पूरे शहर में अस्वच्छता, चौराहों पर न डस्टबिन, न ही सफाई

सर्वेक्षण की तारीख फिलहाल तय नहीं किंतु अनुमानित तारीख ४ से ३१ जनवरी के बीच होना है सर्वे

By: Chandraprakash Sharma

Updated: 19 Jan 2019, 05:26 PM IST

रतलाम। देशभर के शहरों में स्वच्छता की प्रतियोगिता के लिए होने वाले स्वच्छता सर्वे 31 जनवरी के पहले किया जाना है। रतलाम नगर निगम ने भी अपने कर्मचारियों की फौज झोंकने का दावा किया है किंतु इसकी मैदानी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। न चौराहों पर सूखे-गीले कचरे के लिए डस्टबीन लगी है और न ही ट्रेचिंग ग्राउंड पर ही इन्हें अलग-अलग करने के लिए कोई सिस्टम तय है। शहर से एकत्रित कचरे को ट्रेचिंग ग्राउंड पर ले जाया जा रहा है और जहां कचरा मैजिक चालक डाल देता है वहीं पर सही मान लिया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि स्वच्छता सर्वे के लिए पूरी तैयारी की जा चुकी है।
चार बिंदुओं से तय होगी रेटिंग
रेंकिंग चार बिंदुओं से तय होगी। इसमें हर एक सेगमेंट के १२५०-१२५० अंक तय किए गए हैं। खास बात यह है कि शहर के नागरिकों से फीडबैक के भी अंक तय है। इसमें स्वच्छता की टीम दूरभाष पर शहरवासियों से फीडबैक लेगी और इसी आधार पर अंक भी देगी। इसके लिए 850 अंक निर्धारित है। शहर के लोगों का फीडबैक गलत जाता है तो सीधा सा नुकसान नगर निगम को स्वच्छता रैंङ्क्षकंग में उठाना पड़ सकता है। इस समय शहर में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं होने से लोगों का आक्रोश है।
सवालों से होगा बेड़ापार
स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू होने के दौरान टीमें शहर में जमीनी हकीकत तो देखेगी ही एक टीम नई दिल्ली से शहर की आम जनता से भी स्वच्छता से जुड़े सवाल करेगी। लोगों का जवाब नगर निगम के पक्ष में यानि ज्यादा से ज्यादा लोगों का जवाब सही जाता है तो निश्चित रूप से अंक अच्छे मिलेंगे लेकिन गलत जाता है तो रतलाम नगर निगम की स्वच्छता की रेटिंग पिछले साल (७१वां नंबर) के मुकाबले और गिर सकती है। इसके गिरने की एक बड़ी वजह भी सामने आई है। यहां के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच तालमेल का अभाव है। महापौर डॉ. सुनीता यार्दे पहले ही कह चुकी है कि निगम का कोई अधिकारी उन्हें स्वच्छता की तैयारियों, व्यवस्थाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहा है। ऐसे में समझा जा सकता है कि स्वच्छता की रेटिंग कहां पहुंचेगी।

ये हैं सात सवाल पूछेगी टीम और इनकी हकीकत
सवाल - क्या आपको कचरा डालने के लिए आसानी से वाणिज्य और सार्वजनिक क्षेत्रों में डस्टबिन मिल जाते हैं।
हकीकत - शहर के किसी भी चौराहे या सार्वजनिक स्थान पर कोई डस्टबीन नहीं लगी है। यही नहीं कचरा अड्डे से कचरा समय पर नहीं उठ पा रहा है।
सवाल - क्या आपको पता है कि आपका शहर स्वच्छता सर्वेक्षण में भाग ले रहा है।
हकीकत - ज्यादातर लोग सफाई को लेकर नाराज है और निगम ने इतना प्रचार नहीं किया कि स्वच्छता सर्वेक्षण के बारे में आम जनता को पता चल सके।
सवाल - क्या आप सफाई व्यवस्था से संतुष्ट हैं।
हकीकत - इसका जवाब आम जनता उसी समय देगी जब उनसे उनके क्षेत्र की सफाई व्यवस्था की जानकारी ली जाएगी।
सवाल - क्या कचरा संग्रहित करने वाले गीला-सूखा कचरा अलग-अलग डालने के लिए कहते हैं।
हकीकत - शहर में चल रहे कचरा संग्रहण वाहनों के साथ कर्मचारी तो होते हैं किंतु कौन सा कचरा कहां डालना है कोई नहीं बताता है। लोग मर्जी पड़े उस कंटेनर में सूखा या गीला कचरा डाल रहे हैं।
सवाल - क्या आप जानते हैं कि आपके शहर की ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्ति) को लेकर स्थिति क्या है।
हकीकत - शहर में ओडीएफ प्लस की टीम दौरा कर चुकी है और नगर निगम को इसका प्रमाण पत्र मिल चुका है। सफाई व्यवस्था ठीक नहीं होने से लोगों की नाराजगी भारी पड़ सकती है।
सवाल - क्या शहर में निगम द्वारा बनाए गए सामुदायिक या सार्वजनिक शौचालय ज्यादा साफ रहते हैं।
हकीकत - इस सवाल का जवाब जरुर हां में मिल सकता है क्योंकि निगम ने ओडीएफ प्लस के समय सार्वजनिक शौचालयों में कुछ अच्छी व्यवस्था और नियमित सफाई का प्रबंध किया है।
सवाल - आपको पता है कि आपके घर से निगम द्वारा लिए जाने वाले कचरे को कहां फेंका या निष्पादित किया जाता है।
हकीकत - इसका जवाब भी हां में मिल सकता है। सभी को पता है कि कचरा जुलवानिया के ट्रेचिंग ग्राउंड पर भेजा जाता है। वहां क्या स्थिति है इस बारे में कोई नहीं जानता है।

Chandraprakash Sharma Desk
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