निजी स्कूल पांच साल पहले नहीं बदल पाएंगे बच्चों की यूनिफार्म

निजी स्कूल पांच साल पहले नहीं बदल पाएंगे बच्चों की यूनिफार्म

harinath dwivedi | Publish: Jul, 13 2018 04:57:33 PM (IST) | Updated: Jul, 13 2018 05:06:24 PM (IST) Ratlam, Madhya Pradesh, India

निजी स्कूल पांच साल पहले नहीं बदल पाएंगे बच्चों की यूनिफार्म

अभिभावकों पर हर साल अनावश्यक बोझ डालने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए तय किए नियम, कड़ाई से लागू होगा
रतलाम. आपका बच्चा किसी निजी स्कूल में पढ़ रहा है और हर दो या तीन में साल यूनिफार्म बदलकर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है तो अब ऐसा नहीं होगा। सरकार ने निजी विद्यालय नियम 2018 में तय कर दिया है कि जिस साल यूनिफार्म बदली गई है उसे उस तारीख से अगले पांच साल तक बदला नहीं जाएगा। यही नहीं अब अभिभावकों से कोई भी स्कूल फीस की नकद राशि प्राप्त नहीं कर पाएगा। उसे स्कूल के खाते में ही राशि जमा करवाना होगी।

10 फीसदी से ज्यादा फीस बढ़ोतरी नहीं
निजी स्कूलों के लिए नियम में यह भी तय कर दिया गया है कि वे पिछले साल के मुकाबले नए सत्र में ली जाने वाली फीस में बढ़ोतरी 10 फीसदी से ज्यादा नहीं कर सकते हैं। इसकी जानकारी भी जिला शिक्षा अधिकारी को देना होगी। यदि जिलास्तरीय समिति द्वारा यह पाया जाता है कि निजी स्कूल ने इस नियम का उल्लंघन किया है और फीस ज्यादा बढ़ा दी है तो उसे इसका एडजस्टमेंट आगामी तीन माहों में करना ही होगा।

एडवांस फीस भी नहीं ले सकते
निजी स्कूलों के लिए तय किए गए नियमों में यह भी तय कर दिया गया कि कोई भी स्कूल वार्षिक एडवांस फीस नहीं ले सकता है। किसी अभिभावक से यह फीस ली जाती है और इसकी शिकायत या जानकारी शिक्षा विभाग को मिलती है तो स्कूल प्रबंधन को यह अतिरिक्त राशि 30 दिन के भीतर अभिभावक को वापस करना होगी। ऐसा नहीं करने की दशा में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

नए नियमों में यह भी है खास बिंदु
- तीन साल का हिसाब देना होगा - निजी स्कूल प्रबंधन को नया नियम लागू होने के बाद अपने यहां की आय-व्यय के तीन हिसाब जिला समिति को देना होगा। इन तीन सालों में 2014-15 से लेकर 2016-17 तक का होगा। साथ ही 2018-19 के खर्चों का प्रोविजनल प्रमाण पत्र भी देना होगा।

- लग सकता है जुर्माना - किसी भी स्कूल की शिकायत जिला समिति तक पहुंचती है और यदि सही पाई जाती है तो उस स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जुर्माना किया जाएगा। पहली बार में दो लाख, दूसरी में चार लाख और तीसरी बार में यह शिकायत सही पाए जाने पर छह लाख रुपए का जुर्मा्र लगा सकते हैं।
- समिति को निरीक्षण का अधिकार - कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिलास्तरीय समिति होगी और इसे स्कूल निरीक्षण का अधिकार होगा। इसके सचिव जिला सिक्षा अधिकारी होंगे। समिति की अपील आयुक्त लोक शिक्षण की अध्यक्षता में बनी समिति को होगी। इससे संतुष्ट नहीं होने पर स्कूल प्रबंधन हाईकोर्ट में जा सकेगा।

- पांच माह पहले फीस घोषित करना होगी - निजी स्कूल संचालकों को शैक्षणिक सत्र शुरू होने के पांच माह यानि 150 दिन पहले अपने स्कूल की फीस घोषित करना होगी। इसे स्ट्रक्चर पोर्टल पर अपलोड करते हुए जिला शिक्षङा अधिकारी को भी इसकी एक-एक कापी दना अनिवार्य होगी जिसका वे परीक्षण करेंगे।

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