ex prime minister Atal Bihari Vajpayee - जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी ने कहा था ये तो शिवाजी की तरह है

ex prime minister Atal Bihari Vajpayee  - जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी ने कहा था ये तो शिवाजी की तरह है

Ashish Pathak | Updated: 16 Aug 2019, 04:53:03 PM (IST) Ratlam, Ratlam, Madhya Pradesh, India

ex prime minister Atal Bihari Vajpayee - आज उनकी पहली बरसी है। रतलाम से लेकर मंदसौर व नीमच जिले में अनेक बार अटल जी का आना हुआ। रतलाम रेंज की बात करें तो भाजपा कार्यकर्ताओं से लेकर सर्किट हाउस के कर्मचारियों तक में उनकी अनेक स्मृति बसी हुई है

रतलाम। Atal Bihari Vajpayee latest news - पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपैयी को 16 अगस्त को पूरा देश याद कर रहा है। आज उनकी पहली बरसी है। रतलाम से लेकर मंदसौर व नीमच जिले में अनेक बार अटल जी का आना हुआ। रतलाम रेंज की बात करें तो भाजपा कार्यकर्ताओं से लेकर सर्किट हाउस के कर्मचारियों तक में उनकी अनेक स्मृति बसी हुई है। ये बात कम लोगों को पता है कि अटल जी ने ही नीमच के पूर्व विधायक खुमानसिंह को शिवाजी की उपाधी दी थी। इतना ही रतलाम की कचौरी को तो वे खास खाना पसंद करते थे।

नीमच के पूर्व विधायक स्वर्गीय खुमानसिंह शिवाजी की भाषण शैली और उनके संघर्षों से प्रभावित होकर पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने उन्हें शिवाजी नाम दिया था। बाद में प्यार से कार्यकर्ता उन्हें शेर शिवाजी भी कहने लगे थे। हुआ यूं था कि कश्मीर आंदोलन के दौरान मंच पर खुमानसिंह चौहान भाषण दे रहे थे। उनकी भाषण शैली ठीक अटलबिहारी वाजपेयी जैसी थी। जब तक चौहान भाषण देते रहे उपस्थित जनसमूह एकटक भाषण सुनता रहा। यही भाषण वहां मौजूद अटलबिहारी वाजपेयी भी सुन रहे थे। जब उनका भाषण समाप्त हुआ इसके बाद मंच पर अटलजी पहुंचे। उन्होंने पूछा जो अभी भाषण दे रहा था वो कौन था। उसकी भाषण शैली ठीक मेरे जैसी है। तब उन्हें बताया गया कि नीमच मध्यप्रदेश से खुमानसिंह चौहान भाषण दे रहे थे। तब उन्होंने शिवाजी को मंच पर बुलाया और अपनी जैसी भाषण शैली के लिए सम्मान किया। यहीं अटलजी को बताया गया कि कश्मीर आंदोलन में खुमानसिंह को पांव में गोली भी लगी थी।

Atal Bihari Vajpayee

तब तांगे से पहुंचे थे जनसंघ कार्यालय

भाजपा के महेंद्र भटनागर ने बताया कि बात वर्ष 1968 की है। तब नीमच सिटी चौराहे पर जनसंघ कार्यालय हुआ करता था। तब अटलबिहारी वाजपेयी तांगे से यहां पहुंचे थे। उन्होंने जनसंघ कार्यालय में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से चर्चा की थी। तब वे सांसद थे। भटनागर ने बताया कि अटल जी के निधन से पार्टी को तो अपूर्णीय क्षति हुई है। वे ऐसे नेता जो विपक्ष के बीच भी सम्मानीय थे। वे तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे थे। उनका स्थान भाजपा राजनीति में कोई नहीं ले सकता। अटलजी को यह भी बताया गया कि आंदोलन के दौरान उन्होंने कैसे विषम परिस्थितियों में तैरकर रावी नदी पार की थी। खुमान सिंह के संषर्घ से प्रभावित होकर अटल जी ने उनकी तुलना शिवाजी से करते हुए उन्हें शिवाजी नाम दिया। इसके बाद से वे खुमानसिंह शिवाजी नाम लिखने लगे और इसी नाम से प्रसिद्ध भी हुए।

अलग पहचान बनाई इस वजह से

अटल जी कार्यकर्ताओं में सबसे अधिक लोकप्रिय उनकी कार्यकरने की पद्धती के कारण रहे। वे जब भी रतलाम आते तो वीआईपी रुम के बजाए कार्यकर्ताओं के साथ बैठना पसंद करते। रेलवे स्टेशन पर उनके लिए वीआईपी कक्ष रखा जाता लेकिन वे गार्ड से लेकर इंजन चालक की पेटी पर बैठ जाते व कार्यकर्ताओं से देर तक बात करते रहते। राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष हिम्मत कोठारी के बताया कि उनकी ये सादगी ही उनको अन्य से अलग बनाती रही। जिला सहकारी बैंक के अशोक चौटाला ने बताया कि वे जब भी रतलाम आते यहां की कचोरी व नमकीन उनको विशेष पसंद रही। लेकिन साथ में ये भी कहते, पेट का ध्यान रखना।

Atal Bihari Vajpayee

अब्बा की तरह थे

ये सिर्फ पूर्व प्रधानमंत्री नहीं थे। ये नेता भी नहीं थे, ये तो मेरे लिए अब्बा जैसे थे। जब भी आते सबसे पहले परिवार के हाल जानते थे। कहते थे बेटियों को खुब पढ़ाना। जब उनको कचौरी खिलाता तो कहते, देख पंडित हूं, खुब खा जाउंगा, अब्दुल, फिर पंडित को बदनाम मत करना। ये कहना है रतलाम सर्किट हाउस के खानसामा अब्दुल का। अब्दुल उन कर्मचारियों में शामिल है, जिसने अटल जी की सेवा तब की, जब वे रतलाम आते थे। जब अब्दुल को वर्ष 2018 में ये बताया गया कि अटल जी नहीं रहे तो उनको पहले तो भरोसा ही नहीं हुआ। बाद में धीरे से बोले भारत ही नहीं पाकिस्तान ने भी इनका लोहा माना था, लेकिन सबसे प्यारी कचौरी का नाम सुनते ही उनकी मुस्कान खिल जाती थी। सच बताया जाए तो वे रतलाम डिलक्स ट्रेन से आते और सुबह उठते ही कचौरी के बारे में सवाल करते थे। नीमच से वापसी के दौरान जब रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार हो रहा था तो उनके लिए वीआईपी रूम खोल दिया गया, लेकिन वे जननेता की तरह आम यात्रियों के बीच बैठ गए। उन्होंने यात्रियों से देश के बारे मे काफी बात की। इसी बीच सर्किट हाउस में काम करने वाले अब्दुल उनके लिए गर्म-गर्म तेल से भरी हुई कचौरी लेकर आए। इस पर वे अब्दुल को बोले की पहले ही खूब खाना खिला दिया। इतना मत खिलाओ कि कोई ये कहे कि ये पंडित खूब खाता है। खा ता लूंगा, लेकिन बाद में ये कहकर बदनाम मत करना कि पंडित खाता खुब है। हालाकि तब भी उन्होंने स्वाद लेकर दो कचौरी खाई थी।

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