टीम को देखा तो चप्पल-जूते पहने बिना लगाई दौड़

टीम को देखा तो चप्पल-जूते पहने बिना लगाई दौड़
Ratlam News

vikram ahirwar | Updated: 15 Jan 2017, 09:53:00 AM (IST) Ratlam, Madhya Pradesh, India

 ये लोग बेरोकटोक धड़ल्ले से दुकान चलाकर ग्रामीणों का उपचार कर उनकी जिदंगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। कहने को स्वास्थ्य विभाग ने आशा के साथ अन्य सदस्य रखे हैं। फिर भी ग्रामीण झोलाछाप से उपचार करवाने को  मजबूर हैं।



रतलाम/जावरा। जिले के लगभग हर गांव में झोलाछाप और बिना डिग्री के धड़ल्ले से इलाज करने वालों पर प्रशासन का कोई अंकुश नजर नहीं आता है। ये लोग बेरोकटोक धड़ल्ले से दुकान चलाकर ग्रामीणों का उपचार कर उनकी जिदंगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। कहने को स्वास्थ्य विभाग ने आशा के साथ अन्य सदस्य रखे हैं। फिर भी ग्रामीण झोलाछाप से उपचार करवाने को  मजबूर हैं। आलम यह है कि स्वयं को डॉक्टर कहलवाने वाले यह लोग उपचार के साथ दवाइयां भी बेचते हैं। इंजेक्शन, बोतल भी लगाते हैं। कहीं मेडिकल की आड़ में क्लीनिक चल रहा है। तो कहीं डॉक्टर इलाज के साथ ही कुछ बीमारियों के धागे बनाकर भी ग्रामीणों को दे रहे हैं। पत्रिका ने धराड़ और पिपलौदा क्षेत्र में जांच की तो ये हालात दिखे। 

हमें झोलाछाप नहीं, अपात्र कहो

पिपलौदा में बस स्टैंड से अंदर जाते समय मुख्य मार्ग पर कृष्णा क्लीनिक के डॉ. केएल राठौर का बोर्ड लगा है। छोटे से गलियारे में लगी एक टेबल और एक बैंच के बाद आगे टेबल-कुर्सी लगी है। राठौर स्वयं को रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टिसनर (आरएमपी) बताते हुए 90 प्रतिशत उपचार आयुर्वेद पद्धति से करने का दावा कर रहे हैं। पास में एक बैंच पर एक बुजुर्ग महिला लेटी है और उसेे सलाइन चढ़ रही थी। राठौर कहते हैं कि झोलाछाप शब्द उनके लिए उपयोग करना गलत है। उन्हें अनक्वालिफाइड (अपात्र) कहे तो समझ आता है। हमारा क्या दोष शासन-प्रशासन का एक सिस्टम तो यह करे। हमें बंद करने का आदेश दे तो हम बंद करें दें। 

मैं डॉक्टर नहीं हूं, वे बाजार गए

ग्राम धराड़ में चौपाटी से भाटी बड़ौदिया रोड पर पहुंचते ही मुख्य सड़क से पीछे बनी दुकानों में परिवार के साथ रहकर इलाज की दुकान चलाने वाले बंगाली मोनिंद्र विश्वास के पास भले ही एलोपैथी की डिग्री नहीं है लेकिन ग्रामीणों का एलोपैथी से इलाज ही करते हैं। यही नहीं वे कुछ बीमारियों का धागे और मंत्र पढ़कर पानी भी देते हैं। पत्रिका टीम जैसे ही शुक्रवार दोपहर उनके निवास पहुंची। वे कुछ देर बाद अंदर से जैसे ही आए। समझ गए कि कोई जांच करने आया है। सीधे कहने लगते हैं मैं डॉक्टर नहीं हूं। एक परिचित बाइक लेकर आता है, तो उसे बाइक से उतरने से मना करते हुए बिना जूते-चप्पल पहने ही बाइक पर बैठकर भागने लगा। टीम ने डॉक्टर का पूछा तो जवाब नहीं दिया और भाग खड़े हुए। काफी देर बाद टीम फिर से पहुंची तो वे वहीं मिल गए। कहने लगे मैं तो इलाज नहीं करता हूं। 
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