साहब जनता के लिए जल्दी खाली करो विकास की पोटली

bhuvanesh pandya

Publish: Sep, 16 2017 02:05:35 (IST)

Ratlam, Madhya Pradesh, India
साहब जनता के लिए जल्दी खाली करो विकास की पोटली

- पांच माह में आधी निधि भी नहीं खर्च कर सके 5 विधायक

सचिन त्रिवेदी
रतलाम। विकास कार्यों को लेकर खुद को जनता का सबसे बड़ा हितैषी बताने वाले जिले के विधायक वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में अपनी-अपनी कोष की पोटली जनता के लिए आधी भी खाली नहीं कर पाएं हैं। जिले के ग्रामीण विधायक को छोड़ अन्य विधायक इस राशि का अधिकांश हिस्सा पांच माह से लेकर बैठे हैं, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप खर्च नहीं कर पाएं हैं। जिले के विधायक चुनावी वर्ष से पहले अपनी निधि खर्च करने में तमाम गणित लगा रहे है। करीब १० करोड़ रुपए की आवंटित निधि की तुलना में ५ विधायकों ने मिलकर वर्ष के शुरुआती ५ माह के दौरान ३ करोड़ से कुछ ज्यादा राशि ही खर्च की है, जबकि उनके कोष में अगले सात माह के लिए अब भी करीब ७ करोड़ रुपए की निधि शेष है। हालांकि घोषणाएं और अनुशंसा हर विधानसभा में तेज गति से हो रही है, लेकिन खर्च के ब्यौरे में रतलाम ग्रामीण विधायक सबसे आगे है। शहर के खाते में पहले ५ माह में खर्च जीरो है।

जिला योजना एवं सांख्यिकी विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस वित्त वर्ष के शुरुआती ५ माह में जिले के पांचों भाजपा विधायक सरकार से जारी १० करोड़ की विधायक निधि व स्वेच्छानुदान का आधा हिस्सा भी खर्च नहीं कर पाएं है। रतलाम शहर के विधायक तथा राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष चेतन्य काश्यप निधि खर्चने में आखिरी पायदान पर हैं। उनकी विधायक निधि से एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ है, हालांकि रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर ने साख बचाते हुए जारी राशि का ८० फीसदी हिस्सा खर्च कर दिया है। वहीं, आलोट विधायक जितेन्द्र गेहलोत, जावरा विधायक डॉ. राजेन्द्र पांडेय और सैलाना विधायक संगीता चारेल भी अपनी निधि का आधे से भी कम हिस्सा खर्च कर सके हैं। ५ माह में घोषणा और अनुशंसा तो बहुत हुई, लेकिन इसकी तुलना में विधायक निधि जारी होने का आंकड़ा रफ्तार से आगे नहीं बढ़ पाया है।

हर विधायक के खजाने में १.८५ लाख निधि
विधानसभा सचिवालय के मुताबिक, पहले हर विधायक को निधि के रूप में एक वित्तीय वर्ष के लिए ७७ लाख रुपए की राशि के कार्यो की मंजूरी का अधिकार था, लेकिन इसे बाद मेें बढ़ाकर एक करोड़ ८५ लाख रुपए कर दिया गया है। वहीं, हर विधायक के पास १५ लाख रुपए स्वेच्छानुदान की राशि भी होती है। विधायक की मंजूरी के बाद इन कार्यो के लिए प्रशासकिय स्वीकृति कलेक्टर स्तर से दी जाती है। भाजपा विधायकों को भी अप्रैल २०१७ से उनके खजाने में ९ करोड़ २५ लाख विधायक निधि एवं करीब ७५ लाख रुपए स्वेच्छानुदान की राशि सरकार की ओर से दी गई है, इस पर प्रशासनिक मंजूरी बाद राशि जारी होती है।

महज ३ करोड़ १६ लाख तक ही खर्च किए
आंकड़े बताते हैं कि विधायकों ने इस वर्ष अप्रैल २०१७ से सितम्बर माह तक कार्यों के लिए महज ३ करोड़ १६ लाख ९३ हजार रुपए ही दिए हैं। यह राशि अगस्त माह तक की अनुशंसाओं पर आधारित हैं। विधायकों के पास अब भी करीब ७ करोड़ रुपए से ज्यादा राशि निधि से देने के लिए है। इसका उपयोग अगले सात माह के दौरान किया जा सकता है।

इस तरह निधि और खर्च का ब्यौरा
रतलाम शहर विधायक चेतन्य काश्यप, १.८५ लाख, खर्च ००
रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर, १.८५ लाख, खर्च १ करोड़ ११ लाख
जावरा विधायक डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय, १.८५ लाख, खर्च ८१.६१ लाख
आलोट विधायक जितेन्द्र गेहलोत, १.८५ लाख, खर्च ५६.०२ लाख
सैलाना विधायक संगीता चारेल, १.८५ लाख, ५८.३० लाख

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