एमपी पुलिस ने की राजस्थान पुलिस पर फायरिंग, सिपाही के पैर में लगी गोली

एमपी पुलिस ने की राजस्थान पुलिस पर फायरिंग, सिपाही के पैर में लगी गोली

Manish Geete | Publish: Mar, 30 2019 12:41:27 PM (IST) | Updated: Mar, 30 2019 02:14:29 PM (IST) Ratlam, Ratlam, Madhya Pradesh, India

एमपी पुलिस ने की राजस्थान पुलिस पर फायरिंग, सिपाही के पैर में लगी गोली

रतलाम। मध्यप्रदेश पुलिस की तरफ से नाकेबंदी के दौरान राजस्थान पुलिस पर फायरिंग का मामला सामने आया है। शनिवार को जब एमपी पुलिस के जवान राजस्थान में किसी आरोपी को पकड़ने जा रहे थे तभी यह घटना हुई।

उदयपुर-पिंडवाड़ा हाईवे पर शनिवार तड़के नाकेबंदी के दौरान जब राजस्थान पुलिस ने एक बिना नंबर की कार को रोका तो उसमें सवार एमपी पुलिस के सब इंस्पेक्टर वीरेंद्र बंदवाल ने फायर कर दी। इस दौरान एक गोली राजस्थान पुलिस के कांस्टेबल हंसराज के पैर में लगी, घटना के बाद एमपी पुलिस के ही उदयपुर में ठहरे एक अन्य सब इंस्पेक्टर अमित शर्मा ने पुलिस कंट्रोल रूम पर उनके दल पर लुटेरों की ओर से फायरिंग करने की जानकारी दी। कंट्रोल रूम में गोगुंदा पुलिस को बताया तो फायरिंग की हकीकत सामने आ गई। इसमें पाया गया कि फायरिंग एमपी पुलिस की तरफ से ही की गई थी। उधर, उदयपुर पुलिस ने तड़के एमपी पुलिस के सब इंस्पेक्टर वीरेंद्र बंदवाल व उसके साथ कार में रहे दीप अग्रवाल को हिरासत में लिया है, उनसे अभी पूछताछ की जा रही है। उधर, मध्यप्रदेश पुलिस की तरफ से हुई फायरिंग की घटना की जानकारी मध्यप्रदेश के किसी पुलिस अधिकारी को नहीं है। वे ऐसी कोई घटना से ही इनकार कर रहे हैं।



कांस्टेबल के पैर में धंसी गोली
इधर घायल कांस्टेबल हंसराज को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसके पैर में अभी भी गोली फंसी हुई है, जिसे आपरेशन के बाद निकाला जाएगा। घटना के बाद पुलिस अधीक्षक समेत राजस्थान पुलिस के बड़े अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए थे। उधर, मध्यप्रदेश पुलिस के रतलाम जिले समेत मध्यप्रदेश पुलिस के आला अधिकारियों से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने ऐसी किसी घटना से इनकार किया है।

क्या कहती है राजस्थान पुलिस
उदयपुर पुलिस के मुताबिक शुक्रवार देर रात को मादक पदार्थों की धरपकड़ को लेकर गोगुंदा हाईवे पर नाकाबंदी की गई थी। यह देख एक वाहन ने कुछ दूर पहले से ही यू-टर्न ले लिया। उसे रोकने का प्रयास किया तो संदिग्ध वाहन ने तेज गति पकड़ ली। पुलिस ने उस वाहन का पीछा किया तो उदयपुर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया। जैसे ही संदिग्ध वाहन के बगल में पुलिस की वैन पहुंची तो उसमें बैठे एक व्यक्ति ने फायरिंग कर दी। गोली पुलिस वाहन के दरवाजे को चीरते हुए उदयपुर पुलिस के कांस्टेबल के पैर में धंस गई। इसके बावजूद पीछा करना जारी रखा, साथ ही वायरलैस पर सूचना दे दी। इस पर चारों तरफ से अन्य पुलिस बल भी आ गया और संदिग्ध वाहन को घेर लिया। उस संदिग्ध वाहन में रतलाम के साइबर सेल में पदस्थ एसआई वीरेन्द्र सिंह बैठा था और निजी व्यक्ति का नाम दीपक अग्रवाल बताया गया।

एमपी पुलिस के एसआई ने बताई ये कहानी
-एसआई के मुताबिक रतलाम से दो सब इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबल एक बदमाश की तलाश में भीलवाड़ा जा रहे थे। बदमाश की लोकेशन के चलते रात को सभी उदयपुर रुक गए। रतलाम पुलिस ने उदयपुर के सूरजपोल थाने में आमद करवाई और थाना क्षेत्र में ही रुक गए।
-इस टीम का एक सब इंस्पेक्टर वीरेन्द्र सिंह, निजी व्यक्ति दीपक अग्रवाल के साथ किसी परिचित के मिलने का नाम लेकर पाली के लिए रवाना हुआ।
-दीपक के साथ निजी वाहन में वीरेन्द्र सिंह गोगुंदा हाईवे पर जा रहा था।
-उदयपुर पुलिस को एसआई वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि उन्हें नाकाबंदी नजर नहीं आई, वे GPS से रास्ते की लोकेशन देख रहे थे और उन्हें लगा कि वे गलत दिशा में जा रहे हैं। तभी उन्होंने यू-टर्न ले लिया।
-तभी एक गाड़ी उनका पीछा करने लगी तो उन्हें लगा कि कोई बदमाश होगा, तो एसआई ने अपनी सर्विस रिवाल्वर से फायरिंग कर दी।


कहानी में है ये झोल
एसआई ने जो कहानी सुनाई वो राजस्थान पुलिस के गले नहीं उतर रही है। क्योंकि संदिग्ध वाहन को पकड़ने के लिए गोगुंदा पुलिस ने पूरी स्पीड में पीछा किया 6 से 7 किलोमीटर दौड़ाया था। ऐसा संभव नहीं है कि उस गाड़ी में बैठे रतलाम एसआई को पता ही न चल सका हो कि उनका पीछा पुलिस कर रही है या बदमाश।

-गोगुंदा पुलिस ने वीरेन्द्र सिंह की निजी गाड़ी का पीछा सरकारी जीप से किया था, जिसमें सायरन भी बजता है और रोकने के लिए पुलिस माइक से बोलकर पुकारती भी है।
-जब एसआई ने फायरिंग की, तब उदयपुर पुलिस की वैन बिल्कुल बराबर में थी, तो एसआई वीरेन्द्र को पुलिस जीप और उसमें बैठे वर्दीधारी पुलिसकर्मी दिखाई दिए ही होंगे।

-रतलाम पुलिस का एसआई ऐसा क्या छुपाया था जो वह नहीं चाहता था कि उदयपुर पुलिस के हाथ लग जाए। जबकि उसके बाकी साथी उदयपुर सूरजपोल थाना क्षेत्र में ही ठहरे थे और वह ऑफिशियल ड्यूटी पर ही थे।

-उन्होंने बगैर नंबर प्लेट वाली गाड़ी क्यों ली। क्योंकि ऐसी ही गाड़ियां तस्करी में उपयोग की जाती है।

मुकदमा दर्ज
उदयपुर के एसपी कैलाशचंद्र विश्नोई के मुताबिक कांस्टेबल हंसराज मीणा के पैर में गोली लगी है। एसआई वीरेन्द्र सिंह और उसके सहयोगी के खिलाफ पुलिस पर फायरिंग करने का मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक पूछताछ में यही पता चला है कि घटना दुर्भाग्यवश हुई है। घटनाक्रम में रतलाम एसआई ने बताया है कि पहाड़ी, जंगल देखकर वे घबरा गए थे, उसे लगा कि पीछा कोई बदमाश कर रहा है, तो उसने फायरिंग कर दी। फिलहाल पुलिस पर फायरिंग करने के आरोप में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

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