प्रधानमंत्री आवास योजना में किए गए घोटाले की जांच पुलिस के बजाए सीआईडी या एसआईटी करे

प्रधानमंत्री आवास योजना में किए गए घोटाले की जांच पुलिस के बजाए सीआईडी या एसआईटी करे

Sourabh Pathak | Publish: Apr, 17 2019 11:19:04 AM (IST) Ratlam, Ratlam, Madhya Pradesh, India

प्रधानमंत्री आवास योजना में किए गए घोटाले की जांच पुलिस के बजाए सीआईडी या एसआईटी करे

रतलाम। प्रधानमंत्री आवास योजना में किए गए घोटाले की जांच पुलिस के बजाए सीआईडी या एसआईटी से कराई जाए। इसके साथ ही मामले में नगर निगम के सभी अधिकारियों को दोषी बनाए जाए क्योकि इन सभी के माध्यम से मिल जुलकर घोटाले को अंजाम दिया गया है। ये आरोप मामले में आरोपी बनाई गई ममता श्रीवास्तव की और से उनके अभिभाषक अमित पांचाल द्वारा जारी किए गए प्रेस नोट के माध्यम से लगाए गए है।

 

पांचाल ने बताया कि ममता की ओर से पुलिस महानिदेशक भोपाल ईओडब्ल्यू, मुख्यमंत्री भोपाल को शिकायत कर घोटाले के वास्तविक आरोपियों को बचाने का प्रयास किए जाने व इसकी जांच सीआईडी या एस आईटी गठित कर करवाई जाने का निवेदन किया है। नगर पालिक निगम रतलाम के कार्यपालन यंत्री सुरेश चंद्र व्यास ने खुद को बचाने के लिए एफ आईआर में से अपनी जिम्मेदारी छुपा ली, जिस फर्जी सूची के आधार पर नगर पालिक निगम रतलाम से फर्जी हितग्राहियों को राशि का भुगतान हुआ उस पर सुहास पंडित, एमके जैन, दीपक कुमावत, राजकुमार सिंह और सुरेश चंद्र व्यास के भी हस्ताक्षर हैं। इस सूची को व्यास ने एफ आईआर करवाते समय छुपाया था।

 

इतनी प्रक्रिया के बाद जारी होती है राशि
पीडि़ता के अभिभाषक ने बताया कि व्यास द्वारा थाना प्रभारी स्टेशन रोड के पत्र के जवाब में एक पत्र जारी कर बताया गया कि हितग्राहियों के बैंक खाते का विवरण दर्शाने वाली सूची पर सेडमेप, एजिस व्दारा हस्ताक्षर के बाद भुगतान की कार्यवाही के लिए सूची निगम के उपयंत्री को दी जाती है। उपयंत्री परीक्षण के बाद प्रभारी सहायक उपयंत्री को देता है। यहां परीक्षण के बाद कार्यपालन यंत्री को दी जाती है, उसके व्दारा आयुक्त को सूची भेजी जाती है।

 

आयुक्त से जाती लेखा विभाग
आयुक्त लेखा विभाग को सूची भेजता है, लेखा विभाग से फिर आयुक्त को सूची भेजी जाती है, आयुक्त व्दारा ऑडिट को सूची भेजी जाती है, इसके बाद लेखा विभाग व ऑडिट विभाग के अनुमोदन के बाद आयुक्त व्दारा ऑनलाइन अनुदान की राशि हितग्राही के बैंक खाते में ट्रांसफ र की जाती है। योजना के हितग्राहियों को राशि के भुगतान के लिए इन प्रक्रियाओं से गुजरना होता है।

 

एक ही दिन में पूरी कर ली प्रक्रिया
फ र्जी नामों वाली सूची अन्य सूचियों के साथ 25 मई 2018 को सुरेशचन्द्र व्यास के हस्ताक्षर से भुगतान के लिए भेजी गई थी। नगर पालिक निगम व्दारा इस सूची के साथ भेजी गई अन्य सूचियों के आधार पर नोटशीट लिखी गई थी। नोटशीट के अनुसार इसी दिन इसे लेखा विभाग को भेजा गया था। उसके बाद इसी दिन ऑडिट में भेजा गया।

 

भुगतान की कर दी अनुशंसा
इतना ही नहीं इसी दिन अन्य हितग्राहियों के साथ आयुक्त एसके सिंह ने हितग्राहियों को एक करोड़ 47 लाख रुपए के भुगतान की अनुशंसा कर दी। एक ही दिन में इतनी बड़ी राशि के भुगतान की अनुशंसा बगैर किसी जांच-परीक्षण के किया जाना आयुक्त और सुरेशचंद्र व्यास, लेखा विभाग, ऑडिट विभाग के अधिकारियों को भी इस घोटाले में आरोपी बनाता है।

 

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