खुलासाः बिजनेसमैन के साथ तीन करोड़ रुपए वसूलने गया था सब इंस्पेक्टर, बीच में हो गई फायरिंग

खुलासाः बिजनेसमैन के साथ तीन करोड़ रुपए वसूलने गया था सब इंस्पेक्टर, बीच में हो गई फायरिंग

Manish Geete | Publish: Apr, 10 2019 06:43:49 PM (IST) Ratlam, Ratlam, Madhya Pradesh, India

खुलासाः बिजनेसमैन के साथ तीन करोड़ रुपए वसूलने गया था सब इंस्पेक्टर, बीच में हो गई फायरिंग

रतलाम/उदयपुर। राजस्थान पुलिस पर फायरिंग करने के मामले में उदयपुर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक रतलाम पुलिस का सब इंस्पेक्टर एक व्यवसायी के साथ सट्टे के तीन करोड़ रुपए वसूलने जा रहा था। इसी बीच फायरिंग की घटना को अंजाम दिया गया।

उदयपुर में पुलिस नाकाबंदी देख कार को यूटर्न कर गलत दिशा में दौड़ाने और पुलिस पर फायरिंग करने वाले मध्यप्रदेश के सब इंस्पेक्टर विरेन्द्र बंदवाल और सर्राफा व्यवसायी दीपक अग्रवाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के दस दिन तक एमबी चिकित्सालय में इलाज के बाद डिस्चार्ज होते ही पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ कि एसआई पिस्टल लेकर अवैध रूप से सर्राफा व्यवसायी के लिए तीन करोड़ रुपए की वसूली के लिए पाली जिले के फालना जा रहा था।

 

पुलिस अधीक्षक कैलाशचन्द्र विश्नोई ने बताया कि गत 30 मार्च को मध्यप्रदेश के रतलाम में तैनात एसआई विरेन्द्र बंदवाल अपने साथी एसआई अमित शर्मा व आठ कांस्टेबलों के साथ उदयपुर पहुंचा था। एसआई और जाब्ते ने उसी दिन रात 11 बजे सूरजपोल थाने में आमद कराते हुए हथियार जमा करवाए थे और उसके बाद सभी होटल में ठहरने चले गए। लेकिन देर रात एसआई बंदवाल अपने साथियों को खाना खाने का बहाना बनाकर होटल से निकल गया। बाहर आकर वह रतलाम के सर्राफा व्यवसायी दीपक अग्रवाल के साथ एक अन्य कार से अवैध वसूली के लिए फालना के लिए रवाना हो गया। इसवाल के निकट नाकाबंदी देख भांडा फूटने के डर से उन्होंने यूटर्न लेकर गलत दिशा में कार दौड़ा दी। पकड़ में आने के बाद आरोपित ने खूब गुमराह किया, लेकिन एमपी व राजस्थान की पुलिस ने मामले का खुलासा कर दिया।

 

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कांस्टेबल के पैर में धंसी थी गोली
घायल कांस्टेबल हंसराज को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसके पैर में गोली धंस गई थी।

 

क्या कहा था राजस्थान पुलिस ने
उदयपुर पुलिस ने घटा के बाद कहा था कि मादक पदार्थों की धरपकड़ को लेकर गोगुंदा हाईवे पर नाकाबंदी की गई थी। यह देख एक वाहन ने कुछ दूर पहले से ही यू-टर्न ले लिया। उसे रोकने का प्रयास किया तो संदिग्ध वाहन ने तेज गति पकड़ ली। पुलिस ने उस वाहन का पीछा किया तो उदयपुर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया। जैसे ही संदिग्ध वाहन के बगल में पुलिस की वैन पहुंची तो उसमें बैठे एक व्यक्ति ने फायरिंग कर दी। इसके बावजूद पीछा करना जारी रखा, साथ ही वायरलैस पर सूचना दे दी। इस पर चारों तरफ से अन्य पुलिस बल भी आ गया और संदिग्ध वाहन को घेर लिया। उस संदिग्ध वाहन में रतलाम के साइबर सेल में पदस्थ एसआई वीरेन्द्र सिंह बैठा था और निजी व्यक्ति का नाम दीपक अग्रवाल बताया गया था।

 

एमपी पुलिस के एसआई ने बताई थी ये कहानी
-एसआई के मुताबिक रतलाम से दो सब इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबल एक बदमाश की तलाश में भीलवाड़ा जा रहे थे। बदमाश की लोकेशन के चलते रात को सभी उदयपुर रुक गए। रतलाम पुलिस ने उदयपुर के सूरजपोल थाने में आमद करवाई और थाना क्षेत्र में ही रुक गए।
-इस टीम का एक सब इंस्पेक्टर वीरेन्द्र सिंह, निजी व्यक्ति दीपक अग्रवाल के साथ किसी परिचित के मिलने का नाम लेकर पाली के लिए रवाना हुआ।
-दीपक के साथ निजी वाहन में वीरेन्द्र सिंह गोगुंदा हाईवे पर जा रहा था।
-उदयपुर पुलिस को एसआई वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि उन्हें नाकाबंदी नजर नहीं आई, वे GPS से रास्ते की लोकेशन देख रहे थे और उन्हें लगा कि वे गलत दिशा में जा रहे हैं। तभी उन्होंने यू-टर्न ले लिया।
-तभी एक गाड़ी उनका पीछा करने लगी तो उन्हें लगा कि कोई बदमाश होगा, तो एसआई ने अपनी सर्विस रिवाल्वर से फायरिंग कर दी।

 

कहानी में यह था झोल
एसआई ने जो कहानी सुनाई वो राजस्थान पुलिस के गले नहीं उतर रही है। क्योंकि संदिग्ध वाहन को पकड़ने के लिए गोगुंदा पुलिस ने पूरी स्पीड में पीछा किया 6 से 7 किलोमीटर दौड़ाया था। ऐसा संभव नहीं है कि उस गाड़ी में बैठे रतलाम एसआई को पता ही न चल सका हो कि उनका पीछा पुलिस कर रही है या बदमाश।

-गोगुंदा पुलिस ने वीरेन्द्र सिंह की निजी गाड़ी का पीछा सरकारी जीप से किया था, जिसमें सायरन भी बजता है और रोकने के लिए पुलिस माइक से बोलकर पुकारती भी है।
-जब एसआई ने फायरिंग की, तब उदयपुर पुलिस की वैन बिल्कुल बराबर में थी, तो एसआई वीरेन्द्र को पुलिस जीप और उसमें बैठे वर्दीधारी पुलिसकर्मी दिखाई दिए ही होंगे।

-रतलाम पुलिस का एसआई ऐसा क्या छुपाया था जो वह नहीं चाहता था कि उदयपुर पुलिस के हाथ लग जाए। जबकि उसके बाकी साथी उदयपुर सूरजपोल थाना क्षेत्र में ही ठहरे थे और वह ऑफिशियल ड्यूटी पर ही थे।

-उन्होंने बगैर नंबर प्लेट वाली गाड़ी क्यों ली। क्योंकि ऐसी ही गाड़ियां तस्करी में उपयोग की जाती है।

मुकदमा दर्ज
उदयपुर के एसपी कैलाशचंद्र विश्नोई के मुताबिक कांस्टेबल हंसराज मीणा के पैर में गोली लगी है। एसआई वीरेन्द्र सिंह और उसके सहयोगी के खिलाफ पुलिस पर फायरिंग करने का मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक पूछताछ में यही पता चला है कि घटना दुर्भाग्यवश हुई है। घटनाक्रम में रतलाम एसआई ने बताया है कि पहाड़ी, जंगल देखकर वे घबरा गए थे, उसे लगा कि पीछा कोई बदमाश कर रहा है, तो उसने फायरिंग कर दी। फिलहाल पुलिस पर फायरिंग करने के आरोप में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

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