परकोटे में पर्यावरण के सारथी की गति थाम रहा प्रशासन

स्मार्ट सिटी में ई-रिक्शा बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं, लेकिन परिवहन विभाग की लापरवाही का खमियाजा ई-रिक्शा चालकों को उठाना पड़ रहा है

By: कमल राजपूत

Published: 15 Jan 2018, 12:14 PM IST

स्मार्ट सिटी में ई-रिक्शा बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं, लेकिन परिवहन विभाग की लापरवाही का खमियाजा ई-रिक्शा चालकों को उठाना पड़ रहा है। कई चालक तो अपने ई-रिक्शा सीज होने के डर से घर से ही नहीं निकाल रहे हैं। इस साल अब तक 105 ई-रिक्शा को यातायात पुलिस ने सीज किया है। जो ई-रिक्शा पर्यावरण के लिए संजीवनी साबित हो सकते हैं, उनको चालान के नाम पर दम घोंटा जा रहा है। ई-रिक्शा यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि साइकिल रिक्शा स्टेंड की जगह पर ई-रिक्शा स्टेंड भी बनाए जा सकते हैं।

बढ़ावा क्यों नहीं मिल रहा जब...
पर्यावरण के लिए फायदेमंद, गलियों तक में आसानी से पहुंच, सामान लाने ले जाने में भी आसान

10 दिन की ट्रेनिंग कौन देगा, पता नहीं
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ई-रिक्शा चालकों के स्थाई लाइसेंस बनाने में १० दिन की ट्रेनिंग रोड़ा बन रही है। यह अभी तक किसी को पता नहीं है कि इन्हें ट्रेनिंग कौन देगा? अभी तक मामला वाहन बेचने वाले डीलर, निर्माता या एनजीओ के बीच फंसा हुआ है।

स्मार्ट सिटी के लिए बेहतर विकल्प
जिस तरह से सरकार परकोटे को स्मार्ट सिटी बनाने में लगी है, उसमें ई-रिक्शा बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। लोगों का कहना है कि ई-रिक्शा संचालन के बाद से प्रदूषण रहित माहौल यहां पर पर्यटकों को मिलेगा। परकोटा से लो-फ्लोर बसों को बाहर किया जाए।

एक तरफ तो लो फ्लोर बसें धुआं फेंक रहीं हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण के लिहाज से बेहतर ई-रिक्शा को यातायात पुलिस बंद करने पर तुली है।
विजय भास्कर शर्मा, अध्यक्ष, सर्व ई-रिक्शा मजदूर यूनियन

ई-रिक्शा चालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इनके पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है। बीते चार-पांच दिन से कार्रवाई चल रही है। रोज 250 से 300 ई-रिक्शा का चालान किया जा रहा है।
नाजिम अली खान, एडिशनल डीसीपी, यातायात पुलिस


शुरुआत के दिनों में ई-रिक्शा चालकों के अस्थाई लाइसेंस छह माह के लिए जारी किए गए थे, लेकिन इनको स्थाई लाइसेंस अब तक नहीं मिल सके हैं। 10 दिन की ट्रेनिंग देने के बाद ही स्थाई लाइसेंस मिल सकेंगे।
राजीव त्यागी, जिला परिवहन अधिकारी, लाइसेंस शाखा

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