World Food Day: मावा, बेसन और मिठाई के सैम्पलों की जांच में कई फेल

World Food Day: मावा, बेसन और मिठाई के सैम्पलों की जांच में कई फेल

Sachin Trivedi | Updated: 16 Oct 2018, 02:36:22 PM (IST) Ratlam, Madhya Pradesh, India

सावधान: मावा, बेसन और मिठाई के सैम्पलों की जांच में कई फेल

रतलाम. सरकार ने उपभोक्ताओं को शुद्ध व अच्छी खाद्य सामग्री मिले इसके लिए खाद्य सुरक्षा कानून लागू किया है। इसके तहत प्रत्येक अधिकारी को एक माह कम से कम चार सैम्पल लेना अनिवार्य है। जिला खाद्य एवं औषधि विभाग ने बीते तीन सालों में करीब पौने चार सौ सैम्पल लिए है, इसकी जांच में 25 प्रतिशत मामले ही मिसब्रांड व अमानक पाए गए। ७५ प्रतिशत मामले सही पाए गए हैं। मिसब्रांड व अमानक के सभी मामले कोर्ट व एसडीएम कोर्ट में चल रहे हैं। इन मामलों में एडीएम ने कुछ मामलों में कारोबारियों पर जुर्माना किया है। हालांकि इन मामलों में अभी तक किसी को सजा नहीं हुई है। मिली जानकारी के अनुसार जिला सुरक्षा अधिकारी कार्यालय में चार अधिकारी नियुक्त है। ऐसे में एक माह में एक अधिकारी को चार सेम्पल लेने का नियम है। ऐसे में एक साल में करीब 19२ सेम्पल होते हैं, लेकिन बीते दो साल के आकड़े पर नजर दौड़ाएं इन दो साल में विभाग ने 160 सेम्पल ही लिया है। वर्ष 18 में अब तक 108 सेम्पल लिए हैं। जबकि इस माह के अंत तक विभाग को 160 सेम्पल लेना अनिवार्य है ।

चलित लैब का प्रस्ताव फाइलों में अटका
खाद्य सुरक्षा कानून जब वर्ष २०११ में लागू किया गया था। तब सैम्पलों की जांच के लिए जिला स्तर पर चलित लैब शुरू करने का प्रस्ताव आया था। उसमें सेम्पलों की जांच तत्काल कर कार्रवाई करने की बात कही थी, लेकिन सात साल गुजर जाने के बाद भी अभी तक चलित लैब का प्रस्ताव फाइलों से बाहर नहीं आ पाया है। कुल्फी, तेल, मिर्ची, मावा, बेसन, मिठाई, चायपत्ती सहित पैकिंग आयटम के सैम्पल बीती रिपोर्ट में अमानक पाए गए है। सबसे बड़ी परेशानी भेजे जाने वाले सेम्पल की रिपोर्ट समय पर नहीं आ पाती है। इससे विभाग को कार्रवाई करने में परेशानी होती है। जांच रिपोर्ट 14 दिन में आनी चाहिए, लेकिन प्रदेश में एक मात्र लैब होने से रिपोर्ट आने में देरी होती है।

समय-समय पर विभाग सैम्पल का कार्य करता है
उपभोक्ताओं को सही व शुद्ध खाद्य सामग्री मिले। इसके लिए विभाग अलर्ट रहता है। विभाग त्योहारी सीजन व अन्य दिनों में समय-समय पर कार्रवाई कर सेम्पल लेता है। जांच में अमानक व मिसब्रांड पाए जाने पर विभाग संबंधितों के खिलाफ प्रकरण बना कर एडीएम कोर्ट में कार्रवाई के लिए प्रेषित किया जा ता है। एडीएम ऐेसे मामलों में जुर्माने की कार्रवाई करता है।

- आरआर सोलंकी, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी, रतलाम।

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