#Indian_Railway - मंडल में रास्ते पता नहीं और गार्ड बन दौड़ा रहे मालगाड़ी

रेल चालक की कमी का हवाला देकर आराम के घंटे कम करने को लेकर चल रहा विवाद अभी सुलझा नहीं है कि मंडल मुख्यालय पर चार गार्ड को पर्याप्त प्रशिक्षण दिए बगैर ही परिचालक विभाग ने ट्रेन संचालक के लिए भेज दिया है। 

By: vikram ahirwar

Published: 13 May 2017, 09:32 AM IST



रतलाम।  रेल चालक की कमी का हवाला देकर आराम के घंटे कम करने को लेकर चल रहा विवाद अभी सुलझा नहीं है कि मंडल मुख्यालय पर चार गार्ड को पर्याप्त प्रशिक्षण दिए बगैर ही परिचालक विभाग ने ट्रेन संचालक के लिए भेज दिया है। इसमें बड़ी बात ये हैं कि मंडल से चलने वाली मालगाड़ी में रास्तों की जानकारी के लिए 42 दिन का प्रशिक्षण अनिवार्य होता है, जिस नियम का पालन भी नहीं किया गया है। इसके लिए रेलवे का कहना है कि उनके पास पर्याप्त कर्मचारियों का  अभाव है इसलिए ये काम किया गया है। 

ये है असल तरीका

असल में गार्ड बनने के लिए परीक्षा देने के बाद उदयपुर में प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद जहां मंडल में पदस्थापना हो वहां पर नियुक्ति मिलती है। नियुक्ति मिलने के बाद मालगाड़ी हो या यात्री ट्रेन के गार्ड उनका 42 दिन का अतिरिक्त प्रशिक्षण रास्तों की पहचान के लिए होता है। इस दौरान जहां-जहां ड्यूटी लगना हो, वहां-वहां एक गार्ड के साथ ट्रेन में भेजकर रास्ते में आने वाले मानवरहित गेट, मशीन वाले गेट, ब्रिज, टनल, पाइंट्स, कर्व आदि की जानकारी दी जाती है। 

ये होगा इससे

असल में जो गार्ड को बगैर 42 दिन के रास्तों के प्रशिक्षण के सीधे काम पर लगा दिया है, उनको भी इस काम में परेशानी आ रही है। रतलाम से गोधरा, रतलाम से चित्तौडग़ढ़, रतलाम से कोटा, रतलाम से बैरागढ़ व उज्जैन सेक्शन की जानकारी ही इनको नहीं है। एेसे में ये इन रास्तों पर आने वाले संकेत के लिए पूर्व के ड्यूटी कर चुके गार्ड की पुस्तिका को लेकर चल रहे हैं। प्रशिक्षण के अभाव में दुर्घटना आदि होने पर किस तरह से क्या कदम उठाना इसकी जानकारी फिलहाल इनको नहीं हैं। 

ये किया मंडल में

मंडल मुख्यालय में चार गार्ड को बगैर 40 दिन के प्रशिक्षण के सीधे ड्यूटी पर भेज दिया। इसके पीछे तर्क कर्मचारियों की कमी का दिया जा रहा है। हालांकि ये सही है, लेकिन ड्यूटी कर रहे इन गार्ड को न तो कर्व की जानकारी है न मानवरहित गेट आदि की। जबकि ड्यूटी के दौरान समय के साथ ट्रेन कहां-कहां से निकली इसकी जानकारी गार्ड को लिखना होती है। इसके अलावा प्रत्येक रेल फाटक के साथ स्टेशन पर लाल-हरी झंडी भी दिखना होता है। 

ये सुरक्षा व संरक्षा से खिलवाड़ है

बगैर प्रशिक्षण के सीधे काम लेना रेलवे नियम का घोर उल्लंघन है। इसके अलावा ये सुरक्षा व संरक्षा के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है। इस मामले में डीआरएम को हस्तक्षेप करना चाहिए।

- एसबी श्रीवास्तव, रेलवे में सुरक्षा मामलों के जानकार

पद रिक्त है ये सही है

ये सही है कि मंडल में गार्ड के पद रिक्त है। इनको भरने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे है। प्रशिक्षण तो काम करने के दौरान भी हो जाएगा।

- जेके जयंत, जनसंपर्क अधिकारी, रतलाम रेल मंडल
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