3 महने बाद मिली बेटी तो छलक पड़े परिवार के आंसू, भाई और पिता ने किया संस्था का धन्यवाद

तीन महीने बाद परिवार से मिली इमरोज तो परिजनों के छलके आंसू, सूचना मिलने पर जबलपुर से रतलाम लेने पहुंचे परिवार के लोग। बिना बताए घर से चली गई थी।

By: Faiz

Published: 14 Oct 2021, 08:44 PM IST

रतलाम. अगस्त माह में जबलपुर से एक बेटी बगैर कुछ घर के सदस्यों को बताए निकल गई थी। यहां वहां भटकने के बाद जब रेलवे स्टेशन पर सहमी सी बैठी हुई एक मैजिक चालक को नजर आई तो उसने सूचना सामाजिक कार्यकर्ताओं को दी। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने काउंसलिंग की और परिजन को जबलपुर में सूचना दी। परिजन आए और अपनी बेटी को लेकर चले गए। बिछड़े परिजन से जब जबलपुर की इमरोज मिली तो परिजन के आंसू छलक गए।

सोमवार शाम सात बजे करीब मैजिक चालक आजम कुरैशी ने सामाजिक कार्यकर्ता आशीषसिंह देवड़ा को सूचना दी, कि एक महिला डरी सहमी और भूखी प्यासी बैठी है। भोजन तो मैजिक चालक ने दे दिया, लेकिन करीब दो दिनों से कभी रेलवे स्टेशन तो कभी महू रोड बस स्टैंड पर बैठी हुई नजर आती है। उसके पास एक थैली है, जिसमे कुछ कपड़े एवं दस्तावेज हैं। देवड़ा को जब सूचना मिली तो उन्होंने अपने सामाजिक कार्यकर्ता मित्रों को इस संबंध में बताया।


तीन दिन तक चली कांउसलिंग

सूचना मिलने सामाजिक कार्यकर्ता सतीश टांक, दिव्या श्रीवास्तव, शुभम सिखवाल, काजल टांक पहुंचे। कांउंसलिंग करने पर अपना नाम इमरोज उम्र 45 वर्ष बताया माता पिता जबलपुर में रहते हैं। उनके पिता के फोन नंबर लेकर संपर्क कर पूरी घटना की जानकारी दी। इमरोज के पिता ने बताया कि, ये मेरी बेटी है जो कि 30 अगस्त से घर से बगैर बताए निकली थी और गुमशुदगी की सूचना आगरताल थाना जबलपुर में दर्ज है। उन्होंने थाने पहुंचकर संस्था सदस्यों से बात करवाई और रतलाम आने का भरोसा दिया।

 

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बेटी को लेने आए महानवमी को

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गुुरुवार को जब इमरोज के पिता शमी उल्लाह और भाई वकील एहमद जबलपुर राजकोट एक्सप्रेस ट्रेन से रतलाम पहुंचे। उन्हें वन स्टॉप सेंटर ले जाकर आवश्यक खानापूर्ति कर पिता शमी और भाई वकील के सुपुर्द किया। पिता और भाई को देख इमरोज भावुक हो गई तो परिजन के भी आंसू छलक गए।


शादी के बाद पति ने घर से निकाला

पिता और भाई ने संस्था के कार्यकर्ताओं को बताया कि, बेटी का विवाह जौनपुर उत्तर प्रदेश के पास अकरम से साल 2000 में किया था। पति द्वारा आए दिन मारपीट की जाती थी। करीब चार साल पहले दूसरा विवाह कर लिया। इमरोज के गहने आदि लेकर घर से निकाल दिया। जिसका तलाक भी नहीं हुआ। तभी से उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ी हुई है। जबलपुर में उसका उपचार भी चल रहा है। उसे हिंदी और उर्दू भाषा का ज्ञान है। पति द्वारा भगाए जाने के बाद से वो पिता के साथ ही रहती है।

 

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परिवार ने जताया धन्यवाद

दिमागी स्थिति ठीक न रहने के कारण वो आए दिन घर से निकल जाती हैं। बस एक ही बात करती है, कि मुझे अकरम के पास जाना है। अकरम से जब बात की, तो उन्होंने सदस्यों को इमरोज को नहीं रखने की बात कही। इमरोज को समझाइश देकर रेलवे स्टेशन तक परिजन को पहुंचाया एवं सकुशल यात्रा पूर्ण कर फोन पर सूचित करने को कहा। शमी ने इस नेक कार्य को देख कर कहा कि, आपने हमारी बिटिया को मिलने के लिए जो प्रयास किया, ध्यान रखा। उसके लिए हम आपके सफल जीवन उद्देश्यों में कामयाबी की दुआ करते हैं। इस कार्य में सांई राज गु्रप के महेंद्र जारवाल, कुलदीप सिंह की भूमिका विशेष रुप से अग्रसर रही।

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