सीएम सुरक्षा में घुसने के मामले में दो आरोपियों को अर्थदंड से किया दंडित

- वर्ष 2010 में बाजना के बेड़दा गांव में सीएम के पड़ाव के दौरान सो रहे सुरक्षा जवानों के वीडियों बनाने के दौरान मारपीट का मामला

 

By: harinath dwivedi

Published: 24 May 2018, 12:43 PM IST

रतलाम।

जिला सत्र न्यायाधीश मृत्युजंय सिंह की कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर सुधार करते हुए शासकीय कार्य में बाधा और सीएम सुरक्षा को भेदने के मामले में आरोपी दो युवकों को मारपीट और प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने के प्रयास में दोषी ठहराया है। जिन्हें दो-दो हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित करने के आदेश दिए हैं। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह के कारावास के आदेश दिए हैं।

एडवोकेट सुनील लखोटिया ने बताया कि 1 अप्रेल 2010 प्रात: साढे तीन बजे बेड़दा अंतर्गत आरक्षीकेंद्र सैलाना में मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रीगण का केम्प लगा हुआ था। केम्प की सुरक्षा के लिए एसएएफ बटालियन लगाई गई थी। फरियादी विजय कुमार माहोर प्लाटून कमांडर की ड्यूटी केम्प सुरक्षा में थी। और वह 2-8 की फ्रंट गार्ड का प्रभारी था। उस समय प्लाटून कमांडर रमेश अखाडि़या भी ड्यूटी पर थे जो 2-8 रिअर गार्ड के प्रभारी थे। उक्त दिनांक को प्रात: साढे तीन बजे पर केम्प के पीछे की तरऊ से कुछ हलचल आहट आने पर

 

उपरोक्त फोर्स के साथ विजय कुमार माहोर ने जाकर देखा तो पाया कि दो व्यक्ति हाथों में कैमरा लिए हुए लुकते-छिपते सुरक्षा घेरा भेदते हुए दिखे। जिन्हें चेतावनी देकर ललकारा और आगे नहीं बढऩे को कहा, फिर भी वे नहीं माने और आगे बढते गए। देानों को रोकने पर उन्होंने हमला कर दिया और उसके साथ पहरे पर नियुक्त आरक्षक मोहिन्दर परमार और यादवेंद्र सिंह, हवलदार मेजर शैलेष गुरंग को पैरों और घुटनों में चोट पहुंचाई। घूसों से सीने में मारा। शैलेष गुरंग ने जब बीच-बचाव कर उन्हें रोकना चाह तो एक व्यक्ति ने दांत से काट लिया। उसी समय फरियादी विजय कुमार, यादवेंद्र तथा मोहिन्दर परमार व अनय जवानों ने दोनों को पकडऩे की कोशिश की तो उन्होंने झूमा-झपटी की। दोनों में से एक व्यक्ति जो चश्मा नहीं पहनता था। उसने धमकी दिया कि उसे न हीं जानते हो, वह सहारा समय टीवी चेनल का प्रतिनिधि है। उसका नाम विजय मीणा और कैमरामैन का विक्रांत है। इसने यह काह कि उन्हें रोक कर अच्छा नहीं किदय ाहै। वह सभी की नौकरी ले लेगा। दोनों शराब के नशे में चिल्ला कर अभद्र व्यवहार करने लगे। आवाज सुनकर एसपी सहित पुलिस अधिकारी बाहर आ गए। जिसके बाद मारपीट की धारा 323, 506, 353, 456 में प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की थी। सैलाना कोर्ट के न्यायाधीश वीपी सोलंकी ने धारा ३५३ के तहत छह-छह माह और ४५६ में एक-एक वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले पर डीजे कोर्ट में आरोपीगण के वकील ने अपील की थी। इस पर जिला सत्र न्यायाधीश ने गहनता से फैसला सुनाया है।

 

यहां चुप रह गया अभियोजन
न्यायाधीश ने कहा कि सीएम सुरक्षा में लगे जवान सो रहे थे। उनहें ज्ञात होने पर उन्हें पकड़कर वीडियो कैमरा तोड़ दिया। कैसेट निकाल ली और मारपीट की थी। अभियोन साक्षियों की कथन से पाया जाता है कि जो गार्ड थे संख्या में अधिक थी, उन्होंने अपीलार्थी को पकड़ भी लिया था। वह फिर किस प्रकार वहां से भाग सकते है। अभियोजन ने साक्षियों को नहीं बताया। धारा 450 का दोषी ठहराया गया है। जो कि रात्रि प्रच्छन अतिचार या गृह भेदन के संबंध में है। गृह अतिचार की परिभाषा धारा 442 आईपीसी में दिया गया है। जिससे किसी निर्माण, तंबू या जलयान, जो मानव निवास उपयोग में आता हो या उपासना स्थल के रूप में हो या संपति की अभिरक्षा की स्थान के रूप में प्रयाग किया जा रहा हो। उसमें प्रवेश करना या बने रहना आवश्यक है। प्रस्तुत प्रदण में अभियोजन के साक्ष्य के अनुसार भी एक सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए सीएम के अस्थायी निवास के पचास मीटर पास तक आ गए थे। इस प्रकार स्वयं अभियोजन साक्ष्य के अनुसार अपीलार्थी ने किसी निर्माण या तंबू में प्रवेश नहीं किया था बलिक खुला स्थान जहां सुरक्षा घेरा बनाया गया था। वहां आ गए थे। अत: इसे गृह अतिचार नहीं माना जा सकता है। अपीलार्थीगण का स्वयं का कथन है कि वह वीडियोग्राफी कर रहे थे कि किस प्रकार सुरक्षा गार्ड सो रहे थे। इससे स्पष्ट है कि सुरक्षा के लिए बाहर घेरा बना हुआ था। वहां सामान्य व्यक्ति का जाना निषेधित था। बिना अनुमति के रात उसे साढे तीन बजे प्रवेश कर वीडियोग्राफी कर रहे थे। इस प्रकार उनके द्वारा किया गया कृत्य धारा 441 आईपीसी में परिभाषित अतिचार श्रेणी में आता है और उनके इस कृत्य से सीएम के सरक्ष्ज्ञा में लगे कर्मचारी अवश्य क्षुब्ध होंगे। अत: अपीलार्थी धारा 453 आइपीसी के अंतर्गत दंडि़त नहीं किया जा सकता है। उन्हें अधिक से अधिक धारा 447 के अंतर्गत दोष सिद्ध किया जा सकता है।

 

यह सुनाया फैसला

धारा 323 और 447 के तहत एक-एक हजार रुपए जुर्माना और जुर्माना न देने पर एक माह के कारावास की सजा सुनाई है। इस प्रकार दोनों आरोपी को दो-दो हजार रुपए के अर्थदंड से दंडि़त करने के आदेश दिए हैं। वहीं कोर्ट ने कहा कि प्रकरण की परिस्थिति और अपीलार्थीगण के प्रथम सिद्धदोष होने तथा उनकी आयु को देखते हुए मात्र अर्थदंड से दंडित किया जाना उचित प्रती होता है।

 

harinath dwivedi Editorial Incharge
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