scriptdispleasure makers of mud lamps due to not getting exemption in fee | दीपोत्सव से पहले माटी के दीपक बेचने वालों को कहीं राहत तो कहीं इंतजार | Patrika News

दीपोत्सव से पहले माटी के दीपक बेचने वालों को कहीं राहत तो कहीं इंतजार

मंदसौर, नीमच व शाजापुर में मानवीय दृष्टिकोण तो उज्जैन, रतलाम, देवास, आगर में बेफिक्री

रतलाम

Updated: October 29, 2021 08:04:02 pm

सचिन त्रिवेदी
उज्जैन. केन्द्र से लेकर राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने तमाम तरह के जतन कर रही है, लेकिन उज्जैन संभाग के कई जिलों में कोरोना की मार झेल रहे मेहनतकश हाथों को राहत नहीं मिल रही। दीपोत्सव पर घर-आंगन-प्रतिष्ठान को रोशन करने वाले माटी के दीपक और सजावटी उत्पाद संभाग के शाजापुर, मंदसौर और नीमच जिलों में बाजार शुल्क से मुक्त कर दिए गए हैं। मकसद, मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देना और मदद करना है, फिर भी कई जिलों के साहब आदेश जारी करने से पहले कायदों को खंगाल रहे हैं। जबकि संभाग ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई जिलों ने राहत का ऐलान कर दिया है तो उज्जैन, रतलाम, देवास व आगर-मालवा में इंतजार है।

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बड़े जिलों के साहब का नहीं 'बड़ा मन'
मिट्टी के शिल्पकार (कुम्हार) हर वर्ष दीपावली पर माटी के दीपकों का उजास फैलाते हैं। चक्का घुमाकर दीपक गढऩे वाले इन हाथों को इस वर्ष केन्द्र से लेकर राज्य सरकार से प्रोत्साहन मिल रहा है। आत्मनिर्भर भारत अभियान में मेहनतकशों की इस कला और त्योहारों पर चंद रुपए जुटाने की शक्ति को प्रेरित करने के लिए प्रदेश के कई जिलों में प्रशासन और नगरीय निकायों ने दीपक सहित माटी से बनी सजावटी सामग्री को बाजार शुल्क से मुक्त कर दिया है। इसका एक बड़ा कारण देशी उत्पाद को बढ़ावा देने के साथ कोरोनाकाल में आर्थिक तंगी झेल रहे कुम्हार एवं उनके परिवारों को संबल प्रदान करना भी है, ताकि त्योहारी सीजन में वे शुल्क के रुपए की राहत से अपने घर रोशन कर सकें, लेकिन इस सोच में अंतर नजर आ रहा है। उज्जैन संभाग में तो कुछ जिलों में राहत का आदेश जारी हो चुका है तो कई जिलों के साहब के हाथ मदद देने में भी कांप रहे हैं।

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आदेश निकालने में कांप रहे साहब के हाथ
संभाग के उज्जैन, रतलाम, देवास और आगर-मालवा जिलों में अब तक कुम्हार मानवीय दृष्टिकोण की राह देख रहे हैं। यहां न तो कलेक्टर और ना ही नगरीय निकाय स्तर से किसी तरह का आदेश जारी किया जा रहा है, जबकि कुम्हार समाज सहित सामाजिक संगठनों ने माटी के उत्पाद की बिक्री के दौरान शुल्क वसूली बंद करने की मांग की है। वहीं बता दें कि संभाग में सबसे पहले शाजापुर प्रशासन ने कुम्हार समाज को राहत का ऐलान करते हुए बकायदा आदेश भी जारी कर दिए हैं। वहीं, नगरीय निकाय के माध्यम से भी जिले में दीपोत्सव के दौरान माटी के दीपक बेचने वालों से किसी तरह का शुल्क नहीं लेने के निर्देश प्रसारित किए गए है, इसके बाद मंदसौर और नीमच में भी आदेश जारी हो गए है।

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दोगुनी वसूली हो रही, फिर भी राहत नहीं दी
संभाग के रतलाम में दीपक बेच रहे कुम्हार से पहले 10 रुपए लिए जाते थे, अब 20 रुपए की रसीद काटी जा रही है। देवास में यातायात पुलिस माटी के दीपक बेचने वालों को बार बार आकर हटा देती है तो निकाय अमला जुर्माना लगा देता है। उज्जैन में कलेक्टर 2 दिन से कायदों को खंगाल रहे हैं तो आगर कलेक्टर भी निर्णय नहीं कर पा रहे हैं।

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वर्जन

हमने त्योहारों के दौरान माटी के दीपक बेचने वालों से शुल्क नहीं लिए जाने संबंधी मांग पत्र के माध्यम से सीएम से भी की है तो कलेक्टर और निगमायुक्त को भी पत्र दिया है।
- मुकेश टटवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा अजा मोर्चा

संभाग में मिट्टी के दीपक बेचने वालों से स्थानीय शुल्क व्यवस्था को लेकर निर्णय भी स्थानीय प्रशासन की ओर से लिए गए हैं, इस संबंध में कलेक्टर्स से चर्चा की जाएगी।
- संदीप यादव, संभागायुक्त उज्जैन

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