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रतलाम में सरकारी गेहूं ख़रीदी हुई फ्लॉफ, यह है कारण

मालवा का गेहूं अपनी खास गुणवत्ता के चलते प्रदेशभर में पहचान रखता है। हाड़तोड़ मेहनती किसान की यह उपज बीते तीन सालों से सरकार के समर्थन को नजरअंदाज कर रही है। दरअसल, सरकारी दर पर गेहूं खरीदी का आंकड़ा इस वर्ष 25 फीसदी के पास भी नहीं पहुंचा है, जबकि अब महज एक पखवाड़ा ही शेष बचा है।

रतलाम

Published: May 18, 2022 09:04:43 pm

रतलाम. मालवा का गेहूं अपनी खास गुणवत्ता के चलते प्रदेशभर में पहचान रखता है। हाड़तोड़ मेहनती किसान की यह उपज बीते तीन सालों से सरकार के समर्थन को नजरअंदाज कर रही है। दरअसल, सरकारी दर पर गेहूं खरीदी का आंकड़ा इस वर्ष 25 फीसदी के पास भी नहीं पहुंचा है, जबकि अब महज एक पखवाड़ा ही शेष बचा है। इस दौरान भी खरीदी का आंकड़ा ज्यादा बढऩे का अनुमान नहीं है, क्योंकि बीते तीन साल से किसान सरकारी दर पर खरीदी को लेकर उत्साहित नहीं है और बाजार की चाल पर कदमताल करते हुए केन्द्रों की ओर नहीं बढ़ रहे। बाजार में अच्छे दाम और केन्द्रों पर अव्यवस्था व भुगतान की प्रणाली में लचरता के चलते साल-दर-साल सरकारी केन्द्रों पर गेहूं की खन-खन की आवाज कम होती जा रही है।
Government wheat is not even able to touch the figure of 25 percent
Government wheat is not even able to touch the figure of 25 percent
दर में कमी सबसे बड़ा कारण

सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की तारीख को बढ़ाकर 31 मई कर दिया है। तीन साल में समर्थन मूल्य में गेहूं की बिक्री में किसानों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह अन्नदाता किसान समर्थन मूल्य से प्रति क्विंटल पर मिलने वाली राशि को कम बता रहे है। इस समय शासन ने प्रति क्विंटल गेहूं की दर 2015 रुपए तय की है, जबकि बाजार में न्यूनतम दर तीन हजार रुपए है। यही स्थिति रही तो आने वाले समय में प्राथमिक उपभोक्ता भंडार में गेहूं की कमी हो जाएगी, हालांकि पुराना गेहूं सरकार का साथ देता रहेगा।
Government wheat wastage in Khargone district
IMAGE CREDIT: patrika
अब तक 61 करोड़ का भुगतान

जिले में रतलाम शहर, आलोट व जावरा में गेहूं की खरीदी अधिक मात्रा में होती है। इस समय हालात यह है कि कुल खरीदी के लक्ष्य का 25 प्रतिशत गेहूं भी नहीं खरीदा जा सका है। पूर्व में समर्थन मूल्य के गेहूं के दाम प्रति क्विंटल 1965 रुपए थे जो बढकऱ अब 2015 रुपए हो गए है। इसके बाद भी मंडी से लेकर सोसायटी में गेहूं की खरीदी में धरती के लाल की रुचि नहीं है। 4 अप्रेल से समर्थन मूल्य की खरीदी शुरू हुई थी जो 31 मई तक चलेगी। गेहूं खरीदी के लिए हर बार की तरह इस बार भी लक्ष्य को 10 प्रतिशत बढ़ाया गया है। अब तक 5007 किसानों को समर्थन मूल्य में खरीदी का भुगतान करीब 61 करोड़ रुपए किया गया है।
तीन वर्षो में लगातार कमी
वर्ष - खरीदे गेहूं - भुगतान - किसान
2020 -239847 -461.69-33357
2021--147578-291.46-24058
2022-32624.8-64.74-5007

नोट-गेहूं खरीदी मीट्रिक टन में व राशि करोड़ रुपए में है।

कोई क्यों बिक्री करें इनको

किसान दिन व रात कड़ी मेहनत कर उपज उगाता है। इतनी मेहनत इसलिए करता है कि उसको उसकी लागत से कुछ अधिक मिल जाए, जिससे वो अपने परिवार को अन्य की तरह कुछ खुशियां दे पाए। जब बाजार में उपज के दाम समर्थन मूल्य से अधिक मिल रहे है तो सरकार को कोई क्यों गेंहू की बिक्री करें।
- अरविंद पाटीदार, प्रगतिशील किसान, ग्राम रिगनिया

किसान को कमजोर कर रही सरकार

सरकार किसान को कमजोर कर रही है। सरकार चाहती ही नहीं है कि समर्थन मूल्य पर खरीदी हो, बाजार से अधिक दाम सरकार दे, फिर देखें, लंबी - लंबी लाइन लग जाएगी।
- राजेश पुरोहित, जिलाध्यक्ष युवा किसान संघ

किसानों की रुचि की कमी
लगातार तीन साल से किसानों की रुचि समर्थन मूल्य में गेहूं की बिक्री करने में कम हो रही है, इसका कारण समीक्षा का विषय है।
- विपिन लाट, शासकीय भंडारगृह प्रमुख रतलाम
Government wheat pile stopped
IMAGE CREDIT: Government wheat pile stopped

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