ये हैं देवताओं के 24 चमत्कारी मंत्र

ये हैं देवताओं के 24 चमत्कारी मंत्र
Ratlam News

vikram ahirwar | Updated: 15 Jan 2017, 03:34:00 PM (IST) Ratlam, Madhya Pradesh, India

इष्टसिद्धी से आशय किसी एक देवता को श्रद्धा व भक्ति के साथ अपना लेना। जब किसी देवता को अपनाते हैं तो उनसे जुड़ी शक्तियां लगातार मंत्र जन के बाद मिलने लगती है। शास्त्रों के अनुसार मंत्र के 24 अक्षर 24 प्रकार की महाशक्ति के संकेत देते है।



रतलाम। धर्मग्रंथों के अनुसार शक्ति, सफलता व इच्छाएं पुर्ण करने के लिए देवताओं की बहुत जरुरत होती है। इसके लिए इष्टसिद्धी की जाती है। इष्टसिद्धी से आशय किसी एक देवता को श्रद्धा व भक्ति के साथ अपना लेना। जब किसी देवता को अपनाते हैं तो उनसे जुड़ी शक्तियां लगातार मंत्र जन के बाद मिलने लगती है। ज्योतिषी आनंद त्रिवेदी के अनुसार गुरु का ध्यान किसी भी मंत्र की शुरुआत में जरूरी होता है। शास्त्रों के अनुसार मां गायत्री मंत्र के 24 अक्षर 24 प्रकार की महाशक्ति के संकेत देते है।

24 देवशक्तियों के 24 गायत्री मंत्र देवी-देवता के विभिन्न अलग-अलग ग्रंथ में बताए गए है। इनको अलग-अलग कारणों से जप किया जाता है। लगातार जप से विशेष प्रभाव मिलते है व मन की इच्छाएं पुरी होने लगती है। इनके जप से शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक व भौतिक शक्तियों की प्राप्ति होती है। ज्योतिषी त्रिवेदी के अनुसार गायत्री ही वह शक्ति है जो पुर्ण सृष्टि की रचना, स्थिति या पालन के साथ संहार का कारण है। वेद में गायत्री को आयु, शक्ति, तेज, किर्ती के साथ धन देने वाला माना गया है।

परीक्षा में सफलता के लिए

ऊं एकदृष्ट्राय विद्यमहे, वक्रतुंडाय धीमहि तन्न बुद्धि प्रचोदयात।

शत्रु को हराने के लिए

ऊं उग्रनृसिंहाय विद्यमहे, वज्रनखाय धीमहि तन्न नृसिंह प्रचोदयात।

पालन क्षमता बढ़ाने के लिए

ऊं नारायणाय विद्यमहे, वासुदेवाय धीमहि तन्न विष्णु प्रचोदयात।

अमंगल का नाश करने के लिए

ऊं पंचवक्त्राय विद्यमहे, महादेवाय धीमहि तन्न रुद्र प्रचोदयात।

खुबसूरती बढ़ाने के लिए

ऊं देवकीपंदाय चिद्यमहे, वासुदेवाय धीमहि तन्न कृष्ण प्रचोदयात।

घृणा दूर करने के लिए

ऊं वृषभानुजाये विद्यमहे, कृष्णप्रियाये धीमहि, तन्न राधा प्रचोदयात।

लक्ष्मी प्राप्ति के लिए

ऊं महालक्ष्म्ये विद्यमहे, विष्णुप्रियाये धीमहि, तन्न लक्ष्मी प्रचोदयात।

अग्नि के समान तेज पाने के लिए

ऊं महाज्वालाय विद्यमहे, अग्निदेवाय धीमहि तन्न अकग्न प्रचोदयात।

अनिष्ट व भय दूर करने के लिए

ऊं सहस्त्रनेत्राय विद्यमहे, वज्रहस्ताय धीमहि तन्न इंद्र प्रचोदयात।

बुद्धि व सफलता के लिए

ऊं सरस्वतये विद्यमहे, ब्रहमपुत्री धीमहि तन्न देवी प्रचोदयात।

विघ्न का नाश करने के लिए

ऊं गिरिजाये विद्यमहे, शिव धीमहि तन्न दुर्गा प्रचोदयात।

हनुमान की तरह दृढ़वान होने के लिए

ऊं अंजनीसुताय विद्यमहे, वायुपुत्राय धीमहि तन्न मारुति प्रचोदयात।

मजबूत इरादे पाने के लिए

ऊं पृथ्वी देव्ये विद्यमहे, सहस्त्र मूत्ये धीमहि तन्न पृथ्वी प्रचोदयात।

निरोगी काया पाने के लिए

ऊं भास्कराय विद्यमहे, दिवाकराय धीमहि तन्न सूर्य प्रचोदयात।

गुस्सा कम करने के लिए

ऊं दशरथये विद्यमहे, सीतावल्लभाय धीमहि तन्न राम प्रचोदयात।

मन के विकार दूर करने के लिए

ऊं जनकनंन्दिन्ये विद्यमहे, भूमिजाये धीमहि तन्न सीता प्रचोदयात।

निराशा दूर करने के लिए

ऊं क्षीरपुत्राये विद्यमहे, अमृततत्वाय धीमहि तन्न चंद्र प्रचोदयात।

मृत्यु के भय को दूर करने के लिए

ऊं सूर्यपुत्राय विद्यमहे, महाकालाय धीमहि, तन्न यम प्रचोदयात।

सृजनशक्ति बढ़ाने के लिए

ऊं चतूर्मुखाय विद्यमहे, हंसारुढ़ाए धीमहि तन्न ब्रहमा प्रचोदयात।

बरसात लाने के लिए

ऊं जलबिम्बाय विद्यमहे, नीलपुरुषाय धीमहि तन्न ब्रहमा प्रचोदयात।

चरित्र मजबूत बनाने के लिए

ऊं नारायणाय विद्यमहे, वासुदेवाय धीमहि, तन्न नारायण प्रचोदयात।

साहसी बनने व मुसीबत से दूर होने के लिए

ऊं वाणीश्वराय विद्यमहे, हयग्रीवाय धीमहि तन्न हयग्रीव प्रचोदयात।

यश व कीर्ति पाने के लिए

ऊं परमहंसाय विद्यमहे, महाहंसाय धीमहि तन्न हंस प्रचोदयात।

सुखी दांपत्य जीवन के लिए

ऊं श्री तुलस्ये विद्यमहे, विष्णु प्रियाये धीमहि तन्न वृन्दा प्रचोदयात।

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