scriptgovernment spend crores nal jal scheme many villages crave water | योजना पर करोड़ों खर्च कर रही सरकार, फिर भी पानी को तरस रहे कई क्षेत्र, ब्लैक लिस्टेड कंपनी कर रही काम | Patrika News

योजना पर करोड़ों खर्च कर रही सरकार, फिर भी पानी को तरस रहे कई क्षेत्र, ब्लैक लिस्टेड कंपनी कर रही काम

-नल जल योजना की जमीनी हकीकत
-योजना पर करोड़ों खर्च कर रही सरकार
-फिर भी पानी को तरस रहे कई गांव
-दो विभागों की ब्लैक लिस्टेड कंपनी कर रही काम
-शिकायतें मिलने पर कलेक्टर ने किया था ब्लैक लिस्टेड

रतलाम

Published: May 11, 2022 02:04:44 pm

रतलाम. हर गांव को शुद्ध पीने का पानी मुहैय्या कराने के लिए मध्य प्रदेश सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। इसके लिए सरकार ने बाकायदा 'नल जल योजना' बनाकर हर घर नल कनेक्शन लगाने का दावा किया है। हालांकि, इससे उलट अब भी प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्र स्वच्छ पानी को तरस रहे हैं। ताजा मामला रतलाम से सामने आया है। यहां के भी कई गांव पानी की समस्या से जूझ रहे हैं तो वहीं जिले में नल जल योजना का प्रभार उस कंपनी के हाथ में है, जिसे धांधलियों के मामले में खुद कलेक्टर द्वारा ब्लैकलिस्टेड किया गया था। आलम ये है कि, वही ब्लैकलिस्टेड कंपनी अब भी धांधलियां करने से बाज़ नहीं आ रही है।

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योजना पर करोड़ों खर्च कर रही सरकार, फिर भी पानी को तरस रहे कई क्षेत्र, ब्लैक लिस्टेड कंपनी कर रही काम

जिले के राजपुरा पंचायत के सरपंच समेत गांव के लोगों ने आरोप लगाया है कि, ठेकेदार ने काम पूरा नहीं किया और पंचायत से प्रमाण पत्र पाने के लिए चौकीदार को ब्लैकमेल किया कि वह सरपंच व ग्रामीणों से नल जल के प्रमाण पत्र पर सिग्नेचर करवा लाएगा तो उसे 5 माह का बकाया वेतन दे दिया जाएगा। इस संबंध में सरपंच राजीव देवदा और चौकीदार के साथ ग्रामीण पीएचई जिला कार्यालय पहुंचे और हंगामा किया। इन सभी का कहना है कि, जब काम पूरा हुआ ही नहीं है तो हमसे कार्यपूर्ण होने का प्रमाण पत्र क्यो मांगा जा रहा है। अगर आपने इस प्रमाण पत्र के लिए ठेकेदार से नहीं कहा तो आप इस पर कार्रवाई क्यों नहीं करते।

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3 कि.मी दूर नदी से लाना पड़ रहा पानी

महिला सरपंच ने पीएचई अधिकारियों को जमकर खरी खोटी सुनाते हुए कहा कि, अगर ठेकेदार ब्लैकलिस्टेड है तो उससे काम ही क्यों लिया जा रहा है। काम जल्दी पूरा कराने के लिए अन्य ठेकेदार को कार्य देने काम क्यों नहीं दे रहे। महिला सरपंच ने इस मामलेमें अधिकारियों की भी मिलीभगत का आरोप लगाया। उनका आरोप था कि, जब कंपनी का ठेकेदार ब्लैकलिस्टेड है तो ऐसी क्या वजह है कि, अधिकारी उसके सिवा किसी से काम कराने को तैयार नहीं हैं। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि, सरकारी दावों के अनुसार, योजना पर करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं। बावजूद इसके कई गांवों के हेंडपम्प और कुएं सुख चुके हैं। आजीविका चलाने के लिए ग्रामीणों को 3 किलोमीटर दूर नदी से पानी लाना पड़ रहा है।


अधिकारी दे रहे अजीब बयान

इधर अधिकारी भी इस पूरे मामले में अधिकारी भी अजीबो गरीब बयान दे रहे हैं। जिम्मेदारों का कहना है कि, हम कोशिश कर रहे है कि, इस ब्लैकलिस्टेड से ही पूरा काम लें, लेकिन वो नही कर पा रहा है। जब अधिकारी से अन्य ठेकेदार को कार्य देने पर सवाल किया गया तो वो ब्लेक लिस्टेड ठेकेदार के पक्ष में ही जवाब देते नजर आए। अधिकारी का कहना है कि, ठेकेदार ने बहुत कुछ काम कर दिया है। इसलिए हम उसी से काम कराना चाह रहे हैं।

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कौन है ब्लैक लिस्टेड कंपनी ?

दरअसल, बीते महीने 'नल जल योजना' में लापरवाही को लेकर प्राची कंट्रक्शन फर्म के ठेकेदार अनिल पोरवाल को कलेक्टर के आदेश से ब्लैकलिस्ट किया गया था। सेमलिया गांव में ठेकेदार ने गुणवत्ता से कार्य नहीं किया था। बार-बार कहने के बाद भी जब कार्य में लपरवाही सामने आई तो ठेकेदार पर ब्लैकलिस्टेड की कार्रवाई की गई थी। इससे पहले सिमलावदा में 1 करोड़ 75 लाख से बन रहे नए स्कूल भवन की गुणवत्ता की खबरें सामने आने के बाद पीआईयु विभाग द्वारा एक कमेटी बनाकर भवन का निरिक्षण किया गया, जिसमें धांधली सामने आने के बाद प्राची कंट्रक्शन को ब्लेक लिस्टेड किया गया था।


उठ रहे सवाल

अब सवाल ये कि, पीएचई ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार से ही काम क्यों ले रहा है। अगर वो पहले ही गुणवत्ता गड़बड़ी न करता तो उसे ब्लैकलिस्ट नहीं किया जाता, लेकिन बावजूद उसी ठेकेदार के भरोसे पीएचई अधिकारी कार्य को पूरा कराने में जुटे हुए हैं। अधिकारियों की इस मंशा ने उन्हें सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। हालात यह कि ठेकेदार ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी धांधली से बाज़ नहीं आ रहा और अब चोकीदार को अपूर्ण काम के लिए एनओसी प्रमाण पत्र लाने को कहा गया है।

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