हर व्यक्ति को अपने जीवन का निरीक्षण करना चाहिए

संगीतमय श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव का आयोजन

By: harinath dwivedi

Published: 30 Dec 2018, 05:44 PM IST

रतलाम . रामस्नेही भक्त मंडल द्वारा संगीतमय श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव का आयोजन गुरुदेव शंभूराम महाराज के सान्निध्य में स्वामी रामचरण महाराज के प्राकट्य महोत्सव अन्तर्गत में बाजना बस स्टंैड चौराहा स्थित जगदीश भवन पर किया जा रहा है। यहां पर कथा वाचक युवा रामस्नेही संत दिव्येशराम शनिवार को कथा में रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया। 30 दिसंबर को महाआरती के साथ कथा का विश्राम होगा। संतश्री ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन का निरीक्षण करते रहना चाहिए। जिस प्रकार साल भर में पढ़ाई के बाद विद्यार्थी का परीक्षा के परिणाम से परीक्षण होता है। हमें भी अपने जीवन की परीक्षा स्वयं करते रहना चाहिए। जिससे पता चलता रहे कि हम परिवार, समाज और धर्म के लिए क्या कर रहे है। हमें मन से विकार हटाना चाहिए। हम विकारों का चिंतन करते रहेंगें तो हमारा मन शुद्घ होने वाला नहीं है।


अच्छा दीजिए, अच्छा देखिए, पाप से डरिये
रतलाम. सुख की इच्छा सब को होती है, लेकिन प्राप्त किसी को नहीं होता है। सुखी रहने के तीन सूत्र है। दूसरों को अच्छा दीजिए, दूसरों में अच्छा देखिए और पाप से डरिए। कहने का मतलब ये है कि हम जानते सब है कि पाप किसमें है पुण्य किसमें है, लेकिन हम पाप के रास्ते पर ही खुशी-खुशी चलते हैं और पुण्य के रास्ते पर बेमन से मजबूरी में चलते हैं। यह विचार प्रवचन पूज्याश्री आराधनाश्री ने नीमचौक स्थानक की धर्मसभा में व्यक्त किए। कीर्तिसुधाश्री महाराज ने धर्मसभा में कहा कि भगवान महावीर स्वामी की अंतिम देशना उत्तराध्ययन सूत्र के 19वें अध्याय में कहा गया है कि जन्म का, मृत्यु का, बुढापे का, रोग का, शारीरिक, मानसिक पारिवारिक दु:ख है संसार की हर बात में दु:ख है।
महाराणा प्रताप जंगल में खाक छान रहे थे, एक बार वो भूख से इतने व्याकुल हुए की भिखारी से रोटी मांग ली, भिखारी ने भी दया दिखाते हुए उन्हें एक रोटी से दी, लेकिन महाराणा प्रताप के पुण्य का अभाव था की वह रोटी भी उनके हाथ से गिद्ध ले गया। वाह रे पुण्य जब पुण्य साथ नहीं देता है तो कोई साथ नहीं देता है। इस दुनिया में बुढ़ापा अपने आप में दु:ख है, बुढ़ापे से बड़ा दु:ख गरीबी है। गरीबी से भी बड़ा दुख पुत्र वियोग है, लेकिन पुत्र वियोग से भी बड़ा दु:ख भूख हैं। जहां एक मुखिया वहां सब सुखिया जहां अनेक मुखिया वहां सब दुखिया। धर्मसभा का संचालन गुणवंत मालवी ने किया। प्रतिदिन 09.15 से 10.15 बजे तक प्रवचन हो रहे हैं।

harinath dwivedi Editorial Incharge
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