शिक्षा व्यवस्था को विदेशों से बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों में समर्पण भावना जरूरी

शिक्षा व्यवस्था को विदेशों से बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों में समर्पण भावना जरूरी

रतलाम। बच्चों में रचनात्मकता तथा शिक्षकों में समर्पण की भावना हो तो निश्चित ही देश की शिक्षा व्यवस्था विदेशों से बेहतर हो सकती है। शिक्षा की श्रेष्ठता के लिए शिक्षकों को अपनी क्षमता में वृद्धि कर बच्चों के साथ प्रायोगिक शिक्षण पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। यह बात दक्षिण कोरिया की यात्रा से लौटे प्राचार्य राजेन्द्र बोस ने कही। वे जनपद शिक्षा केन्द्र द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में जनशिक्षकों को संबोधित कर रहे थे।

इस मौके पर जनपद शिक्षा केन्द्र से स्थानांतरित जनशिक्षकों को विदाई दी गई। इस अवसर पर विकासखंड स्रोत केन्द्र समन्वयक विनोद शर्मा ने कहा कि सभी जनशिक्षकों ने एक परिवार की तरह कार्य किया तथा अपनी जिम्मेदारी को समझ कर विकासखंड को प्रदेश में स्थान दिलाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कार्यक्रम में स्थानांतरित जनशिक्षकों तथा अकादमिक समन्वयक शंतिलाल देवड़ा ने जनपद शिक्षा केन्द्र में कार्यानुभवों को सांझा किया। विदेश यात्रा से लौटे सुजापुर उमावि के प्राचार्य बोस ने दक्षिण कोरिया की शिक्षा, साफ सफाई तथा यातायात व्यवस्था की जानकारी देते हुए बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, कौशल तथा तकनीकी शिक्षा के साथ ही स्वयं कार्य करने की प्रेरणा व दूसरों के प्रति सम्मान का भाव पैदा करने की आवश्यकता पर बल दिया। संचालन जनशिक्षक अंबाराम बोस ने किया। आभार रामकृष्ण उपाध्याय ने माना। कार्यक्रम में बीएसी संजय भट्ट, दिग्पालसिंह मकवाना, बीजीसी सुनीता शर्मा, जनशिक्षक रितेश सुराना, भागीरथ मालवीय, नानालाल नायमा, योगेन्द्र मईड़ा, प्रदीप वैष्णव, उपयंत्री राजेश धाकड़, युनूस खान व कालूसिंह भाटी आदि उपस्थित थे।

Akram Khan
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