मंदसौर में पौत्री ने रतलाम में दादा ने आचार्य रामेश से ग्रहण की दीक्षा

मंदसौर में पौत्री ने रतलाम में दादा ने आचार्य रामेश से ग्रहण की दीक्षा

Gourishankar Jodha | Publish: Aug, 12 2018 02:42:21 PM (IST) Ratlam, Madhya Pradesh, India

मंदसौर में पौत्री ने रतलाम में दादा ने आचार्य रामेश से ग्रहण की दीक्षा

रतलाम।दीक्षा दानेश्वरी आचार्यश्री रामेश अमृत देशना के दौरान दो श्रावकों में देखते ही देखते वैराग्य जागा। उन्होंने जैन भागवती दीक्षा ग्रहण करने की इच्छा जताई और परिजनों तथा श्रीसंघ की सहमति मिलने पर डेढ़ घंटे के अंतराल पर दोनों ने आचार्यश्री रामेश के मुखारविंद से दीक्षा ग्रहण कर ली। दीक्षा का यह प्रसंग अनायास ही बना। श्री साधुमार्गी जैनश्री संघ द्वारा आयोजित संयम साधना महोत्सव ने रतलाम में नया इतिहास रच डाला।
आचार्यश्री का रतलाम चातुर्मास एतिहासिक बनता जा रहा है। चातुर्मास से पहले मंदसौर प्रवास में उनके इंदौर की सुरभि संघवी जैन भागवती दीक्षा अंगीकार कर नवदीक्षित साध्वी स्वागतश्री महाराज बन गई थी। चातुर्मास में हरियाली अमावस्या पर उनके सांसारिक दादा बाबूलाल संघवी समता कुंज में दीक्षा ग्रहण कर ली। समता शीतल बाग में आचार्यश्री की निश्रा में आरोहणा शिविर 23 अगस्त तक चलेगा। इसमें 21 श्राविकाओं सहित कुल 33 शिविरार्थी शामिल हुए थे। 12 श्रावकों में से 2 ने शनिवार को जैन भागवती दीक्षा अंगीकार कर ली।

आरोहण से तात्पर्य उच्चता की और अग्रसर होना है

आचार्यश्री ने अमृत देशना में जब कहा कि श्रावक के आध्यात्म जीवन का लक्ष्य आरोहण होता है। आरोहण से तात्पर्य उच्चता की और अग्रसर होना है। इसी बीच आचार्यश्री की प्रेरणा पाकर समता शीतल बाग में गत 9 अगस्त से आयोजित आरोहणा शिविर में शामिल रतलाम के प्रतापनगर निवासी इंदरमल पिता रतनलाल कांठेड़ खड़े हो गए। उन्होंने जैन भागवती दीक्षा ग्रहण की इच्छा जताई। आचार्यश्री ने धर्मसभा में उपस्थित उनके परिजनों से आज्ञापत्र मिलने पर उन्हें उन्हें सुबह 11.42 बजे दीक्षा प्रदान की। इसके बाद इंदौर के बाबूलाल संघवी ने दीक्षा ग्रहण करने की इच्छा व्यक्त की। उनके परिजनों से तत्काल सहमति नहीं दी, जिसपर कुछ समय पारिवारिक चर्चा में बीता। श्री संघवी की दृढता पर आखिरकार परिजन मान गए और आज्ञापत्र सौंपा। इसके बाद आचार्यश्री ने उन्हें दोपहर 1.18 बजे दीक्षा प्रदान की। दीक्षा पश्चात दोनों के नए नामों की घोषणा की गई।

उपस्थितजनों ने मंगलगीतों से दीक्षा की अनुमोदना

चातुर्मास संयोजक महेंद्र गादिया ने बताया कि इंदरमल कांठेड़ को नवदीक्षित इभ्यमुनि तथा बाबूलाल संघवी को नवदीक्षित ब्रम्हऋषि मुनि का नाम मिला। उनके दीक्षा ग्रहण करते ही पूरा समता कुंज केशरिया-केशरिया, आज हमारो मन केशरिया के स्वरों से गूंज उठा। उपस्थितजनों ने मंगलगीतों से दीक्षा की अनुमोदना की। आचार्यश्री ने दीक्षा को शूरवीरता बताया। उन्होंने कहा कि व्याख्यान सुनने कई लोग आते है, लेकिन असर जिनपर होता है, वे भव्य आत्माएं होती है। दोनों दीक्षार्थियों ने हरियाली अमावस्या के पावन पर्व पर अपने जीवन की हरियाली बना ली है। गौतममुनि एवं आदित्य मुनिसहित उपस्थित साधु व साध्वी मंडल ने गीतिकाएं प्रस्तुत की। चंदन पिरोदिया के आव्हान पर सबने जयकारा लगाया। संचालन सुशील गौरेचा, महेश नाहटा ने किया।

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