मध्यप्रदेश के इस जिले मेंं एसआइटी करेगी बड़ी जांच

मध्यप्रदेश के इस जिले मेंं एसआइटी करेगी बड़ी जांच

Sachin Trivedi | Updated: 17 Aug 2018, 02:21:25 PM (IST) Ratlam, Madhya Pradesh, India

मध्यप्रदेश के इस जिले मेंं एसआइटी करेगी बड़ी जांच

रतलाम. प्रदेश में अपनी व्यवस्था से एक अलग पहचान बनाने वाले एसपी गौरव तिवारी ने अब रतलाम मे हुए करोड़ों के राशन घोटाले की जांच पर अपनी नजर लगा दी है। तिवारी ने इस जांच की धीमी गति को तेज करने के लिए एसआइटी का गठन कर दिया है। एसआइटी की जांच में कई बड़े नाम सामने आ सकते है। विशेषकर वे अफसर नपेंगे जो किसी कारण से जांच से दूर हो गए है। वहीं, फरार ठेकेदार पर भी इमान घोषित करने के बाद जांच दल सरगर्मी से तलाश करेगा।

 

शहर में हुए दस करोड़ के राशन घोटाले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए एसपी गौरव तिवारी ने एसआइटी का गठन किया है। इसके साथ ही मामले में फरार चल रहे ठेकेदार व नगर निगम के तत्कालीन स्वास्थ्य निरीक्षक की गिरफ्तारी के लिए दस हजार का ईनाम भी घोषित कर दिया है। मामले की जांच के लिए एसआइटी में पांच सदस्यों को शामिल किया गया है, जो जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी करने के साथ मामले में बच रहे आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाएगी। पहली बार इस तरह की एसआईटी बनी है। एसआईटी का गठन होने की सूचना राशन माफियाओं तक पहुंचने के बाद अब उनके होश उड़ गए है। एक बार फिर से फाइलों के पन्ने पलटने से इस मामले में अब तक पुलिस से बच रहे कुछ अन्य लोग भी जांच के घेरे में आने के साथ ही कार्रवाई के दायरे में आ सकते है। पुलिस की माने तो इस मामले में अब तक अधिकारी, दुकानदार व सेल्समेन सहित करीब 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। शेष बचे लोगों को जल्द वह पकड़ लेगी। एसपी द्वारा गठित दल में स्टेशन रोड थाना प्रभारी राजेंद्र वर्मा, एसआई अय्युब खान, प्रधान आरक्षक मोहम्मद युसुफ, आरक्षक हिम्मत सिंह व मनोज पांडे को शामिल किया गया है।

इन पर घोषित किया इनाम
मामले में फरार चल रहे नगर निगम द्वारा नियुक्त तत्कालीन ठेकेदार यशवंत गंग व नगर निगम के तत्कालीन स्वास्थ्य निरीक्षक रविंद्र ठक्कर एफआईआर के बाद से फरार चल रहे है। इन दोनों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने दस हजार रुपए का ईनाम घोषित कर दिया है। एेसे में अब उम्मीद जताई जा रही है कि ये लोग एसआईटी के हाथ से ज्यादा समय तक बचकर नहीं भाग सकेंगे।

सात माह पहले हुई थी एफआइआर
शहर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ लेने वाले 45 हजार से ज्यादा परिवारों के सत्यापन के दौरान फर्जी एवं अपात्र लोगों के नाम से राशन वितरण करना सामने आया था। मामले की जांच तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर अनिल भाना व टीम ने किया था। इसमें करीब 9 करोड़ 80 लाख रुपए के राशन का हर गबन किए जाने की बात का खुलासा हुआ था। जिसके बाद 9 जनवरी 2018 को स्टेशन रोड थाने पर पांच अधिकारी व एक ठेकेदार सहित दुकान संचालकों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

जांच के बाद आठ माह लगे थे केस दर्ज होने में
तत्कालीन कलेक्टर बी. चंद्रशेखर ने मार्च 2017 में पहली बार राशन दुकान पर छापामार कार्रवाई कर घोटाला उजागर किया था। उसके बाद जांच दल गठित कर 26 अप्रैल 2017 से इन आठ दुकानों की जांच कराई गई थी, जहां हर दुकान में गड़बड़ी उजागर हुई थी। शहर में 45 हजार 816 परिवारों को खाद्य विभाग से जारी की थी खाद्यान्न पर्ची। शुरुआती जांच में अधनियम वाले 26 हजार 813 परिवारों का ब्यौरा नहीं मिला। हर माह शहर में 10 लाख किलो से ज्यादा खाद्यान्न का किया जा रहा था वितरण।

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