आपके श्रृंगार की कांग्रेस को है चिंता, इस सवाल से मोदी सरकार को घेरा

आपके श्रृंगार की कांग्रेस को है चिंता, इस सवाल से मोदी सरकार को घेरा

Sachin Trivedi | Publish: Jul, 04 2018 01:26:15 PM (IST) Ratlam, Madhya Pradesh, India

मोदी सरकार से पूछा, महिला के श्रृंगार पर जीएसटी लगाकर कैसा विकास कर रहे

रतलाम. जिला व शहर महिला कांग्रेस की बैठक में मंगलवार को राष्ट्रीय पर्यवेक्षक लता भाटिया ने जीएसटी पर सरकार को घेरा। भाटिया ने कहा कि महिलाओं की श्रंृगार की सामग्री पर जीएसटी और पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी नहीं, यह कैसा विकास है। महिलाओं को कांग्रेस की विचार धारा से जोडऩा होगा। उन्हें बताना है कि किस तरह भाजपा सरकार ने चार साल तक झूठ बोलकर झूठी घोषणाएं की, इसका खुलासा हमें करना होगा। भाटिया ने महिला कांग्रेस को और सक्रिय बनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर नियुक्तियां भी की है।

दो बत्ती स्थित कांग्रेस कार्यालय पर जिला व शहर महिला कांग्रेस, ब्लॉक, मंडलम एवं सेक्टर स्तर पर संवाद किया गया। बैठक में राष्ट्रीय पर्यवेक्षक भाटिया के साथ प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष यास्मिन शैरानी, शहर महिला कांग्रेस अध्यक्ष अदिति दवेसर भी मौजूद थी। बैठक में ब्लाक अध्यक्ष की घोषणा की गई। ब्लाक 1 की अध्यक्ष बबीता नागर, ब्लाक 2 की अध्यक्ष सुमति जाधव, ब्लाक 3 की अध्यक्ष पार्वती पंवार एवं ब्लाक 4 की अध्यक्ष तारा नकवी को नियुक्त किया गया। बैठक में भाटिया ने कहा कि फर्जी वोटिंग रोकने के लिए वोटर आईडी को आधार कार्ड के साथ क्यों नहीं जोड़ा गया है, इन मुद्दों के साथ हमें मैदान में उतरना है और संकल्प लेकर कांग्रेस की सरकार बनानी है। कार्यवाहक अध्यक्ष शैरानी ने कहा कि मुख्यमंत्री मामा बनते है पर कोई महिला सुरक्षित नहीं है। महिलाएं और छोटी बच्चियों में सुरक्षा को लेकर भय है। शहर महिला कांग्रेस अध्यक्ष अदिति दवेसर ने कहा कि नारी चाहे तो बदलाव आसानी से लाया जा सकता है। हमें अपने अधिकारों व सम्मान की लड़ाई लडऩी होगी। बैठक में विजयलक्ष्मी शर्मा, आरिफ कछवाया, संगीता कटारिया, रैना भंडारी, निशा श्रीवास्तव, नसीम बनो सहित अन्य कार्यकर्ता एवं नियुक्त ब्लॉक अध्यक्ष बबिता नागर सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहीं।

कोर्ट स्थानांतरित होने का भी किया विरोध
महिला कांग्रेस ने बैठक के बाद रतलाम न्यायालय को अन्य जगह स्थानांतरित करने का विरोध करते हुए कलेक्टोरेट में एक ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन में बताया कि यदि जिला न्यायालय भवन शहर से 10 किलोमीटर दूर हो गया तो विद्यार्थियों को शपथ पत्र बनवाने, नागरीको, वकील, पक्षकारों के साथ पुलिस व प्रशासन को भी आने-जाने की परेशानियों का सामना करना पढ़ेगा। यह रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से भी ज्यादा दूरी पर है।

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