किसान आंदोलन से ठप पड़े सरकारी काम

किसान आंदोलन से ठप पड़े सरकारी काम

बीते 15 दिनों से पुलिस प्रशासन के अधिकारी जुटे व्यवस्था दुरुस्त करने में


रतलाम।
जिले में 15 दिन पहले किसान आंदोलन के बाद उपजे तनाव और उसके बाद लगे राजनीतिक जमावड़े के बीच प्रशासनिक व्यवस्था बुरी तरह से लडख़ड़ा गई है। आंदोलन की शुरुआत से ही पुलिस-प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे है, जिसके चलते सरकारी दफ्तरों में काम ठप से हो गए हैं।

वर्तमान में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में गिनती के अधिकारी व कर्मचारी काम संभाल रहे हैं। ऐसे में इन दफ्तरों में आने वाले कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। हालांकि अब स्थिति सामान्य होने से यहां आने वाले लोगों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद जागी है, लेकिन यहां की व्यवस्थाओं के पहले की तरह सुचारू होने में थोड़ा समय लग सकता है।

नेताओं का लगा रहा जमावडा

रतलाम से फैली किसान आंदोलन की आग के बाद सबसे ज्यादा मंदसौर जिला झुलसा है, यहां पांच लोगों की मौत के बाद पुलिस प्रशासन को स्थिति पर काबू पाने के लिए कफ्र्यू लगाना पड़ गया था। कफ्र्यू खत्म होते ही सभी राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं का एक-एक कर यहां आना शुरू हो गया था, जो अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे के साथ ही संभवत खत्म हो गया है।

व्यवस्थाओं में जुटा अमला

किसान आंदोलन में मचे उपद्रव की आग बुझने के बाद अब पुलिस प्रशासन का अमला अतिरिक्त सतर्कता बरतकर व्यवस्थाएं चाक चौबंद कराने में जुटा हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री का दौरा घटनाक्रम पर मलहम लगाने वाला साबित हो रहा है। पुलिस-प्रशासन अब भी पूरी तरह से जिले के हर उस क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है, जहां पर उपद्रवियों ने हंगामा मचाकर घटनाओं को कारित किया था।

किसान नहीं थे उपद्रवी

किसान आंदोलन के नाम पर जिन लोगों के यहां तोडफ़ोड़ व आगजनी की घटना हुई है, वे लोग भी अब यहीं बात कह रहे है, कि इस पूरे घटनाक्रम को अंजाम देने वाले किसान नहीं थे। किसानों को हथियार बनाकर इस पूरी घटना को आपराधिक किस्म के कुछ लोगों ने अंजाम दिया है, जिन्होंने इसकी आड़ में लोगों से दुश्मनी निकालने के साथ उनके यहां लूटपाट मचाकर आगजनी की घटना को अंजाम दिया है।

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