अस्पताल में चूहों के 300 बिल से परेशानी तो बुलाया कृषि विभाग को

जिला अस्पताल में चूहों के 300 बिल की पहचान की गई। इसके बाद जब इनको भगाने का कोई रास्ता नहीं नजर आया तो कृषि विभाग को बुलाया गया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी टीम को बुलाया और परिसर में पेस्ट कंट्रोल का काम शुरू करा दिया।

रतलाम। जिला अस्पताल में चूहों के 300 बिल की पहचान की गई। इसके बाद जब इनको भगाने का कोई रास्ता नहीं नजर आया तो कृषि विभाग को बुलाया गया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी टीम को बुलाया और परिसर में पेस्ट कंट्रोल का काम शुरू करा दिया। कुछ समय पूर्व चूहों ने शव को ही कुतर दिया था।

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जिला अस्पताल में आईसीयू में चूहे द्वारा मरीज के परिजन का पैर कुतरने के बाद एक बार फिर से अस्पताल प्रबंधन की नींद टूट गई। आनन-फानन में जब कुछ समझ नहीं आया तो सिविल सर्जन ने इस काम के लिए कृषि विभाग से मदद मांगी और विभाग के अधिकारी को बुलाकर और चूहे मारने के लिए मदद मांगी। इस पर विभागीय अधिकारी ने टीम को बुलाया और परिसर में पेस्ट कंट्रोल का काम शुरू करा दिया।

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बंद कर दिए बिल चूहों को

अस्पताल में परिसर में पहले दिन कृषि विभाग की टीम ने चूहे के करीब 300 बिलों में दवाई डालकर उन्हे बंद कर दिया, जिससे कि बिल में दवाई की गैस बने और उससे चूहे मर सके। इसके पूर्व अस्पताल प्रबंधन ने निजी फर्म से पेस्ट कंट्रोल कराया था लेकिन उसकी दवा चूहों पर बहुत ज्यादा असर नहीं कर सकी और चूहे मरने के बाद दोबारा जब हुए तो इनकी तादात और बढ़ गई थी, जिस कारण से यह घटना हुई है। अस्पताल प्रबंधन की माने तो हाल ही में उसके द्वारा पेस्ट कंट्रोल के लिए निविदा भी निकाली गई है। पिछली दो बार से निविदा निकालने पर स्थानीय फर्म ने इसमें हिस्सा नहीं लिया था और जो लोग इसमें शामिल होना चाह रहे थे, वह नियम के अनुरूप नहीं थे। इस कारण से दोनों बार किसी भी फर्म को पेस्ट कंट्रोल के लिए काम नहीं मिल सका, जिसके चलते यह हालात बने है। जिले के जावरा में शासकीय अस्पताल में पीएम कक्ष में रखे एक युवक के शव को चूहों ने कुतर लिया था। यह घटना 1 फरवरी 2019 की थी। युवक की मंदसौर से रतलाम आते समय ट्रेन में तबीयत खराब हो गई थी और बाद में उसने दम तोड़ दिया था। जीआरपी ने युवक को जावरा अस्पताल पहुंचाया था, जहां उसे मृत बताकर शव पीएम कक्ष में रख दिया था। अगले दिन सुबह जब पीएम कक्ष खुला तो शव को देख परिजन बिफर पड़े थे।

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पहले भी हुई घटना
चूहों के द्वारा मरीज का पैर कुतरे जाने की एक अन्य घटना 5 अगस्त 2019 की है। उस दिन आईसीयू में कोमा की हालत में भर्ती मरीज सूरजसिंह भाटी के पैर की एड़ी चूहे कुतर गए थे। उसके बाद एक अन्य वृद्ध महिला के हाथ का अंगूठा भी चूहे कुतर गए थे। उसके बाद अब यह तीसरा मामला सामने आया है, जबकि भवानीमंडी निवासी अजयसिंह जो कि पिता का उपचार करा रहे थे, उनके दोनों पैर के अंगूठे चूहे कुतर गए। जिला अस्पताल में 23 जुलाई 2016 की रात मेटरनिटी वार्ड के बाहर का छज्जा का गिरा था। इस हादसे की जांच में भी यही बात सामने आई थी कि पिल्लर के नीचे की मिट्टी बाहर निकालने से वजन से छज्जा धसने की बात सामने आई थी।

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यह कहना जिम्मेदारों का

ऑन लाइन निविदा बुलाई गई है। पूर्व में जो प्रक्रिया अपनाई थी, उसके तहत जिले में कोई भी फर्म उक्त काम करने के लिए तैयार नहीं थी। इस कारण से इस बार ई-निविदा निकाली गई है, जल्द ही प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। कृषि विभाग के माध्यम से पेस्ट कंट्रोल कराया ।
- डॉ. आनंद चंदेलकर, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, रतलाम

टीम के साथ पहुंचे थे
जिला अस्पताल पुर चूहे की परेशानी से निजात दिलाने के लिए टीम के साथ पहुंचे थे और करीब 300 बिलों को दवा डालकर बंद किया है शेष रहे बिलों में दवा डाली जाएगी।
- केशव सिंह गोयल, परियोजना सहायक संचालक आत्मा

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Ashish Pathak Reporting
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