# मोक्षदायिनी क्षिप्रा को बनाएं शुद्ध

पत्रिका कैम्पेन: पंडे-पुजारी भी क्षिप्रा में निर्माल्य व कचरा डालने से दूखी, बोले-गंदी नदी देख श्रृद्धालु होते आहत

By: sachin trivedi

Published: 06 Nov 2020, 07:19 PM IST

उज्जैन. मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी में डाले जा रहे निर्माल्य सामग्री के कारण घाटों पर हो रही गंदगी से घाट के पंडे-पुजारी भी दूखी है। इनका मानना है कि मां क्षिप्रा को स्वच्छ व निर्मल बनाए रखने की जिम्मेदारी सभी की है। पंडे-पुजारी होने के नाते हम जितना हो सकता है निर्माल्य नदी में विसर्जन नहीं करवाते लेकिन कई बार बाहर से आए श्रृद्धालु या शहरवासी ही नदी में पूजा-पाठ की सामग्री, हार-फुल सहित अन्य सामग्री विसर्जन कर जाते हैं। ऐसे में नदी के घाट गंदे दिखाई देते है। जब यहां बाहर से श्रृद्धालु पहुंचते है तो नदी की हालत देखकर उनकी भावना को ठेस लगती है और वे अच्छी छवि लेकर नहीं लौटते हैं। पंडे-पुजारियों का मानना है कि घाट क्षेत्रों में नदी को साफ रखने के लिए प्रशासन को बड़ी भूमिका निभाने की आवश्यकता है। नदी में निर्माल्य न डाले जाए इसके लिए सूचना बोर्ड, कुंड से लेकर नदी में ही विजर्सन स्थल बनाना होगा।

पत्रिका केम्पेन के साथ पंडे-पुजारी
पत्रिका केम्पेन मोक्षदायिनी क्षिप्रा को बनाएं शुद्ध अभियान को लेकर पंडे-पुजारी एक सार्थक पहल बताते हुए साथ होने की बात कह रहे हैं। इनका कहना है कि अखबार व सोशल मीडिया के माध्मय से जितने लोगों के पास इसकी जानकारी पहुंचेगी वह सजग होंगे और दूसरे को भी जागरुक करेंगे। इससे क्षिप्रा नदी को स्वच्छ रखने में खासी मदद मिलेगी। रामघाट हो या मंगलनाथ घाट, यहां पर खुली दुकानें और ठेले वाले भी गदंगी फैला रहे हैं। पंड-पुजारी बता रहे हैं कि दुकानों से सामाग्री खरीदकर लोग घाट पर बैठकर खाते-पीते हैं और फिर दोने, पत्तल या अखबार का टुकड़ा वहीं छोड़कर चले जाते हैं। बाद में यही कचरा नदी में जा रहा है। रामघाट पर चाट-पकौड़े के ठेले लगाने वाले नदी में जाकर बर्तन धोते हैं। इसकी जानकारी पुलिसवालों का भी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। वास्तव में खान-पान सामग्र्री की दुकान घाट से निश्चित दूरी पर रखने की जरुरत है।

यह बोले पंडे-पुजारी
रामघाट पर नदी में कचरा व अन्य सामग्री डालने के लिए होमगार्ड की ड्यूटी लगी है लेकिन यह कितने लोगों को रोक सकते हैं। घाटों पर निर्माल्य सामग्री के लिए होद बना रखी है लेकिन लोग इसमें डालते नहीं है। जो होद बने है, उसमें कई बार निर्माल्य डालने में भी लोग कतराते हैं। प्रशासन को कचरा होद में ही डालने के लिए जगह-जगह सूचना बोर्ड चस्पा करने की आवश्कयता है। हमारे स्तर पर तो हम लोगों को आह्वान करते ही है प्रशासन को भी आगे आना होगा।
पंडित मोहन त्रिवेदी, अध्यक्ष, श्री क्षेत्र पंडा समिति, उज्जैन

यह सही है कि क्षिप्रा में निर्माल्य सामग्री व कचरा डालने से गंदगी फैल रही है। सिद्धवट पर हम निर्धारित कर्मचारी नियुक्त करने पर विचार कर रहे हैं। यहां पूर्व में नदी में विसर्जन कुंड के रूप में जाली लगाई थी लेकिन बाढ़ के कारण वह टूट गई है। प्रशासन को चाहिए कि घाट पर कुंड बनाने के साथ ही रामघाट, मंगलनाथ, गंगाघाट व सिद्धनाथ पर दो-दो, तीन-तीन जाली वाली कुंड बना दें। ऐसे में निर्माल्य सामग्री डालने पर एक जगह रहेगी और उन्हें निकाला भी जा सकेगा।
- सुरेंद्र चतुर्वेदी, मुख्य पुजारी सिद्धवट

घाट पर पंडे-पुजारी निर्माल्य सामग्री निर्धारित कुंड में ही डलवाते है। बाहर से यात्री आते हैं या शहर में अभी नवदुर्गा के नो दिनी पूजा का सारा निर्माल्य लोग नदी में डाल गए। लोग नदी में पत्रिका, हवन-कुंड का राखोड़ा, हार-फुल सहित अन्य सामग्री डाल जाते हैं। हमने कई बार इसकी शिकायत की है लेकिन कुछ हुआ नहीं है। इसके लिए जागरुकता की आवश्यकता तो है ही लोगों को रोकने के लिए घाटों पर सख्ती की जरुरत है।
- गौरव उपाध्याय, धर्माधिकारी, तीर्थपुरोहित उज्जैन

जागरुक होगा और नदी को स्वच्छ रखने में सफलता मिलेगी। इसके अलावा हर प्रमुख घाट पर कर्मचारियों की तैनाती भी होना चाहिए, जो साफ-सफाई का ध्यान रखने के लोगों को कचरा डालने से रोके।
- दीप्तेश दुबे, शासकीय पुजारी मंगलनाथ मंदिर

sachin trivedi Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned