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Ratlam News : यहां पर शोर पर नहीं किसी का जोर

देश का सर्वोच्च न्यायालय भले कहता हो रात 10 से सुबह 6 बजे तक शोर करने पर रोक है, लेकिन हकीकत यह है कि इसको कभी मध्यप्रदेश में गंभीरता से लिया ही नहीं गया। यही वो एक कारण है जिसके चलते शोर को मापने की मशीन कभी संभाग मुख्यालय के अलावा किसी जिले में नहीं दी गई।

रतलाम

Updated: February 22, 2022 07:25:50 pm

रतलाम. देश का सर्वोच्च न्यायालय भले कहता हो रात 10 से सुबह 6 बजे तक शोर करने पर रोक है, लेकिन हकीकत यह है कि इसको कभी मध्यप्रदेश में गंभीरता से लिया ही नहीं गया। यही वो एक कारण है जिसके चलते शोर को मापने की मशीन कभी संभाग मुख्यालय के अलावा किसी जिले में नहीं दी गई।
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इन दिनों कक्षा 10व 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं चल रही है। आए दिन प्रशासन व पुलिस के पास डीजे से लेकर अन्य प्रकार के होने वाले शोर की शिकायत पहुंचती है। पुलिस के जवाब पहुंचते है व डीजे को या तो बंद करवाते है या आवाज कम करवा देते है। ध्वनी प्रदूषण के मामले में संशोधनअािनियम 2010 की धारा 2 में शोर के बारे में काफी कुछ लिखा हुआ है। संभाग की बात करें तो उज्जैन को छोड़कर शोर को मापने के लिए कोई यंत्र नहीं है। जिले की बात करें तो तीन साल में सिर्फ पांच कार्रवाई की गई, उसमे भी 2021 में एक भी कार्रवाई नहीं की गई। मनौचिकित्सकों की माने तो शोर आमजन में गुस्सा से लेकर चिड़चिड़ापन बढ़ा रहा है।
ध्वनी प्रदूषण पर रोक

ध्वनी प्रदूषण को लेकर साफ नियम बने हुए है। इसमे डीजे से लेकर अन्य कोई ऐसा शोर जो शासन द्वारा मानक पैमाने से अधिक का हो, दंडनीय अपराध है। इस मामले में औद्योगिक क्षेत्र के शोर को भी शामिल किया गया है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनी प्रदूषण पर रोक हो, बल्कि सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक भी शोर का डेसिबल तय है। यह अलग बात है कि उज्जैन संभाग में सिर्फ संभाग मुख्यालय पर ही डेसिबल को मापने का यंत्र है।
स्वास्थ्य पर डाल रहा असर

नजरबाग क्षेत्र में एक मांगलिक धर्मशाला के करीब रहने वाली शांता पति मनोज के अनुसार उनके आवास के करीब ही धर्मशाला है। देर रात तक कई बार डीजे बजता है। इसका असर यह हुआ कि उनके सुनने की क्षमता कम हो गई। इसके अलावा बे वजह गुस्सा आने लगा व परिवार के छोटे सदस्य चिड़चिड़े होने लगे। जब इस बारे में चिकित्सकों को बताया तो उन्होंने इसके लिए लगातार कान में जा रहा अधिक मात्रा का शोर बताया।
2010 में बदल गए डेसिबल के नियम

क्षेत्र - सुबह 6 से रात 10 - रात 10 से सुबह 6

औद्योगिक क्षेत्र - 75 - 70
वाणिज्य क्षेत्र - 65 - 55
आवासीय क्षेत्र - 55 - 45
शांत क्षेत्र - 50 - 40

इतनी की गई कार्रवाई


वर्ष - संख्या


2019 - 3
2020 - 2
2021 - 0

कई प्रकार की बीमारियां होती

लगातार शोर से कई प्रकार की बीमारियां होती है। इससे सुनने की क्षमता कम होना, गुस्सा आना, चिड़चिड़ा होना प्रमुख है।
- डॉ. पवन शर्मा, ईएनटी विश्ेाषज्ञ, मेडिकल कॉलेज

शिकायत पर कार्रवाई

पुलिस द्वारा तय डेसिबल से अधिक के शोर के मामले में शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती है। कई बार सिर्फ फोन पर सूचना मिलती है, ऐसे में जहां डीजे या अन्य शोर हो रहा हो, उसको बंद या कम करवाया जाता है।
- अभिषेक तिवारी, एसपी

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IMAGE CREDIT: patrika

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