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हमारा पेयजल कितना शुद्ध, इसे परखने नियमित नहीं ले रहे सैंपल

जिंदगी की अहम आवश्यकता पर नहीं गंभीरता
कहीं माह में औसत 10 तो कहीं पूरा माह निकलने पर भी सैंपल नहीं
रिपोर्ट मिलने के बाद भी ट्रीटमेंट में बजट का रोड़ा दूर नहीं हो रहा

रतलाम

Published: November 26, 2021 08:13:21 pm

सचिन त्रिवेदी

उज्जैन. जिंदगी की सबसे अहम जरूरत पेयजल की शुद्धता को लेकर दावे तो बहुत हो रहे हैं, लेकिन जिनके कंधों पर इसकी जवाबदारी है वे गंभीर नहीं है। दरअसल, उज्जैन संभाग के बड़े शहरों में स्थानीय निकायों को घरों तक पहुंचने वाले जल की शुद्धता को परखना है और इसके लिए पूरी प्रक्रिया भी निर्धारित है, फिर भी निकायों का तंत्र इस दिशा में महज औपचारिकता करता नजर आ रहा है, क्योंकि आंकड़ों का गणित यह दर्शा रहा है। संभाग के ज्यादातर निकाय आबादी के लिहाज से औसत सैंपल भी नहीं जुटा पा रहे हैं।
drinking water
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जल जीवन मिशन के तहत आई एक रिपोर्ट में प्रदेश के कुछ जिलों में पेयजल स्रोतों और विकल्पों की जांच के दौरान रासायनिक तत्वों की मात्रा निर्धारित मापदंडों से अधिक पाई गई थी, इसके बाद राष्ट्रीय जल जीवन मिशन कार्यक्रम के तहत इन जिलों में पेयजल ट्रीटमेंट के कार्यक्रम चलाए गए हैं। मिशन दिसंबर अंत तक अपनी प्रगति की नई रिपोर्ट जारी करेगा, इसके पहले 'पत्रिका' ने संभाग के बड़े शहरों में पेयजल की शुद्धता परखने के तंत्र की संजीदगी की पड़ताल की। पेयजल शुद्धता तभी संभव है, जब घरों तक पहुंचने वाले पानी की नियमित और आबादी के लिहाज से अधिकतम सैंपलिंग होती रहे, लेकिन पड़ताल के दौरान सामने आए आंकड़े पेयजल परखने में गंभीरता प्रदर्शित नहीं कर रहे।
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IMAGE CREDIT: patrika
फिलहाल ये हालात....कहीं हाथ ही खाली


शहरी इलाकों में शुद्ध पेयजल उपलब्धता निकाय का जिम्मा है तो पेयजल की जांच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की लैब के माध्यम से कराई जाती है। कुछ निकायों ने फिल्टर प्लांटों पर अपने केमिस्ट के जरिए भी जांच व्यवस्था बनाई है, लेकिन ज्यादातर निकाय तंत्र विकसित करने के बाद भी नियमित सैंपल नहीं ले रहे है जिससे जांच कम होती है।

1. रतलाम...11 माह में महज 12 सैंपल की ही जांच


संभाग के दूसरे बड़े शहर रतलाम में जनवरी से नवम्बर माह के बीच महज 12 सैंपल लेकर पानी की जांच कराई गई है, मतलब हर माह औसत एक सैंपल। जबकि शहरी आबादी को करीब 40 हजार नल कलेक्शन के जरिए पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है और तो पेयजल स्रोत के जरिए भी टैंकरों के माध्यम से कॉलोनियों में पानी जाता है।

2. देवास...जनवरी में एक भी सैंपल नहीं, फिर संभले


नगर निगम देवास ने जनवरी माह में एक भी सैंपल नहीं जुटाया, हालांकि इसके बाद कोरोनाकाल में जिम्मेदार जागे और वाटर वक्र्स के साथ टंकियों के सैंपल जुटाए गए, हालांकि घरों तक जा रहे पानी की जांच अब भी शिकायत के इंतजार में है। नवम्बर तक घरेलू स्तर पर औसत सैंपलिंग में देवास निकाय भी महज 25 फीसदी सैंपल ले पाया।

3. उज्जैन....ट्रीटमेंट पर 5 लाख खर्च, फिर भी मटमैला


संभागीय मुख्यालय उज्जैन में भी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को पानी परखने की जिम्मेदारी देने के बाद करीब 4 से 5 लाख रुपए हर माह शुद्ध पानी की प्रक्रिया पर खर्च हो रहे हैं, लेकिन शहर के घरों तक पहुंच रहा पानी कभी पीला तो कभी मटमैला आ रहा है। हर माह औसतन 10 से 15 सैंपल जांच के लिए पीएचई अपनी लैब में जुटाती है।
चेतावनी और गंभीरता....जांच में मानक कम मिले


नीमच में नगर पालिका ने पेयजल की शुद्धता का रेकॉर्ड ही दुरूस्त नहीं किया है। लंबे समय से शहर से सैंपलिंग भी नियमित नहीं हो रही है, जबकि यहां एक स्थल से लिए गए सैंपल की जांच के बाद लैब से क्लोरीन की मात्रा कम पाए जाने पर चेतावनी दी गई थी। इसी तरह मंदसौर में जिले के निकाय माह में औसत 1 या 2 सैंपल ही जुटा पाते हैं। शाजापुर और आगर-मालवा जैसे निकायों के पास भी संसाधन कम है, इसका प्रभाव सैंपलिंग पर हो रहा है, यहां भी हर माह औसत 4-5 सैंपल ही जांच के लिए लिए जाते हैं।
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IMAGE CREDIT: patrika
एक्सपर्ट व्यू...
जांच प्रणाली को बढ़ाना जरूरी

पूर्व में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की हर स्तर पर पेयजल की गुणवत्ता पर कार्य करता था, इसके बाद व्यवस्था में बदलाव से निकायों को जिम्मेदारी मिल गई। हालांकि जांच का कार्य अब भी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के माध्यम से ही हो रहा है हो कुछ शहर बड़ी एजेंसियों से भी अपने पेयजल की जांच कराते हैं। प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी लैब पेयजल की जांच कर समय समय पर अपनी रिपोर्ट जारी करती है। जल जीवन मिशन के बाद से व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन अब भी पेयजल सप्लाई के अनुसार जांच नहीं हो पाती है। संसाधनों की कमी भी इसका बड़ा कारण है, सैपलिंग बढऩे से एक-दो माह में हर बड़े इलाके में सप्लाई होने वाली पेयजल की जांच करना आसान होगा।

- पंकज पाटीदार, सेवानिवृत्त प्रयोगशाला इंचार्ज, पीएचई

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