जानिए कैसे हो रही थाने के विजिटर रजिस्टर में 'मनमर्जीÓ की एंट्री

जानिए कैसे हो रही थाने के विजिटर रजिस्टर में 'मनमर्जीÓ की एंट्री

Sourabh Pathak | Updated: 04 Jul 2019, 11:42:53 AM (IST) Ratlam, Ratlam, Madhya Pradesh, India

जानिए कैसे हो रही थाने के विजिटर रजिस्टर में 'मनमर्जीÓ की एंट्री

रतलाम। पुलिस थानों के विजिटर रजिस्टर में आगंतुकों की जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था शुरू होते ही लडख़ड़ा गई है। ये रजिस्टर औपचारिकता बन कर रह गए हैं। इनमें जानकारी दर्ज करवाने में पुलिसकर्मियों की रुचि नहीं है और कुछ आगंतुक भी जानकारी देने से कतराते हैं। स्टेशन रोड थाने पर आगंतुकों की एंट्री व्यवस्था में ढिलाई के चलते पुलिस अधीक्षक ने पिछले दिनों थाना इंचार्ज राजेंद्र वर्मा और हेड मोहर्रिर के खिलाफ कार्रवाई भी की, इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया।

 

पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी ने 10 जून से जिले के सभी थानों में आगंतुकों की जानकारी विजिटर रजिस्टर में दर्ज करने की व्यवस्था शुरू की थी। इसके पीछे मंशा थी कि थानों में पहुंचने वाले फरियादी की शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और फरियादी पहुंचा भी या नहीं इसकी जानकारी भी आसानी से उपलब्ध होगी। शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई की मॉनीटरिंग के लिए शुरू की गई व्यवस्था शुरुआत में तो तो ठीक से चली लेकिन बाद में शिथिल हो गई। कई थानों में विजिटर की संख्या पहले दिन के मुकाबले आधे से भी कम हो गई है। विजिटर रजिस्टर में एंट्री व्यवस्था की पड़ताल करने के लिए पत्रिका टीम ने बुधवार को एक साथ शहर के औद्योगिक क्षेत्र और माणक चौक थाने में करीब दो घंटे गुजारे। इस दौरान सामने आया कि दोनों थानों पर आगंतुकों की एंट्री की व्यवस्था अब महज औपचारिकता बन कर रह गई है।

थाना औद्योगिक क्षेत्र का दृश्य
टेबल पर यदि पुलिसकर्मी उपस्थित है तो एंट्री होगी, नहीं तो कोई भी कितनी बार आए-जाए कोई पूछता नहीं लेता। बुधवार दोपहर 1 से 3 बजे तक थाने में करीब 20-25 लोगों का आना जाना हुआ, लेकिन एंट्री मात्र चार लोगों की गई। पत्रिका टीम ने स्वयं की जानकारी दर्ज की, लेकिन किसी ने कुछ नहीं पूछा। वहां मौजूद जवान ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि चार-चार घंटे की ड्यूटी रहती है, मेरे आने के बाद दो आवेदन आए, जिनकी एंट्री की गई। मैं भी कभी बंदी को लाने ले जाने या कभी साहब के बुलावे पर जाता हूं, तब यदि कोई आकर चला जाए तो उसकी एंट्री नहीं होती है। यहां किसी कर्मचारी की स्थायी ड्यूटी नहीं है। रजिस्टर में एंट्री के शुरुआती दिनों में 80 से 100 लोगों की एंट्री हो रही थी। दो जुलाई को यह संख्या मात्र 36 पर रह गई, जबकि बुधवार को दोपहर 3 बजे तक 17 लोगों को एंंट्री थी।

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थाना माणक चौक का दृश्य
माणक चौक थाने पर एक होमगार्ड सैनिक को गेट पर ही एंट्री के लिए टेबल लगाकर बैठाया गया है, यहां आने वाले कुछ लोगों की हीरजिस्टर में एंट्री होती। ज्यादातर लोग बायपास कर निकल जाते हैं। यहां सुबह से लेकर दोपहर 2 बजे तक केवल सात लोगों की एंट्री की गई, जबकि उसी समय थाने में 15 से अधिक लोगों की जमा थे। इनमें अधिकांश लोग मारपीट व आपसी विवाद की शिकायत लेकर आए थे तो कुछ को पुलिस ने बुलाया था। थाने में जिस दिन से यह व्यवस्था शुरू हुई थी उस दिन 60 लोगों की जानकारी रजिस्टर में दर्ज हुई थी। उसके बाद अगले कुछ दिनों तक संख्या लगभग यहीं रही लेकिन अब धीरे-धीरे यह कम होने लगी है।

कार्रवाई भी की है
- थानों में पहुंचने वाले फरियादी की शिकायतों की मॉनीटरिंग के लिए विजिटर रजिस्टर की व्यवस्था शुरू की गई है। पिछले दिनों औचक निरीक्षण में स्टेशन रोड थाने की व्यवस्था सुचारू नहीं मिली, जिसके चलते टीआई और एचसीएम के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। इस व्यवस्था में और कसावट की जाएगी।
गौरव तिवारी, एसपी, रतलाम

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