दो हजार साल के जैन इतिहास में पहले जैन संत थे तरुण सागर जिन्होंने 13 साल की उम्र में लिया था संन्यास

समाधिस्थ जैनाचार्य के एकमात्र शिष्य क्षुल्लक पर्वसागर ने सुनाया जीवन दृष्टांत

By: sachin trivedi

Published: 09 Jun 2020, 08:38 PM IST

सोनकच्छ. समाधिस्थ जैन आचार्य तरुणसागर के 53वें तरुण अवतरण (जन्म जयंती) के 26 दिवसीय तरुण जीवन संवाद का दूसरा चरण मंगलवार से शुरू हुआ। उनके एकमात्र शिष्य क्षुल्लक पर्व सागर ने तरुण सागर के जीवन पर संवाद करते हुए बताया कि आचार्य जिनसेन और कुंदकुंद के बाद जैन इतिहास के 2000 साल के इतिहास में गुरुदेव तरुणसागर पहले जैन संत थे जिन्होंने इतनी कम उम्र में संन्यास लिया था और उनका यह कदम उन्हें क्रांतिकारी संत के नाम से विख्यात कर गया। जब वे अपने घर से आचार्य पुष्पदंत सागर से जैन संन्यास लेने के लिए निकले और पुष्पदंत सागर ने पवन को तरुणसागर बनाने की घोषणा की तो देश का जैन समाज विरोध में खड़ा हो गया कि इतनी कम उम्र में संन्यास दीक्षा नहीं दे सकते। आप संन्यास का खिलवाड़ कर रहे हंै। तब गुरु पुष्पदंत सागर ने समाज के विरोध पर ध्यान न देकर पवन की काबिलियत को देखकर दीक्षा दी और दुनिया ने देखा कि पवन ने जीवन की क्रांति के साथ देश व दुनिया में धर्म की क्रांति की। युवाओं में धर्म के प्रति आस्था का एक अभिनव आंदोलन छेड़कर क्रांति की। 13 वर्ष की उम्र में घर त्याग कर महावीर के दर की ओर आगे बढ़े तो पूरा गांव भी साथ चल दिया। घर-परिवार वालों ने सोचा कि पुष्पदंत सागर समझाकर या जैन संन्यास के कठिन नियम-त्याग बताकर परीक्षा लेंगे और पवन संन्यास से इंकार कर देगा फिर हम हंसी-खुशी घर आ जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और पुष्पदंत सागर ने पवन से सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू किया तो पवन तूफान की तरह अपने आत्मविश्वास के साथ हर सवाल का जबाब देते रहे और अंत में 11 वां सवाल किया कि तुम्हें अब अपने सिर के बाल हाथों से निकलवाने पड़ेगे, तब बालक पवन बोले मैं बाल निकलवाऊंगा नहीं बल्कि खुद अपने हाथों से बाल निकालूंगा। तब पुष्पदंत सागर बैठे सैकड़ों लोग और परिवार से बोले कि इसे अब भगवान बनने से मैं क्या भगवान महावीर भी नहीं रोक सकते और 18 जनवरी 1982 को उन्होंने अपने जीवन की क्रांति का पहला कदम उठा इतिहास रच दिया।

अहमदाबाद गुरु परिवार ने की आरती
मंगलवार को दूसरे चरण के पहले दिन संध्या गुरु आरती गुुजरात के अहमदाबाद गुरु परिवार द्वारा संपादित की गई। साथ ही तरुण संवाद में पर्वसागर द्वारा सवाल-जवाब की प्रतियोगिता में सवाल किया कि समाधिस्थ आचार्य तरुण सागर के संन्यास के निर्णय पर गुरु पुष्पदंत सागर के खिलाफ जैन समाज किस बात पर विरोध कर रहा था।

देेंखे, पत्रिका देवास फेसबुक पेज पर लाइव आरती
प्रतिदिन रात 8 बजे ऑनलाइन आरती हो रही है। पत्रिका के फेसबुक पेज पत्रिका देवास पर इस लाइव आरती को देखा जा सकता है। कोड को स्कैन करने पर आप आरती से जुड़ सकते हैं।https://www.facebook.com/groups/600779590788755/permalink/604824823717565/?sfnsn=scwspwa&funlid=6Y0JhZeZKBw8l5Jv

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