mp assembly election 2018 चुनाव पूर्व पूरा जोर बूथ मजबूत करने में, पोलिंग बूथ मैनेजमेंट में जुटी भाजपा व कांग्रेस

mp assembly election 2018 चुनाव पूर्व पूरा जोर बूथ मजबूत करने में, पोलिंग बूथ मैनेजमेंट में जुटी भाजपा व कांग्रेस

Ashish Pathak | Publish: Sep, 03 2018 12:00:16 PM (IST) Ratlam, Madhya Pradesh, India

mp assembly election 2018 चुनाव पूर्व पूरा जोर बूथ मजबूत करने में, पोलिंग बूथ मैनेजमेंट में जुटी भाजपा व कांग्रेस

रतलाम। विधानसभा चुनाव को लेकर अब दोनों प्रमुख राजनीतिक दल पोलिंग बूथ के मैनेजमेंट में लग गए है। कांग्रेस ने इस बार उन बूथों पर विशेष रुप से ध्यान देने की योजना बनाई है, जहां पर वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को कम वोट मिले थे। कांगे्रस नेता इन क्षेत्रों में पार्षद से लेकर ब्लॉक कांगे्रस अध्यक्ष को संपर्क करने को कह चूके है। वहीं भाजपा ने बूथ प्रभारी बनाकर कांगे्रस से थोड़ा आगे निकलने का प्रयास किया है। इसमे पन्ना स्तर तक के कार्यकर्ताओं को जोड़ा गया है। फिलहाल तो दोनों पार्टी बूथ पर मजबूती का दावा कर रही है।

एेसे समझे शहर में भाजपा की स्थिति को

शहर में भाजपा ने वर्ष २०१३ के विधानसभा चुनाव में पांच बूथ एेसे थे, जहां सबसे अधिक वोट पाए थे। इनमे बूथ नंबर 143 ऊंकला रोड पर 654 वोट, राजगढ़ बूथू नंबर 33 पर 639 वोट, डोंगरे नगर बूथ नंबर 81 पर 625 वोट, विरियाखेड़ी के बूथ नंबर 80 व 63 पर 614 व 598 वोट मिले थे। शहर में उखड़ी हुई सड़के, बडे़-बडे़ गड्डे, आदि से भाजपा को लेकर मतदाताओं का इन बूथ पर गुस्सा पांच वर्ष बाद है। हालांकि पार्टी की और से कमजोर पोलिंग बूथ पर प्रतिदिन अलग-अलग कार्यक्रम करके वहां के मतदाताओं को ये बताया जा रहा है कि उन्होंने सिवरेज लाइन, झोपड़ीमुक्त शहर करके सभी को आवास, कर्ज मुक्त करके आवास, मेडिकल कॉलेज, टू लेन सहित अनेक कार्य किए है।

कांगे्रस लगी हुई खुद को मजबूत करने में

1993 के बाद से शहर में कांगे्रस ने विधानसभा चुनाव नहीं जीता है। एेसे में इस बार जमीनी स्तर पर कांगे्रस ने काम करना शुरू किया है। इस बार कांगे्रस का पूरा ध्यान उन बूथ पर है, जहां पर पिछली बार के चुनाव में पराजय मिली थी। हालांकि चुनाव पूर्व ही पार्टी में नेताओं के बीच जमकर गुटबाजी हावी है। इसके बाद अब संगठन को मजबूत करने पर पार्टी ध्यान दे रही है। कांगे्रस ने वर्ष 2013 के चुनाव में सायर चबुतरा के बूथ नंबर 129 से 598 वोट, खिड़की दरवाजा के बूथ नंबर 202 से 575 वोट, मोहन टाकिज के बूथ नंबर 206 से 570 वोट, मालीपुरा के 138 व 130 नंबर बूथ से क्रमश: 569 व 532 वोट पाए थे।

ये वो मामले जिनमे नहीं निकला कोई हल


उद्योग में नहीं निवेश

शहर में पिछले पांच वर्ष में कोई बड़ा उद्योग नहीं आया या बड़ा निवेश नहीं हुआ। युवाओं को रोजगार देने के लिए न तो कोई बड़ा उद्योग की स्थापना हुई, न इसके लिए कोई बड़ा प्रयास हुआ। अब भी रोजगार के लिए शहरी युवा महानगर की और देखता है।

स्वास्थ्य सुविधा बदतर

शहर में भले एमसीएच की शुरुआत हुई हो, मेडिकल कॉलेज खुल गया हो, लेकिन जिले के सबसे बड़े अस्पताल में अब भी मरीजों को लाइन में लगकर चिकित्सक का इलाज करना होता है। गंभीर मरीज को रेफर होने की स्थिति जारी है। एेसे में अब अस्पताल को रेफर पाइंट कहा जाने लगा है।

पांच वर्ष में अतिक्रमण नहीं हटा सके

शहर के अनेक चौराहे अब भी अतिक्रमण मुक्त होने का सपना देख रहे है। इन पांच वर्ष में सड़कों से न तो अतिक्रमण हटा न चौराहों को विकसीत करके सौदर्यीकरण करने की दिशा में कार्य हुआ। टूलेन जरूर बने, लेकिन इसके बाद वहां पर फिर अतिक्रमण हो गया।

 

ये कहना है कांगे्रस का

हर बूथ पर कर रहे हैं कार्य

पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान जिस-जिस मतदान केन्द्र पर हम कमजोर रहे है वहां बूथ मैनेजमेंट का कार्य किया जा रहा है। कमेटी बनाई है जो हर वर्ग के लोगों को पार्टी से जोडऩे का कार्य कर रही है।

- विनोद मिश्रा, अध्यक्ष, शहर कांगे्रस

बूथ हमारी ताकत

भाजपा संगठन लगातार पोलिंग बूथ स्तर पर जाकर कार्य करता है। प्रत्येक बूथ को ए, बी, सी, डी ग्रेड में विभक्त किया है। उसी अनुसार कार्य कर रहे हंै। प्रत्येक मतदान केन्द्र पर टीम बन गई है।

- कानसिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष

ओद्योगिक निवेश में हम पिछड़े

शहर में भाजपा से आम लोगों ने जो उम्मीद लगाई थी उस पर ये खरे कुछ हद तक उतर पाए। स्थाई विकास कार्यों को अनदेखा किया गया है। ओद्योगिक निवेश हुआ ही नहीं। वहीं कांग्रेस के पास अवसर है, लेकिन कांग्रेसी नेताओं को संगठन को मजबूत करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

जुझारसिंह भाटी- वरिष्ठ साहित्यकार

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