scriptdeath of mother and child is not stopping | इस शहर में नहीं थम रही जच्चा-बच्चा की मौत | Patrika News

इस शहर में नहीं थम रही जच्चा-बच्चा की मौत

- बच्चे के जन्म के दौरान कभी माता तो कभी बच्चे तोड़ रहे दम

 

रतलाम

Published: March 26, 2022 12:38:16 pm

रतलाम। जिले में गर्भवती माताओं और नवजात शिशुओं की मौत के मामले फिलहाल कम होते नजर नहीं आ रहे हैं। बच्चों के जन्म के दौरान उनकी मौत का आंकड़ा, माताओं की मौत से कई अधिक है। जच्चा और बच्चा की सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदम भी कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं।
इस शहर में नहीं थम रही जच्चा-बच्चा की मौत
इस शहर में नहीं थम रही जच्चा-बच्चा की मौत
गर्भवती माताओं के साथ नवजात शिशु के जन्म के दौरान उनकी बेहतर देख-रेख के लिए स्वास्थ्य विभाग का अमला कई तरह के कदम उठा रहा है लेकिन उनके प्रयास बहुत ज्यादा सफल होते दिख रहे हैं। यही कारण है कि जिले में मातृ मृत्यु दर के आंकड़ों में बड़ी कमी होती नजर नहीं आ रही है।
दो विभागों की जिम्मेदारी तय
बात करें अभी मध्य प्रदेश की तो इंदौर-उज्जैन संभाग में रतलाम माताओं की मौत के मामलों को लेकर बेहतर स्थिति में है जबकि नवजात शिशु की मौत के मामले में स्थिति चिंताजनक है। जच्चा-बच्चा की मौत के आंकड़ों को कम करने के लिए कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम द्वारा स्वास्थ्य विभाग सहित महिला एवं बाल विकास विभाग को इस काम में लगाया है।
प्रति लाख 163 का आंकड़ा
रतलाम जिले में गर्भवती माताओं की मौत का आंकड़ा बहुत ही चौंकाने वाला है। यहां पर प्रति एक लाख गर्भवती माताओं में से 163 की मौत हो जाती है। गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए वर्तमान में कलेक्टर द्वारा आदिवासी अंचल में विशेष रूप से स्वास्थ्य शिविर आयोजित कराए जा रहे हैं।
36 हजार पर 40 मौत
यदि आंकड़ों को सीधे तौर पर समझा जाए तो प्रति 36 हजार गर्भवती महिलाओं में से 40 महिलाएं हर साल किसी ना किसी कारण से दम तोड़ देती है। गर्भवती माताओं की मौत का यह आंकड़ा भी सर्वाधिक आदिवासी अंचल सैलाना और बाजना विकासखंड में ही है। इसी कारण से प्रशासन द्वारा यहां पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
बढ़ते आंकड़ों पर कोविड का बहाना
जिले में बीते वर्ष बड़े गर्भवती माताओं के मौत के आंकड़ों को लेकर स्वास्थ्य विभाग अपना अलग ही तर्क दे रहा है। जिम्मेदारों की माने तो गत वर्ष कोविड का समय होने से 10 महिलाओं की मौत हुई थी जोकि कोविड सस्पेक्टेड रही थी। इन महिलाओं की मौत को भी गत वर्ष के आंकड़े बनने का बड़ा कारण बताया जा रहा है।
इनका कहना है
प्रदेश में बेहतर है हम
- मातृ मृत्यु दर के मामले गत वर्ष थोड़े बड़े थे। कोविड के दौर में 10 सस्पेक्टेड गर्भवती महिलाओं की मौत हुई थी जिस कारण से आंकड़ा बढ़ गया था, फिलहाल प्रदेश में हमारी स्थिति बेहतर है।
अजहर अली, डीपीएम

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