक जितेंद्र गेहलोत का दावा है कि वे ही इस विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं। अभी तो वे ही नए विधायक के चुने जाने तक विधायक है और वे निश्चित रूप से चुनाव लडऩे जा रहे हैं। उनका मानना है कि उन्होंन इस क्षेत्र के लिए बहुत काम किया है और आगे भी सभी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता से पूरा करेंगे। सबसे बड़ा लक्ष्य नवोदय विद्यालय की स्थापना और रेलवे पुल का निर्माण था। नवोदय विद्यालय खुल गया है और रेलवे ब्रिज का काम चल रहा है। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। आगे भी इसी तरह प्रयास करना उनकी प्राथमिकता होगी।

मनोज ऊंटवाल

सांसद मनोहर ऊंटवाल के पुत्र मनोज ऊंटवाल का नाम तेजी से इस सीट से दावेदार के रूप में सामने आया है। सांसद मनोहर ऊंटवाल इस सीट से प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और वे अपने पुत्र के लिए भी दावा कर चुके हैं। ऐसे में मनोज ऊंटवाल का कहना है कि पिता ने इस क्षेत्र में जो विकास की नींव रखी थी उसे और आगे बढ़ाएंगे। दावेदारी अपनी जगह है किंतु टिकट तो अंतिम रूप से पार्टी ही तय करेगी। उनका मानना है कि कोई भी जनप्रतिनिधि चुनाव जीतता है तो उसे निश्चित रूप से अपने क्षेत्र की उन समस्याओं को सबसे पहले हल करना चाहिए जो आम जनता से जुड़ी हो।

 

ये हैं कांग्रेस के दावेदार

प्रेमचंद गुड्डू

कांग्रेस के टिकट पर वर्ष २००३ में विधानसभा चुनाव जीत चुके और सांसद रहे प्रेमचंद गुड्डू एक बार फिर से यहां से टिकट के लिए ताल ठोक रहे हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में रोजगार की समस्या विकराल है और इसे हल करना ही सबसे पहली प्राथमिकता है। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) के बंद पड़े कार्यों को फिर से चालू करवाना, व्यक्तिगत और सार्वजनिक तालाबों, स्टापडेमों का निर्माण, फलोद्यान लगवाना योजना में शामिल है। इससे न केवल क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा वरन जलस्तर भी बढ़ेगा। ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई की समस्या का भी तालाबों और स्टॉपडेमों के निर्माण से पेयजल समस्या का निदान हो सकेगा।

 

 

मनोज चावला

कांग्रेस से स्थानीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोक रहे पत्रिका के चेंजमेकर मनोज चावला का मानना है कि आलोट क्षेत्र में बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवाओं की लचर स्थिति सबसे बड़ी समस्या है। स्थानीय जनप्रतिनिधि नहीं होने से इन महत्वपूर्ण समस्याओं की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता है। जनप्रतिनिधि महीनों में कभी-कभार आलोट आते हैं जिससे वे जनता से दूरी बनाए रखते हैं। उनकी राजनीति केवल कार्यकर्ताओं के भरोसे ही चलती है। जनता किसके पास अपनी समस्या लेकर जाए। न उद्योग धंधे है और न ही ढंग की स्वास्थ्य सेवाएं। आलोट के इतने बड़े अस्पताल में गिनती के डॉक्टर है। वे भी मनमर्जी से मरीजों का इलाज करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में गर्मी में पेयजल की गंभीर स्थिति बनती है किंतु आज तक जितने भी जनप्रतिनिधि हुए हैं उन्होंने इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं किया है। उनकी प्राथमिकता इन्हें हल करने की है।

अजीत बौरासी

प्रेमचंद गुड्डू के पुत्र और युवक कांग्रेस में सक्रियता दिखाने वाले अजीत बौरासी भी इस बार मैदान में ताल ठोकने को तैयार है। पीसीसी सदस्य गुड्डू या तो खुद को या फिर बेटे को टिकट दिलाने के लिए लगे हुए हैं। बौरासी का मानना है कि उनकी प्राथमिकता में वे सभी काम है जो क्षेत्र की जनता उनसे अपेक्षा रखती है। चाहे पेयजल, सिंचाई का पानी हो या फिर क्षेत्र में बड़े रोजगार के अवसर पैदा करने की बात हो। शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में क्षेत्र काफी पिछड़़ा है जिसे समुचित रूप से सुधाकर आग लाने को वे प्राथमिकता देंगे।

harinath dwivedi Editorial Incharge
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