सिंगल मॉम है तो ऐसे करें बच्चों की परवरिश, बन जाएगी हैप्पी फैमिली

सिंगल मॉम है तो ऐसे करें बच्चों की परवरिश, बन जाएगी हैप्पी फैमिली

Sunil Sharma | Publish: Sep, 26 2018 10:11:25 AM (IST) रिलेशनशिप

अक्सर सिंगल मॉम लोगों के क्रूर और अनचाहे सवालों से अपनी संतान को बचाने में खुद को असहाय पाती हैं।

मां का आंचल पकड़कर उनके चारों तरफ घूमना और डगमगाकर गिर जाना। घबराकर मां का हमें गोद में उठा लेना और खुद कराहते हुए हमारी चोट पर मरहम लगाना। हमारे खाना न खाने पर खुद भी भूखे सो जाना। हमारे खिलौनों को सजाना-नहलाना। जीवनभर मां के ढेरों रूप हमें अपनी ममता में संजोए रखते हैं।

मीरा ने जब रोहित से शादी की थी, तो उसकी आंखों में बहुत से सपने थे। लेकिन सृष्टि के जन्म के बाद जैसे रोहित पूरी तरह ही बदल गया। वह तीनों की जिम्मेदारी उठाने में खीजने लगा। मीरा ने उससे कहा भी कि वह जॉब करके उसकी मदद करेगी, लेकिन रोहित को यह मंजूर न था। हर छोटी-छोटी बात पर वह चिल्लाने लगा। मीरा ने अपने रिश्ते को संभालने की काफी कोशिश की। लेकिन हद तो तब हो गई, जब उसने मीरा पर हाथ उठाना भी शुरू कर दिया। एक दिन मीरा ने फैसला किया कि वह रोहित के साथ अब और नहीं निभा सकती। आज मीरा के तलाक को पांच साल हो गए हैं और वह सृष्टि के साथ बेहद खुश है। लेकिन फिर भी उसे कहीं न कहीं अकेलेपन और खालीपन का अहसास होता है।

यह दास्तां सिर्फ मीरा की नहीं है। ऐसी बहुत-सी महिलाएं हैं, जो तलाकशुदा या विधवा होने के कारण बतौर सिंगल पैरेंट अपना जीवन बिताती हैं। भले ही वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों और पुरूष के साए के बिना अपना जीवन जी रही हों, लेकिन इन सबके बीच अपने जीवन का खालीपन उन्हें काफी खलता है। एक तरफ उन्हें अपने बच्चों को हर तरह से संभालना होता है, दूसरी ओर खुद को भी संभालना पड़ता है।

ऐसे में जरूरी है कि दोनों में एक तरह का संतुलन हो। घर की जरूरतें पूरी करने में कहीं ऐसा न हो कि आप बच्चों को समय और प्यार देना भूल ही जाएं। फिर ऐसा भी न हों कि बच्चों का ख्याल रखते-रखते आप खुद को पूरी तरह उपेक्षित कर दें। विभिन्न अध्ययनों में देखा गया है कि सिंगल मॉम के बच्चे मानसिक बीमारियों या पढ़ाई-लिखाई में पिछड़ेपन के शिकार ज्यादा होते हैं। इसकी वजह है कि ऐसे बच्चों के पास सपोर्ट की कमी होती है। सिंगल मॉम होना कोई गुनाह नहीं। बस कुछ खास बातों पर ध्यान देकर सिंगल मॉम अपने बच्चों की सही परवरिश कर सकती हैं।

सिखाएं जवाब देना
अक्सर सिंगल मॉम लोगों के क्रूर और अनचाहे सवालों से अपनी संतान को बचाने में खुद को असहाय पाती हैं। दूसरे बच्चे जब पूछते हैं कि तुम्हारे पिता कहां हैं या तुम्हारे पापा तुम्हारे साथ क्यों नहीं रहते या स्कूल के फंक्शन्स में या पैरेंट-टीचर मीटिंग में वे क्यों नहीं आते, तो ऐसे में बच्चे असहज हो उठते हैं। अगर सिंगल मॉम शुरू से ही बच्चों को कहानी-किस्सों या उदाहरण के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर दें। तो बच्चों के लिए ऐसे सवालों का जवाब देना आसान हो जाएगा। बच्चा खुद को कॉन्फिडेंट महसूस करने लगता है।

मन में भर दें विश्वास
अपने बच्चे को कभी बेचारा महसूस न होने दें और न ही बात-बात में आज तेरे पापा होते तो...या भूल कर भी बिन बाप की औलाद ऐसी ही होती हैं जैसे जुमलों का इस्तेमाल न करें। अपने बच्चे के मन में विश्वास भर दें कि वे दूसरे बच्चों से किसी भी तरह से कम नहीं हैं। दूसरा व्यक्ति भी उसे हीन महसूस करवाने की कोशिश करे, तो दृढ़तापूर्वक कह दें कि हम जैसे हैं, बिल्कुल ठीक हैं और जीवन का आनंद उठा रहे हैं।

परिजनों से अच्छे संबंध
अपने ससुराल पक्ष या पीहर पक्ष से संबंध मृदु और सुदृढ़ रखें, ताकि आपके बच्चे को दादा-दादी या नाना-नानी, चाचा-चाची या मामा-मामी और परिवार के दूसरे बच्चों का साथ मिल सके। उनका मार्गदर्शन और साथ पाकर पारिवारिक वातावरण में पल-बढ़कर वे एक अच्छा इंसान बन सकेंगे। समय-समय पर खास दोस्तों, परिजन या सोसाइटी के लोगों के साथ बच्चे को मिलने-जुलने दे। पिकनिक पर या घूमने-फिराने भी ले जाएं।

परफेक्शनिस्ट न बनें
कई सिंगल मॉम जरूरत से ज्यादा जिम्मेदारी का बोझ लेकर चिड़चिड़ी हो जाती हैं। बच्चे की छोटी-सी कमी या गलती को बेहद गंभीरता से लेती हैं। बात-बात में टोकने से दोनों में दूरियां बढऩे लगती हैं। संबंधों में खटास आ जाती है। इसलिए परफेक्ट बनने-बनाने की कोशिश में न रहें।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned