संभल जाओ वरना गर्मी में खड़ी हो जाएगी मुसीबत

बरसात के बाद जितना भूजलस्तर होना चाहिए उतना है नहीं, जलस्तर में कमी से जिले में १० फीसदी हैंडपंपों ने दम तोड़ा

By: harinath dwivedi

Published: 10 Feb 2018, 11:21 AM IST

रतलाम। पिछले साल जिले में मानसून की देरी से दस्तक और फिर बीच-बीच में कम वर्षा का असर अब भूजलस्तर पर दिखाई देने लगा है। जिले के ज्यादातर सभी विकासखंडों में भूजलस्तर की स्थिति इस बार पिछले साल के मुकाबले कुछ अच्छी नहीं कही जा सकती है। मानसून खत्म होने के बाद के भूजल के सामने आए आंकड़े बता रहे हैं कि कम वर्षा की वजह से इस बार गर्मी में खासकर ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के सामने पेयजल संकट की स्थिति गंभीर रूप में उभकर सामने आ सकती है। अतिदोहित के रूप में ख्यात पिपलौदा विकासखंड में इस बार भी स्थितियां खराब ही है। भूजलविद और भूजल कार्यालय से सेवानिवृत्त बीएल जैन बताते हैं कि भूजल का स्तर जितना गहराई में होता है उतना ही गर्मी के दिनों में पेयजल के हिसाब से दिक्कत वाला होता है इस समय भूजल की स्थिति ठीक नहीं है इससे कहा जा सकता है कि गर्मी में जलस्तर और नीचे जाएगा जिससे समस्या हो सकता है।

 

रतलाम भी होने लगा अतिदोहित

जावरा और पिपलौदा विकासखंड में सबसे ज्यादा भूजलस्तर का दोहन होता रहा है और यह लगातार बना हुआ है। मानसून के पहले तक इन विकासखंडों में भूजल का स्तर 12 मीटर यानि करीब 40 फीट की गहराई तक पहुंच जाता है। इन दोनों विकासखंडों की राह पर अब रतलाम विकासखंड भी चलने लगा है। यहां भी भूजलस्तर मानसून आने के पहले 14 से 15 मीटर तक की गहराई तक पहुंचने लगा है। पिछले कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि यहां भी दोहन की स्थिति बहुत खराब है।

100 कुएं, 16 ट्यूबवेल

जिले में छहों विकासखंडों में भूजलस्तर को नापने के लिए 100 कुओं के साथ ही 16 ट्यूबवेल उपयोग में लाए जाते हैं। इन ट्यूबवेलों में पीजो मीटर लगाए गए हैं जिससे पानी की गहराई पता की जाती है। वैसे इन कुओं में भूजलस्तर मापने के लिए अब भी परंपरागत तरीके का ही उपयोग किया जाता है। विभाग द्वारा चिह्नित 100 कुओं में वजनी वस्तु बांधकर रस्सी उतारी जाती है और इसी के सहारे इंची टेप को भी उतारा जाता है और इसी से गहराई पता की जाती है कि कितनी गहराई पर भूजलस्तर है।

10 फीसदी हैंडपंप तोड़ चुके हैं दम

जिले में भूजलस्तर की कमी का असर हैंडपंपों पर भी दिखाई देने लगा है। जिले में स्थापित करीब 10 हजार हैंडपंपों में से लगभग एक हजार हैंडपंप अब तक जलस्तर की कमी से दम तोड़ चुके हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अनुसार इस समय भूजलस्तर की सबसे खराब स्थिति आलोट और पिपलौदा विकासखंड में हैं। विभाग की जानकारी के अनुसार दोनों विकासखंडों में औसत सेज्यादा हैंडपंप बंद हो चुके हैं। इनके बंद होने की मुख्य वजह इनका जलस्तर 200 मीटर से नीचे चले जाना है।

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दो सौ मीटर से नीचे जलस्तर

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के स्थापित हैंडपंप में कम से कम 200 मीटर का पाइप उतारा जाता है। दो सौ मीटर से नीचे जलस्तर चले जाने पर हैंडपंप बंद हो जाते हैं। इससे तय हो जाता है कि जलस्तर काफी नीचे चला गया है। जनवरी की रिपोर्ट के अनुसार विभाग के स्थापित करीब 9806हैंडपंपों में से 988 हैंडपंप बंद हो चुके हैं। 

केपी वर्मा, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग

harinath dwivedi Editorial Incharge
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