आखिर ऐसा क्या हुआ, शहर विधायक को पार्टी पार्षदों ने ही लिखी पाती

आखिर ऐसा क्या हुआ, शहर विधायक को पार्टी पार्षदों ने ही लिखी पाती

Sachin Trivedi | Updated: 30 Apr 2018, 01:58:11 PM (IST) Ratlam, Madhya Pradesh, India

पार्षदों ने शहर विधायक को भेजा पत्र, विधायक ने कहा, चर्चा की जाएगी, विधि के जानकारों का मत, मई माह से निगम में गहराएगा वित्तीय संकट

रतलाम। नगर निगम के बजट की पुकार विधायक दरबार तक पहुंच गई है। पार्षदों ने शहर विधायक को पत्र भेजकर निगम के जिम्मेदारों को नींद से जगाने के लिए दखल की मांग की है। विधायक ने आश्वस्त कराया है कि मामले में वे महापौर-अध्यक्ष से चर्चा करेंगे। वहीं, बजट का अभाव का परिणाम मई माह में निगम का वित्तीय संकट और गहरा देगा।

साढ़े चार अरब रुपए से ज्यादा का वित्तीय बजट महापौर परिषद (एमआईसी) से अनुमोदित कराने के एक माह के बाद भी निगम परिषद के बजट सम्मेलन पर छाए बादल नहीं हट रहे है। निगम अध्यक्ष अशोक पोरवाल ने सोमवार तक फैसला होने की बात कही है तो महापौर डॉ. सुनीता यार्दे अपने पूर्व के बयान पर कायम रहते हुए अपनी स्वीकृति को दोहरा रही है। बजट सम्मेलन की तारीख तय नहीं होने और एजेंडा जारी करने में नाकामी को कांग्रेस ने मुद्दा बनाया है तो सत्तापक्ष के पार्षद भी लामबंद हो गए है। भाजपा के पार्षदों ने अब मामले में राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष और शहर विधायक चेतन्य काश्यप से दखल की मांग कर दी है। इस संबंध में पार्षदों ने विधायक को पत्र भी भेजा है। इस पत्र के बाद विधायक ने चर्चा करने का आश्वासन दे दिया है।

वेतन मिलेगा, भत्तों पर रहेगी संशय की स्थिति
एमआईसी से अनुमोदित बजट के चलते मई माह में सामान्य वेतन आहरण तो जारी रहेगा, लेकिन भत्तों सहित अन्य मदों के खर्च की अनुमति पर संशय खड़ा हो गया है। विधि के जानकारों की माने तो निगम परिषद हर तरह की अनुमति प्रदान करती है। इसमें आय-व्यय के साथ ही नियमित मद के खर्च और भत्तों इत्यादि की पात्रता शामिल है। नए वित्त वर्ष में इनको जारी रखने के लिए निगम परिषद का अनुमोदन जरूरी होता है।

एमआईसी से अनुमोदित दो प्रस्तावों पर सहमति नहीं
बजट में देरी का कारण अहम का टकराव माना जा रहा है। एमआईसी में ईको फ्रेंडली श्मशान और एक चयनित स्थल को लेकर विरोधाभास है। इस पर पार्षदों एवं महापौर परिषद के सदस्यों के बीच भी सहमति नहीं बन पाई है। इस पर सहमति के लिए भाजपा संगठन तक मामला पहुंचा है, लेकिन अब तक ठोस वैकल्पिक सुलह नहीं हो पाई है। हालांकि संगठन की पहल पर मामले को लेकर सभी पक्ष आपस में चर्चा कर रहे है।

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