डॉक्टर अवकाश पर थे, ठेकेदार के कर्मचारियों ने तोड़ा सरकारी आवास का शौचालय

- बिना सूचना के शौचालय तोडऩे और दरवाजा ले जाने की डॉक्टर ने पुलिस से की शिकायत

By: Sourabh Pathak

Published: 03 Dec 2019, 10:56 PM IST

रतलाम। जिला अस्पताल में नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. बीआर रत्नाकर के अस्पताल परिसर स्थित आवास के शौचालय का दरवाजा व उसकी छत पर लगे पतरे गायब होने का मामला सामने आया है। इस बात की जानकारी डॉक्टर को अवकाश से सोमवार को लौटने पर मिली। वह जब घर के पीछे शौचालय में गए तो वहां पर दरवाजा और ऊपर लगे पतरे गायब थे। डॉक्टर ने इसे चोरी होना समझकर इसकी शिकायत पुलिस से की है। हालांकि अस्पताल में डॉक्टरों के आवास के डिस्मेंटल का काम चल रहा है। आशंका है कि मजदूरों ने उसे खाली आवास समझकर तोड़ दिया होगा।

डॉ. रत्नाकर ने बताया कि उनका परिवार इंदौर में रहता है, वे रविवार का अवकाश होने से परिवार से मिलने इंदौर गए थे। सोमवार सुबह वह घर लौटे और पीछे जाकर देखा तो शौचालय पर लगा लकड़ी का दरवाजा और उसके ऊपर लगे पतरे गायब थे। इतना ही नहीं बारिश के पानी से बचने के लिए छत पर लगाई गई प्लास्टिक त्रिपाल भी गायब थी। डॉक्टर को चोरी की आशंका हुई तो उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की। हालांकि जिला अस्पताल में जर्जर आवासों को तोडऩे का काम चल रहा है लेकिन बिना अनुमति शौचालय तोडऩे और उसका दरवाजा निकालकर ले जाने के मामले में उन्होंने विरोध जताया है।

सीएस ने दी सफाई
इस पूरे मामले में सिविल सर्जन डॉ. आनंद चंदेलकर का कहना है कि डॉ. रत्नाकर के यहां चोरी नहीं हुई है। वह कहीं बाहर गए होंगे तो ठेकेदार के कर्मचारी उक्त भवन को भी खाली समझकर उनके यहां से शौचालय का दरवाजा व उसकी छत पर लगे पतरे निकाल कर ले गए है। सीएस ने बताया कि भवन जर्जर होने से डॉक्टर रत्नाकर को आवास खाली करने के लिए चार बार नोटिस दिया जा चुके हैं लेकिन आज तक उन्होंने भवन खाली नहीं किया। भवन को जर्जर व खाली देख ठेकेदार के कर्मचारियों ने यह काम किया होगा।

सिविल सर्जन के नाम दो आवास आवंटित
डॉक्टर रत्नाकर ने बताया कि सिविल सर्जन डॉ. आनंद चंदेलकर के नाम से दो आवास आवंटित हैं, लेकिन मुझे अच्छा आवास नहीं आवंटित किया जा रहा है। डॉ. चंदेलकर ने एक आवास अस्पताल परिसर में अपने नाम आवंटित करवा रखा है, वहीं दूसरा आवास अलकापुरी में है। डॉ. रत्नाकर ने बताया कि ये आवास विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए ही हैं इसके बावजूद मुझे आवास नहीं दिया गया, और वे जर्जर आवास में रह रहे हैं। डॉ. चंदेलकर ने अपने बचाव में बताया कि अस्पताल में जो आवास हैं, उसमें शौचालय आदि नहीं है, तो एेसे आवास में वह परिवार के साथ कैसे रह सकते हंै, इस कारण से उन्होंने दूसरा आवास भी स्वीकृत गया है। जिला अस्पताल वाला आवास खाली पड़ा है। डॉ. रत्नाकर के लिए दूसरे आवास की व्यवस्था जल्दी ही की जाएगी।

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Sourabh Pathak Reporting
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