विपरीत स्थिति में खुदकुशी नहीं, खुशी से चुनौतियों को अपने गले लगाएं

विपरीत स्थिति में खुदकुशी नहीं, खुशी से चुनौतियों को अपने गले लगाएं

Chandraprakash Sharma | Publish: May, 21 2019 05:46:27 PM (IST) | Updated: May, 21 2019 05:46:28 PM (IST) Neemuch, Neemuch, Madhya Pradesh, India

आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं : चिदम्बरानंद

रतलाम। आज समाज में जरा-सी प्रतिकूलता में लोग अपना जीवन दांव पर लगा देते हैं, आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। विपरीत परिस्थितियों के कारण ख़ुदकुशी करने वाले लोगों को ये सिद्धांत समझ लेना चाहिए कि परिस्थिति स्थिर नहीं है, लेकिन जीवन अनमोल है। परिस्थिति को परिश्रम से ही बदला जा सकता है। यह प्रभु की कारीगरी है कि उन्होंने पहले तकदीर बनाई और फिर रचा शरीर, मनुष्य जन्म चुनौतियों से संघर्ष कर लक्ष्य प्राप्ति के लिए मिला है। यह विचार महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती ने ब्रह्मलीन स्वामी ज्ञानानन्द महाराज के 28वें पुण्य स्मृति महोत्सव के दूसरे दिन अखंड ज्ञान आश्रम में व्यक्त किए। चिदम्बरानंद ने कहा कि आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं, लोगों को खुदकुशी को नहीं, खुशी से चुनौतियों को गले लगाना चाहिए। चुनौतियों को मुकाबला करने से ही जिंदगी आसाना हो सकती है।
कथा से दूर होगी व्यथा
स्वामी ने कथा में बताया कि कलियुग के प्रभाव में ज्ञान, वैराग्य, विचार, आचरण प्रभावित हुए हैं। सोचने समझने की शक्ति कमजोर हुई है, लेकिन इससे निराश होने की जरूरत नहीं है। कथा श्रवण से जीवन की हर व्यथा का अंत होता है। इसलिए प्रयत्नशील रहकर कथा का श्रवण करना चाहिए। गंगा स्नान, तीर्थ दर्शन और कथा श्रवण से अमित पुण्य होता है। इनका जीवन में लाभ लेने वाले कभी हताशा, निराशा के शिकार नहीं होते बल्कि उत्साह और उमंग से मानव जन्म के लक्ष्य पूर्ण करते है, कथा-सत्संग हमारा पथ प्रदर्शन कर जीने की राह दिखाती है।
शास्त्र-संत का आश्रय
हर व्यक्ति को कर्म फल भोगना पड़ता है, ये अटल है। कर्म करते समय बहुत सावधान रहे, जिनके जीवन में मार्गदर्शन के लिए गुरु नहीं होते है, वे भटक जाते है। अपनी किस्मत का रोना मत रोओ, शास्त्र और संत का आश्रय लेकर श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ से जीवन को सफल बनाइए।
शुभ संकल्प की परीक्षा, इनसे घबराए नहीं
स्वा मी ने बताया कि जो लोग सेवा, सत्संग और सद कार्यों के लिए समय नहीं होने का बहाना करते हैं, वे बड़े अभागे हैं, यदि आपका संकल्प शुभ हो तो प्रकृति भी आपका सहयोग करने के लिए तत्पर रहती है। हमेशा याद रखो, शुभ कार्य में विघ्न आकर हमारी परीक्षा लेते हंै, जो इनसे घबरा जाते हंै वे हार जाते है ंजो इन्हें कुचल देते है वे दुनिया में अपना नाम कर जाते है। इसलिए शुभ संकल्प को पूरा करने के लिए संकल्पित रहें।

 

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