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पत्रिका खबर खास: गर्मियों से पहले कहीं पहरा तो कहीं संवाद धमकी भरा

उज्जैन-देवास में शिप्रा नदी तो शुजालपुर-सुसनेर में बांध के पानी पर विवाद

 

रतलाम

Published: March 04, 2022 09:07:18 pm

सचिन त्रिवेदी, उज्जैन/रतलाम.
मालवा में होली दहन के साथ ही गर्मियों की तपन अपना असर दिखाने लगेगी। तापमान की गति ने अपनी चाल भी बढ़ा दी है, संभावना है कि आगामी दिनों में सर्दियों की विदाई का वक्त आ जाएगा और एक नई चुनौती भी दस्तक देगी। दरअसल, हर वर्ष मालवा के अहम जिलों में नदियों सहित बांधों के पानी को लेकर विवाद के हालात सामने आने लगते हैं। विशेषकर सिंचाई अवधि के दौरान पेयजल के लिए संग्रहित पानी के वैध और अवैध उपयोग के मामलों के चलते स्थानीय समितियां, निकाय और जल संसाधन विभाग आमने-सामने होते हैं। इस वर्ष भी गर्मियों की शुरुआत के साथ उज्जैन, देवास, शाजापुर में पानी पर मोलभाव हो रहा है तो रतलाम और मंदसौर मेें भी मांग असर दिखा रही है।

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ठंडे पानी पर गर्मियों का उबाल, तैनात करना पड़ रहे रखवाल

केस 01: शाजापुर जिले के सुसनेर क्षेत्र में कीटखेड़ी बांध से करीब 400 से 500 किसान सीधे तौर पर जुड़े हुए है। बांध में एकत्रित पानी का सिंचाई के लिए उपयोग करने के दौरान अवैध उपयोग की शिकायत सामने आ गई है, यहां जल संसाधन विभाग ने इसे लेकर पुलिस से हस्तक्षेप की मांग करते हुए बांध के पानी की रखवाली का दल तैनात कर दिया है। एसडीओ जल संसाधन मुकेश मीणा की माने तो बड़ी मात्रा में बांध की नहरों के पानी की चोरी के कारण वास्तविक किसानों तक पर्याप्त पानी ही नहीं पहुंचा पा रहा है।

केस 02: शुजालपुर नगर में नेवज नदी पर बामनघाट बैराज बना है, इससे नगर की पेयजल आपूर्ति होती है, लेकिन बैराज का पानी अवैध तौर पर उपयोग करने से हालात गहरा रहे है। नगर पालिका की मांग पर बैराज क्षेत्र में पानी निगरानी के लिए पेट्रोलिंग दल तक लगा दिया गया है। एसडीएम के एक पत्र पर कलेक्टर ने निगरानी तंत्र सक्रिय किया है। नगर पालिका के इंजीनियर राहुल गुप्ता बताते हैं कि अभी नगर मेंं 2 दिन छोड़कर पेयजल दिया जा रहा है, यदि पानी का अवैध उपयोग नहीं रूका तो आगामी हालात गहराएंगे।

केस 03: देवास में शहर को पेयजल आपूर्ति का बड़ा स्रोत शिप्रा नदी बैराज है। कुछ दिन पहले जल संसाधन विभाग ने नगर निगम से बकाया राशि जमा नहीं कराने का हवाला देकर संग्रहित पानी की अगली किस्त जारी करने से ही इनकार कर दिया था। इसी दौरान पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए निकाय तंत्र अचानक जागा और विभागीय अधिकारियों के साथ अनुबंध पर चर्चा कर राशि अदायगी पर बात की गई। यह शुरुआत है, जानकारों की माने तो आगामी दिनों मेंं पेयजल मांग बढऩे पर नियमित लेना असल परीक्षा होगी।

फ्लैश बैक में.....अनुबंध की आंच से भी पानी में गर्माहट
01....मंदसौर जिले मेंं गांधीसागर बांध तीन जिलों रतलाम, मंदसौर और नीमच तक धरती की प्यास बुझाता है, साथ ही कंठों को भी तर करता है। बांध से प्राथमिक तौर पर सिंचाई का पानी देना अनुबंध की पहली शर्त है, लेकिन बांध तंत्र और निकायों के बीच बने मसौदे में पेयजल आपूर्ति के लिए भी पानी दिया जाना है। ऐसे में मौसमी मांग अनुसार सिंचाई के पानी की मांग तेज होने पर बांध से पेयजल का पानी या बिजली का उत्पादन दूसरी प्राथमिकता में लिया जाता है, इसे लेकर बीते वर्षो के दौरान गर्माहट भी सामने आई थी।
02...रतलाम शहर को पेयजल देने वाल धोलावाड़ बांध का निर्माण भी मूलत: सिंचाई था, लेकिन शहरी मांग के चलते यह पेयजल आपूर्ति का स्रोत बन गया है। नगर पालिका सालाना अनुबंध के आधार पर बांध से पेयजल का पानी प्राप्त करती है, लेकिन लंबी दूरी के कारण गर्मियों के दौरान अवैध उपयोग के मामले सामने आते हैं। ऐसे मेंं नगर पालिका अपना एक विशेष दल बनाकर रास्तेभर निगरानी करती है तो पुलिस की मदद लेकर रखवाली भी करानी पड़ती है। कई बार तो पेयजल लाइन ही क्षतिग्रस्त भी कर दी जाती है।

क्षमता में वृद्धि नहीं करना बड़ा कारण
जल संसाधन विभाग के अफसरों की माने तो ज्यादातर बांध स्थलों पर संग्रहण क्षमता कम है, ये वर्तमान हालातों में पर्याप्त नहीं कही जा सकती। ऐसे में पेयजल की मांग बढऩे पर क्षमता कम होने से विपरित हालात खड़े हो जाते है। शुजालपुर में बामनघाट बैराज की क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव एक वर्ष से लंबित पड़ा हुआ है। रतलाम जिले में गांधीसागर बांध की नहर से जुड़ा कार्य भी कई जगह धीमा है तो अन्य स्रोत की तलाश के लिए जिम्मेदार गंभीर नहीं है। उज्जैन में भी खान नदी का गंदा पानी शिप्रा को प्रभावित करता है।

गर्मियों से पहले पर्याप्त व्यवस्था
संभाग में सभी निकायों को पेयजल संबंधी कार्ययोजना अनुसार सभी तैयारी के लिए कहा गया है, उपलब्ध संसाधनों और मांग आदि का आकलन कर व्यवस्था के निर्देश दिए है, सिंचाई एवं पेयजल दोनों ही अहम है, स्थानीय स्तर पर तय प्रावधान अनुसार पानी का उपयोग किया जाएगा। बिना अनुमति पानी के उपयोग जैसे घटनाक्रम रोकने कार्रवाई की जाएगी। - संदीप यादव, संभागायुक्त उज्जैन

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