scriptWards became corridors of district hospital | जिला अस्पताल के गलियारे बन गए वार्ड, उपचार के लिए मरीज भर्ती | Patrika News

जिला अस्पताल के गलियारे बन गए वार्ड, उपचार के लिए मरीज भर्ती

अस्पताल के वार्ड में स्थान की कमी के चलते कही गलियारों में पलंग तो कहीं जमीन पर नजर आ रहे मरीज

रतलाम

Published: April 18, 2022 11:29:21 am


रतलाम। जिला अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को यहां उपचार के साथ दर्द भी मिल रहा है। यह दर्द यहां पर फैली अव्यवस्थाओं का है, जिससे मरीज और उनके परिजनों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इस कदर हो गए है कि वार्ड में जगह कम पड़ने पर मरीजों को कहीं गलियारे में पलंग लगाकर लेटा रखा है तो कहीं जमीन पर लेट उपचार की मजरूरी है।


जिला अस्पताल के गलियारे बन गए वार्ड, उपचार के लिए मरीज भर्ती
जिला अस्पताल के गलियारे बन गए वार्ड, उपचार के लिए मरीज भर्ती
जिला अस्पताल में इस तरह के हालात पैदा होना वैसे तो कोई नई बात नहीं है लेकिन गर्मी के इन दिनों में बिना पंखे के मरीज का इस तरह गलियारे और जमीन लेटकर उपचार कराना किसी दर्द से कम नहीं है। रतलाम में गर्मी अपना सितम ढहा रही है। तापमान 42 डिग्री तक जा पहुंचा है लेकिन वार्ड में भर्ती मरीज धीमी गति से चलते पंखों के भरोसे है तो बाहर गलियारे में भर्ती मरीजों को वह भी नसीब नहीं हो रहा है।
उपचार की मजबूरी में सब मंजूर
मरीजों की माने तो शासकीय अस्पताल में उपचार की मजबूरी है, इस कारण से यहां फिलहाल की िस्थति में सब मंजूर है। यदि पंखा मिल जाए तो ठीक नहीं तो परिवार के सदस्य ही हवा कर रहे है, वह काफी है। मरीज के साथ अस्पताल में रूकने वाले परिजन भी अव्यवस्था से परेशान है लेकिन कोई बोले भी तो किसे, उनकी सुनेगा कौन।
क्षमता से अधिक मरीज
जिला अस्पताल में वैसे भी क्षमता से अधिक मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। 500 बेड के इस अस्पताल में वर्तमान में 700 से अधिक मरीज भर्ती है, ऐसे में अव्यवस्था का फैलना भी लाजमी है। रतलाम में बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हो चुका है लेकिन वहां के अस्पताल की औपचारिक शुरुआत के इंतजार में अब तक मरीजों को वहां के अस्पताल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सिर्फ कोविड के दौर में यहां मरीजों को भर्ती किया गया था और वर्तमान में गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।
स्टे्चर भी खुद ला रहे
जिला अस्पताल में मरीजों को सिर्फ डॉक्टर और दवाएं ही उपलब्ध हो पा रही है। इसके अलावा कोई गंभीर मरीज आ जाए तो नीचले क्रम का स्टाफ नजर नहीं आता है। ऐसे में मरीज के परिजनों को पहले तो स्ट्रेचर तलाशना पड़ता है और फिर उसके बाद मरीज को उस पर लेटाकर डॉक्टर तक और फिर जरूरत पड़ी तो वार्ड तक ले जाते है।

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