आरटीई में इस बार क्या हुआ बदलाव, यहां पढ़े और जाने

आरटीई में इस बार क्या हुआ बदलाव, यहां पढ़े और जाने

kamal jadhav | Updated: 24 Apr 2019, 10:57:00 AM (IST) Ratlam, Ratlam, Madhya Pradesh, India

आरटीई में इस बार क्या हुआ बदलाव, यहां पढ़े और जाने

रतलाम। राज्य शिक्षा केंद्र ने इस बार शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के अंतर्गत निर्धन और वंचित समूह के बच्चों को निजी स्कूलों की प्रवेशित कक्षा की २५ फीसदी सीटों पर प्रवेश देने की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया है। इसी सत्र से लागू किए जा रहे नए बदलाव के अनुसार आवेदन के बाद दस्तावेजों का सत्यापन होगा और फिर पात्र पाए गए बच्चों के आवेदनों को ऑनलाइन करके इन्हें ही लॉटरी में शामिल किया जाएगा। ऐसा पहली बार हो रहा है जब पहले दस्तावेजों की जांच के बाद लॉटरी में शामिल किया जाएगा। यह नई प्रक्रिया इसी सत्र से लागू की जा रही है जिससे बाद में किसी तरह का विवाद उत्पन्न नहीं हो सके।
अब तक यह होता रहा
अब तक आरटीई में निजी स्कूलों की प्रवेशित कक्षा में वंचित समूह के बच्चों को प्रवेश देने की प्रक्रिया के अंतर्गत पहले ऑनलाइन आवेदन कराए जाते रहे हैं। ऑनलाइन हुए सारे आवेदनों को राज्य शिक्षा केंद्र राज्य स्तर पर निकाली जाने वाली लॉटरी में शामिल कर लेता और इसके बाद लॉटरी में जितने बच्चों के नाम आते उनके असल दस्तावेजों का सत्यापन का कार्य करता रहा है। नए सत्र से उन्हें ही लॉटरी में शामिल किया जाएगा जिनके दस्तावेज सही पाए जाते हैं या जो आवेदक पात्र होंगे।

संकुलस्तर पर होंगे सत्यापन
आवेदन के पश्चात आवेद प्रिंट निकालकर सारे दस्तावेजों के साथ अपने क्षेत्र में आने वाले संकुल पर इनका सत्यापन करवाएंगे। सत्यापनकर्ता अधिकारी इनका सत्यापन करके संकुल प्राचार्य के माध्यम से हर दिन इन दस्तावेजों के सत्यापन में पात्र और अपात्र पाए गए आवेदों की सूची अपनी सील और हस्ताक्षर से बीआरसीसी को भेजेंगे। संकुलों से मिलने वाले पात्र आवेदकों के आवेदनों को बीआरसीसी ऑनलाइन करेंगे और इन्हीं पात्र आवेदकों को ऑनलाइन लॉटरी में शामिल किया जाएगा।
इसलिए किया नियम में बदलाव
अब तक ऑनलाइन आवेदन के बाद सारे आवेदनों को लॉटरी में शामिल कर लिया जाता था। जिनका नाम लॉटरी में होता था उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता था। लॉटरी में नाम आने के बाद उनके दस्तावेजों के सत्यापन के समय विकट स्थिति बन जाती जब आयु, जाति या अन्य कारणों से आवेदक अपात्र हो जाते। इससे विवाद की स्थिति बन जाती और अभिभावक संतुष्ट नहीं हो पाता। इस प्रक्रिया में जिन स्कूलों में बच्चों के नाम होते और अपात्र हो जाते वहां सीटें खाली रह जाती।

आयु और प्रवेशित कक्षा
कक्षा ---------------------------- बच्चे की उम्र
नर्सरी/ प्री प्राइमरी ------------------ तीन से पांच साल के बीच
कक्षा पहली में प्रवेश ---------------- पांच से सात साल के बीच
नोट - आायु की गणना के लिए अलग से तारीख घोषित की जाएगी
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आयु के लिए ये दस्तावेज रहेंगे जरुरी
- जन्म प्रमाण पत्र
- एएनएम के रजिस्टर के अनुसार
- आंगनबाड़ी केंद्र के रजिस्टर के अनुसार
- अभिभावक द्वारा बच्चे की आयु का स्व घोषित प्रमाण पत्र

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