आम्रपाली मामला : फ्लैट खरीदारों को कब्जा सौंपने में देरी अधिकारियों को पहुंचाएगी जेल

  • सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा ग्रेनो प्राधिकरण अधिकारियों को लिया आड़े हाथ
  • अधिकारियों ने बताया, समस्या को निपटाने के लिए बनाई विशेष सेल

By: Saurabh Sharma

Updated: 13 Aug 2019, 06:03 PM IST

नई दिल्ली। आम्रपाली मामले में ग्रुप के मालिकों के अलावा अब सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों के खिलाफ सख्ती अपना ली है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ हिदायत दे दी है कि अगर फ्लैट खरीदारों को समय पर उनका मकान नहीं मिला तो उन्हें भी जेल में डाल दिया जाएगा। वास्तव में आज दोनों प्राधिकरण के अधिकारी अपना पक्ष और आम्रपाली को लेकर अपना प्लान लेकर पहुंचे थे।

यह भी पढ़ेंः- सोना हुआ 100 रुपए प्रति दस ग्राम हुआ सस्ता, चांदी 955 रुपए चमकी

प्राधिकरण अधिकारियों पर कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर खरीदारों को फ्लैटों का कब्जा सौंपने में उनकी ओर से कोई देरी हुई तो नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों को जेल भेजा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के इस रवैए के बाद सभी अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं। वहीं मामलों के निपटारे के लिए अपनी ओर से जुट गए हैं। वहीं कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों को आम्रपाली के फ्लैट खरीदने वाले ग्राहकों के पक्ष में फ्लैटों का पंजीकरण शुरू करने का निर्देश दिया। एक महीने के भीतर त्रिपक्षीय समझौते को निष्पादित करने के लिए भी आदेश दिया गया है, जहां खरीद करने वाले निवास कर रहे हैं।

यह भी पढ़ेंः- रुपए में गिरावट, ट्रेड वाॅर आैर सियाम की रिपोर्ट की वजह से डूबे 2.27 लाख करोड़

बनाया है विशेष सेल
मंगलवार को प्राधिकरणों के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्होंने आम्रपाली फ्लैट के खरीदारों की समस्याओं से निपटने के लिए एक विशेष सेल बनाया है। अधिकारियों ने न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ को बताया कि उन्होंने खरीदारों के मामलों से निपटने के लिए सेल बनाया है और अधिकारियों को विशेष रूप से इस मुद्दे को देखने के लिए नियुक्त किया गया है।

यह भी पढ़ेंः- कारों आैर दुपाहिया वाहनों की बिक्री में सदी की सबसे बड़ी गिरावट

कंपनी के लाइसेंस को किया रद
23 जुलाई को शीर्ष अदालत ने रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली ग्रुप के रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के लाइसेंस को रद्द कर दिया और सभी लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए राज्य द्वारा संचालित नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्प लिमिटेड (एनबीसीसी) को नियुक्त किया। कोर्ट ने पाया है कि समूह ने प्रथम दृष्ट्या (फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट) का उल्लंघन किया है और मनी लॉन्ड्रिंग सहित अन्य धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल रहा है और अपराधियों की पहचान करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गहन जांच की सिफारिश की है।

 

Business जगत से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter पर और पाएं बाजार, फाइनेंस, इंडस्‍ट्री, अर्थव्‍यवस्‍था, कॉर्पोरेट, म्‍युचुअल फंड के हर अपडेट के लिए Download करें patrika Hindi News App.

Show More
Saurabh Sharma
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned