व्यापारी कर रहे मनमानी, उनपर करो कार्रवाई

किसानों ने दिया तुलावटियों के लिए ज्ञापन, कार्यमुक्त किए तुलावटियों को पुन: काम पर रखने की मांग

By: harinath dwivedi

Published: 18 Dec 2018, 05:19 PM IST

रतलाम। नामली उप मंडी में गत दिवस हुए तुलावटी और व्यापारियों के विवाद के बाद, नीलामी कार्य प्रभावित होते देख प्रशासन ने तुलावटियों को कार्यमुक्त कर दिया था। इसके बाद नीलामी कार्य शुरू हुआ। सोमवार को कार्यमुक्त तुलावटियों के पक्ष में किसानों ने आकर मंडी सचिव को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि किसानों के हित में तुलावटियों का बोलना गलत है क्या? व्यापारी मंडी में मनमानी कर रहे हैं। उन पर क्यों मंडी प्रशासन कार्यवाही नहीं कर रहा। तुलावटियों को मंडी में पुन: कार्य पर लिया जाए, नहीं तो किसान मंडी गेट बंद कर विरोध में उतर आएंगे। मंडी सचिव ने किसानों को समझाईश देते हुए कहा कि तुलावटियों को कार्यमुक्त किया है, जांच की जा रही है। व्यापारियों से चर्चा कर शीघ्र ही समाधान निकाला जाएगा।
सचिव से बात कर कहा, तुलावटियों की कोई गलती नहीं
मंडी सचिव को ज्ञापन सौंपते हुए कृषक यशवंत कुमावत, ओंकारलाल जाट, रामचंद्र शर्मा, राधेश्याम जाट, छगनलाल शर्मा, गेंदालाल, भेरूलाल, विरमसिंह देवड़ा ने बताया कि हमारे द्वारा नमली उप मंडी में उपज विक्रय के लिए लाई गई थी। जो नीलामी के माध्यम से विक्रय की गई। लेकिन तौल में अनियमितता की गई। तौल में निर्धारित वजन से अधिक ज्यादा उपज ली गई, जिसका हमारे द्वारा तुलावटियों योगेंद्रसिंह सोनगरा व दवे के समक्ष विरोध किया। इस पर तुलावटियों द्वारा जब हमारा पक्ष लिया गया तो व्यापारियों ने आरोप लगाकर, इन्हे बंद करवा दिया। इन पर लगाए गए आरोप गलत है और निराधार है। इन्हे काम पर पुन: लिया जाए।
मंडी सचिव के समक्ष लगाए आरोप
- मंडी के बाहर व्यापारियों के गोडाउन पर ट्रालियों तौली जा रही है।
- मंडी 300 से 500 ग्राम तक वजन किसान का कटवा रहा।
- मंडी 50 हजार रुपए तक नगद राशि का भुगतान नहीं कर रहा।
- बगैर लायसेंस के व्यापारी के यहां अन्य व्यापार कर रहे हैं रोका जाए।
- तलवार लेकर व्यापारी पहुंचते मंडी प्रांगण में, करते दादागिरी।
जांच चल रही है...
मंडी प्रशासन मामले की जांच कर रहा है, तुलावटियों को केवल कार्यमुक्त किया है, निकाला नहीं है। व्यापारियों से चर्चा कर मामले में शीघ्र ही समधान निकाला जाएगा।
- एमएल बारसे, सचिव मंडी समिति रतलाम

harinath dwivedi Editorial Incharge
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